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ऑस्ट्रेलिया दौरे पर था बेटा, इधर पिता को हुआ कैंसर:बीमारी छिपाई, चिट्ठी ने बदली जिंदगी, अब टीम इंडिया तक पहुंचा इंदौर का सारांश
क्रिकेटर बनने का सपना हर खिलाड़ी देखता है, लेकिन इंदौर के ऑफ स्पिन ऑलराउंडर सारांश जैन का टीम इंडिया तक पहुंचने का सफर केवल मेहनत का नहीं, बल्कि भावनाओं, संघर्ष और पिता के हौसले का भी है। जब सारांश का चयन मध्यप्रदेश टीम के साथ ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए हुआ, उसी दौरान उनके पिता को मुंह के कैंसर का पता चला। परिवार ने पिता की इच्छा पर यह बात सारांश से छिपाए रखी, ताकि उनका ध्यान क्रिकेट से न भटके। ऑस्ट्रेलिया से लौटने पर जब सारांश ने पिता की बिगड़ी हालत देखी तो वे टूट गए। उन्होंने क्रिकेट मैदान जाना तक छोड़ दिया। बेटे की यह हालत देखकर कैंसर से जूझ रहे पिता ने एक चिट्ठी लिखी, जिसमें कहा- "तू जितना अच्छा क्रिकेट खेलेगा, मैं उतनी जल्दी ठीक हो जाऊंगा।" पिता के इन शब्दों ने सारांश को फिर संभाला। उन्होंने खुद को दोबारा क्रिकेट में झोंक दिया और दिन-रात मेहनत शुरू कर दी। उसी संघर्ष और समर्पण का परिणाम है कि अब बीसीसीआई ने श्रीलंका दौरे के लिए घोषित भारतीय टेस्ट टीम में सारांश जैन को भी जगह दी है। इंदौर के इस युवा क्रिकेटर की कहानी आज सिर्फ खेल की सफलता नहीं, बल्कि पिता के विश्वास, परिवार के त्याग और संघर्ष से सपनों को साकार करने की प्रेरणा बन गई है। कैंसर से जूझ रहे पिता ने जताई खुशी सारांश के चयन पर क्रिकेटर रहे पिता सुबोध जैन की खुशी चेहरे पर नजर आती है। सुबोध भी मध्य प्रदेश के लिए ऑफ स्पिन गेंदबाजी करते थे। कैंसर की बीमारी के चलते ठीक से बोल नहीं पाते। फिर भी अपने शब्दों को जोड़ते हुए कहते हैं, मुझे याद है शायद साल 2014 की बात है जब मप्र टीम के साथ सारांश को ऑस्ट्रेलिया दौरे पर जाना था। मुझे कैंसर का पता चला। हमने उससे बात छिपाई। मैं तीन महीने बाद मुंबई से इलाज कराकर लौटा तो हालत खराब थी। वह मुझे देखकर फूट-फूटकर रोने लगा। मैदान भी नहीं जाता था। मुझे लगा कि कहीं मेरी वजह से वह क्रिकेट खेलना न छोड़ दे क्योंकि उसे भारत के लिए खेलते देखना मेरा सपना था। वह कहता था कि पापा आपकी हालत देखकर मेरा मन नहीं होता। फिर मैंने उसे चिट्ठी लिखकर प्रेरित किया। मुझे खुशी है कि उसने मेहनत जारी रखी और आज मेरा सपना पूरा कर रहा है। पिता का सपना था इंडियन टीम में खेलने का, वो चाहते थे कि जर्सी पहनकर मैदान में उतरे, उनके अधूरे सपने को 12 साल बाद बेटे ने पूरा कर दिया। सारांश जैअब भारतीय क्रिकेट टीम की तरफ से श्रीलंका दौरे जाने वाले है। सारांश का क्रिकेट टीम में चयन एक उपलब्धि ही नहीं, पिता के वर्षों पुराने सपने की कहानी भी है…। पिता सुबोध जैन भी क्रिकेटर हैं और मध्यप्रदेश क्रिकेट टीम के ऑफ स्पिनर गेंदबाज रहे हैं. उन्होंने भी काफी संघर्ष किया, लेकिन वे भारतीय टीम में शामिल होने से कई बार रह गए। अब पिता का सपना बेटे ने पूरा कर दिया। यह खबर मंगलवार को जैसे ही पिता तक पहुंची, उनकी आंखें खुशी से नम हो गईं। पापा मेरे पहले रोल मॉडल हैं: सारांश सारांश ने कहा कि टीम इंडिया में जगह मिलना उनके 26 साल के संघर्ष और मेहनत का परिणाम है। उन्होंने कहा, यह मेरे लिए अलग ही एहसास है। इतने वर्षों की तपस्या का इनाम मिला है। श्रीलंका दौरे पर संभावित प्लेइंग-11 में जगह मिलने के सवाल पर सारांश ने कहा कि अंतिम फैसला कोच और कप्तान का होगा, लेकिन उन्हें पूरा विश्वास है कि मौका मिलेगा। उन्होंने कहा, यह कोच और कप्तान पर निर्भर करता है, लेकिन मुझे विश्वास है कि मैं खेलूंगा। मैदान पर अपनी सोच के बारे में सारांश ने कहा कि वह किसी तय फार्मूले के बजाय मैच की परिस्थितियों के अनुसार खेलना पसंद करते हैं। "हर मैच की स्थिति अलग होती है। उसी परिस्थिति को समझकर और उसके मुताबिक क्रिकेट खेलना सबसे जरूरी होता है। अश्विन-हरभजन को देखकर सीखा अपने क्रिकेट के प्रेरणास्रोत के बारे में उन्होंने कहा कि उनके पहले रोल मॉडल उनके पिता हैं। इसके अलावा भारत के दिग्गज ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन और हरभजन सिंह को देखकर उन्होंने अपने खेल को निखारा। सारांश ने कहा मैंने ऑफ स्पिन गेंदबाजी की काफी बारीकियां अश्विन और हरभजन को देखकर सीखी हैं। परिवार के साथ समय बिताने के सवाल पर सारांश ने कहा कि क्रिकेट की व्यस्तताओं के बावजूद जब भी वह इंदौर आते हैं तो कोशिश रहती है कि ज्यादा से ज्यादा समय परिवार के साथ बिताएं। उन्होंने कहा जब भी मैं इंदौर में रहता हूं, कोशिश करता हूं कि परिवार के साथ ज्यादा से ज्यादा वक्त बिताऊं। मां बोली- कभी हौसला टूटने नहीं दिया मां संगीता ने कहा कि बेटे ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए वर्षों तक संघर्ष किया और कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन परिवार ने कभी उसका हौसला टूटने नहीं दिया। हम हमेशा उसे यही कहते थे कि हिम्मत मत हारना, एक दिन तुम्हारा समय जरूर आएगा। भगवान और हमारे नाकोडा भेरू की कृपा से आज वह दिन आ गया। बेटे को टीम इंडिया की कैप पहनते देखना हमारे लिए सबसे बड़ा सुख है। परिवार में सारांश की 94 वर्षीय नानी चमेलीबाई भी पोते की इस उपलब्धि पर बहुत खुश हैं। उन्होंने भी पोते को खूब दुलार किया और आशीर्वाद किया। पत्नी की खुशी का ठिकाना नहीं पत्नी हर्षिता ने कहा कि यह पल उनके परिवार के लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। उन्होंने कहा- 'मैं अपनी खुशी शब्दों में बयां नहीं कर सकती। सारांश ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए अथक मेहनत की है। उन्होंने कभी संघर्ष से समझौता नहीं किया। टीम इंडिया में जगह मिलना उनकी मेहनत का सबसे बड़ा पुरस्कार है। उनके टीम इंडिया में चयन पर हमें गर्व है और हमें विश्वास है कि वह देश के लिए भी शानदार प्रदर्शन करेंगे। ये खबर भी पढ़ें… इंदौर के सारांश जैन टीम इंडिया में शामिल भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने श्रीलंका के खिलाफ 15 अगस्त से शुरू होने वाली दो टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए भारतीय टीम का ऐलान कर दिया है। इस टीम में सबसे खास नाम इंदौर के सारांश जैन का है, जिन्हें पहली बार भारतीय टेस्ट टीम में शामिल किया गया है।पूरी खबर पढ़ें