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विश्व की फार्मेसी में से ‘ग्लोबल लैब’ बनने की ओर अग्रसर भारतः पटेल

INT News22 August 2026 at 10:19 pm

Ahmedabad. शोध, नवाचार और उभरती प्रौद्योगिकियों के दम पर भारत अब दुनिया की फार्मेसी से आगे बढ़कर विश्व की प्रयोगशाला (ग्लोबल लैब) बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। यह बात शनिवार को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कही। वे भारतीय प्रबंध संस्थान अहमदाबाद (आइआइएमए) में आयोजित 'आइआइएमए हेल्थकेयर समिट 2026' के तीसरे संस्करण के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) का उपयोग डॉक्टरों और मानव क्लीनिकल निर्णयों का स्थान लेने के लिए नहीं, बल्कि उनकी कार्यकुशलता और निर्णय प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए किया जाएगा। इसमें मरीज की गोपनीयता को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि एआइ के जरिए दवाओं की खोज में तेजी लाने, व्यक्तिगत इलाज को बेहतर करने, रोग निगरानी और क्लीनिकल निर्णय क्षमता को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। सरकार की 5 हजार करोड़ की 'प्रमोशन ऑफ रिसर्च एंड इनोवेशन इन फार्मा-मेडटेक सेक्टर' (पीआरआइपी) योजना है। इसका उद्देश्य शोध, उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत करना है। स्टार्टअप को सॉफ्टवेयर लाइसेंस और वित्तीय मदद केंद्रीय फार्मास्यूटिकल्स विभाग के सचिव मनोज जोशी ने कहा कि बड़ी फार्मा कंपनियां उत्पादन, एचआर, मार्केटिंग और इन्वेंट्री में एआइ का उपयोग बढ़ा रही हैं, वहीं बेंगलुरु और हैदराबाद के स्टार्टअप दवा की खोज को तेज करने में एआइ का इस्तेमाल कर रहे हैं। सरकार फार्मा में एआइ को मजबूत करने के लिए 'नेशनल बायोफार्मा मिशन' और 'इंडिया एआइ मिशन' के जरिए स्टार्टअप को कंप्यूटिंग क्षमता, सॉफ्टवेयर लाइसेंसिंग और परिचालन खर्चों में सहायता प्रदान कर रही है। 96 करोड़ आभा आइडी, 1 हजार करोड़ डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड्स केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा कि 'आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन' (एबीडीएम) के तहत 96 करोड़ से अधिक आभा आइडी और एक हजार करोड़ से अधिक हेल्थ रिकॉर्ड्स को डिजिटली लिंक किया जा चुका है। टीबी और डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसे रोगों की शुरुआती पहचान में एआइ का उपयोग हो रहा है, जबकि 'ई-संजीवनी' के माध्यम से 20 करोड़ से अधिक मरीजों को एआइ-सक्षम क्लीनिकल सपोर्ट का लाभ मिला है। डिजिटल धरोहर 'इंडिया फार्मा आर्काइव्स' का शुभारंभ समिट में 'इण्डिया फार्मा आर्काइव्स' का आधिकारिक शुभारंभ किया गया। यह इंडियन फार्मास्युटिकल एलायंस (आइपीए) और आइआइएमए आर्काइव्स की एक संयुक्त डिजिटल पहल है। यह एक 'लाइव आर्काइव' है, जिसमें पिछले 100 वर्षों के भारतीय फार्मा उद्योग के विकास, मौखिक इतिहास, पुराने दस्तावेजों, दुर्लभ तस्वीरों और मीडिया सामग्री को सहेजा गया है। भारत की कोरोना वैक्सीन विकास यात्रा पर एक विशेष पुस्तक का भी विमोचन किया गया। एआइ से स्वास्थ्य क्षेत्र में होंगे बड़े बदलाव आइआइएमए बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरमैन पंकज पटेल ने कहा कि एआइ संभावित दवाओं की पहचान तेज करने, क्लीनिकल ट्रायल डिजाइन करने और विफलताओं की पहचान शुरुआती चरण में करने में सक्षम है। इसका उपयोग सुरक्षित, जिम्मेदार और मरीज की गोपनीयता की रक्षा करते हुए मानव-केंद्रित होना चाहिए। इस अवसर पर आइआइएमए निदेशक प्रो.भरत भास्कर व अन्य प्रोफेसर उपस्थित थे।