sports
135वें डूरंड कप ट्रॉफी टूर का समापन, उद्घाटन मैच में भिड़ेंगे मोहन बागान और ईस्ट बंगाल

एशिया के सबसे पुराने फुटबॉल टूर्नामेंट डूरंड कप के 135वें संस्करण से पहले ट्रॉफी टूर का बुधवार को कोलकाता में समापन हो गया. पांचों मेजबान राज्यों की यात्रा पूरी करने के बाद डूरंड कप, प्रेसिडेंट्स कप और सिमला ट्रॉफी को कोलकाता में आयोजित एक समारोह में प्रदर्शित किया गया.
कोलकाता डर्बी से होगा टूर्नामेंट का आगाज
टूर्नामेंट की शुरुआत शनिवार को फुटबॉल प्रेमियों के लिए सबसे बड़े मुकाबलों में से एक कोलकाता डर्बी के साथ होगी. उद्घाटन मैच में मोहन बागान सुपर जायंट और ईस्ट बंगाल की टीमें आमने-सामने होंगी. यह मुकाबला साल्ट लेक स्टेडियम में खेला जाएगा.
कोलकाता में होंगे 16 मुकाबले
इस बार कोलकाता डूरंड कप का प्रमुख केंद्र रहेगा. शहर में कुल 16 मैच खेले जाएंगे, जिनमें उद्घाटन मुकाबले के साथ-साथ 23 अगस्त को होने वाला फाइनल भी शामिल है. 135वां डूरंड कप कोलकाता, रांची, गुवाहाटी, शिलांग और इम्फाल में आयोजित किया जाएगा. टूर्नामेंट में कुल 24 टीमें हिस्सा लेंगी, जिनमें श्रीलंका सशस्त्र बलों की एक विदेशी टीम भी शामिल है. प्रतियोगिता के दौरान छह मैदानों पर कुल 43 मुकाबले खेले जाएंगे.
फुटबॉल प्रशंसकों से स्टेडियम भरने की अपील
समारोह को संबोधित करते हुए पश्चिम बंगाल सरकार में युवा सेवा एवं खेल विभाग के स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री डॉ. इंद्रनील खान ने कहा कि कोलकाता को इस संस्करण में 16 मैचों की मेजबानी मिलने पर गर्व है.
हाल ही में फीफा क्लब विश्व कप के दौरान हमने दुनिया भर के क्लबों का समर्थन किया. अब समय भारतीय फुटबॉल और अपने खिलाड़ियों का समर्थन करने का है. मैं पश्चिम बंगाल के सभी फुटबॉल प्रेमियों से अपील करता हूं कि उद्घाटन मैच से लेकर फाइनल तक स्टेडियम को भरें. खिलाड़ियों के लिए प्रशंसकों का समर्थन सबसे बड़ी प्रेरणा होती है.
समारोह में दिखी डूरंड कप की विरासत
समारोह की शुरुआत अतिथियों के स्वागत और परिचय के साथ हुई. इसके बाद एक विशेष प्रस्तुति के जरिए डूरंड कप के इतिहास और उसकी विरासत को दिखाया गया. कार्यक्रम में राष्ट्रपति भवन में तीनों ट्रॉफियों के अनावरण की झलकियां भी दिखाई गईं. वहीं अभिनेता जॉन अब्राहम का एक विशेष संदेश भी सुनाया गया, जिसमें उन्होंने भारतीय फुटबॉल और डूरंड कप के महत्व पर बात की.
ये भी पढ़ें: डूरंड कप ट्रॉफी टूर में खेल मंत्री सुदिव्य कुमार बोले- 'जो इतिहास को नहीं सहेजता, उसका भविष्य अच्छा नहीं होता'