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पिता को देख सहजदीप ने गजल गाना शुरू किया, सितार वादन में है नेशनल विजेता
| जालंधर रियलिटी शो के ऑडिशन के लिए पहले से कोई तैयारी नहीं थी। अचानक प्लान बना और सहजदीप सिंह चंडीगढ़ पहुंच गए। ऑडिशन दिया तो एक के बाद एक राउंड पार करते गए और टीवी ऑडिशन तक पहुंच गए। चयन के बाद अब सहजदीप इस नए सफर को लेकर उत्साहित हैं। मॉडल टाउन के रहने वाले सहजदीप का संगीत से रिश्ता हालांकि अचानक नहीं बना। घर में बचपन से ही संगीत का माहौल था। पिता इंदरजीत सिंह म्यूजिक टीचर हैं और उन्हें सुनते-सुनते सहजदीप को भी संगीत का शौक पड़ गया। शास्त्रीय संगीत सुनते-सुनते गजल में रुचि हुई और फिर यही शौक रियाज में बदलता गया। तीन लोगों के परिवार में पले-बढ़े सहजदीप की मां अमनिंदर कौर गृहिणी हैं। उन्होंने रविंद्र डे बोर्डिंग स्कूल से पढ़ाई की और इसके बाद एलपीयू से मास्टर ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स की पढ़ाई पूरी की। 2026 में उनकी पढ़ाई पूरी हुई। पढ़ाई के साथ संगीत उनके साथ चलता रहा। वह बताते हैं कि पहले परीक्षा आने के आसपास ही पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान देते थे, जबकि बाकी समय रियाज में निकल जाता था। अब व्यस्तता के बावजूद रोजाना तीन से चार घंटे रियाज करने की कोशिश करते हैं। सहजदीप के मुताबिक किसी एक जज की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि सभी के कॉम्प्लीमेंट उनके लिए खास रहे। सहजदीप सिर्फ गजल गायक नहीं हैं, बल्कि सितार वादक भी हैं। पिछले तीन साल से नेशनल यूथ फेस्टिवल में सितार वादन में लगातार प्रथम स्थान हासिल कर रहे हैं। पंजाब स्टेट लेवल पर भी 4 बार लगातार प्रथम रह चुके हैं। पिछले साल एआईयू के नेशनल लेवल पर गजल गायन में तीसरा स्थान हासिल किया था। पिछले तीन साल से वह नेशनल लेवल पर लोक वोकलिस्ट के साथ सितार वादक के तौर पर भी हिस्सा लेते आ रहे हैं। गजल के साथ सितार में भी बनाई पहचान पहले किसी रियलिटी शो का ऑडिशन नहीं दिया शो तक पहुंचने की कहानी भी सहजदीप के लिए अचानक बनी। इससे पहले उन्होंने किसी रियलिटी शो का ऑडिशन नहीं दिया था। उनका कहना है कि इस शो के ऑडिशन का भी पहले से कोई प्लान नहीं था। अचानक योजना बनी और चंडीगढ़ पहुंच गए। वहां ऑडिशन दिया। परफॉर्मेंस पसंद आने के बाद अगले राउंड के लिए बुलाया गया। इसके बाद राउंड्स होते गए और वह टीवी ऑडिशन तक पहुंचे। वहां भी चयन हो गया। शहर से दूर रहना मुश्किल, सपना बॉलीवुड में छाने का शो के सिलसिले में अपने शहर से दूर रहना सहजदीप के लिए आसान नहीं है। वह कहते हैं कि शहर से दूर रहना मुश्किल होता है, लेकिन जिंदगी में कुछ बनाने के लिए एडजस्ट करना पड़ता है। आगे के सपने को लेकर वह कहते हैं कि जिंदगी जहां ले जाएगी, वहां आगे बढ़ेंगे। बॉलीवुड में काम करने का मौका मिला तो जरूर जाना चाहेंगे। इसके साथ गजल और शास्त्रीय संगीत में भी काम जारी रखना चाहते हैं।