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ऊर्जा विभाग में पदोन्नति की शिकायत पर फैसला:जिनके प्रमोशन रोके गए, सबके प्रमोशन करेंगी बिजली कंपनियां, 8500 हुए पदोन्नत
प्रदेश के ऊर्जा विभाग में अभियंताओं की पदोन्नति में गड़बड़ी को लेकर की गई शिकायत के बाद राज्य सरकार ने तय किया है कि सभी इंजीनियरों के प्रमोशन किए जा सकेंगे। जिनके प्रमोशन रोके गए थे, वे जांच के बाद प्रमोशन की पात्रता के दायरे में पाए गए हैं। इसके लिए दिए गए अभ्यावेदन के बाद विभाग ने इस पर निर्णय लेते हुए इसके आदेश जारी कर दिए हैं। ऊर्जा विभाग ने विद्युत कंपनियों में मंडल कर्मियों की पदोन्नति से जुड़े आरक्षित पदों के संबंध में प्राप्त आपत्तियों के निराकरण को लेकर आदेश जारी किए हैं। यह आदेश ऊर्जा विभाग के उप सचिव द्वारा एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी, तीनों विद्युत वितरण कंपनियों तथा पावर ट्रांसमिशन एवं जनरेटिंग कंपनी के प्रबंध संचालकों को भेजा गया है। आदेश के अनुसार जुलाई 2026 में विभिन्न संवर्गों के लगभग 8,500 से अधिक विद्युत कर्मियों को पदोन्नति प्रदान की गई है। पदोन्नति प्रक्रिया के दौरान वर्ष 2011 में मंडल कर्मियों के लिए आरक्षित पदों पर कंपनी कर्मियों को पदोन्नति दिए जाने के समर्थन एवं विरोध में विभाग को आपत्तियां प्राप्त हुईं। ऊर्जा विभाग ने स्पष्ट किया है कि मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी एवं पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा उन मंडल कर्मियों के आरक्षित पद रिक्त रखे गए, जो विभिन्न कारणों जैसे आवश्यक निर्देश या न्यूनतम अंक प्राप्त नहीं कर पाने के कारण वर्तमान पदोन्नति में पात्र नहीं हो सके। शेष आरक्षित पदों पर अंतरिम रूप से कंपनी कर्मियों को पदोन्नत किया गया। विभाग ने इस कार्रवाई को व्यावहारिक एवं वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप उचित माना है। साथ ही सभी विद्युत कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि जिन मंडल कर्मियों की अधिवार्षिकी (सेवानिवृत्ति) अवधि 31 दिसंबर 2030 के बाद भी शेष रहेगी, उनके लिए आरक्षित पद सुरक्षित रखे जाएं। आवश्यकता पड़ने पर भविष्य में पात्र मंडल कर्मियों को इन पदों पर पदोन्नति दी जा सकेगी। आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि भविष्य में पात्र मंडल कर्मियों के लिए रिक्तियां उपलब्ध नहीं रहती हैं, तो आरक्षित पदों पर पदोन्नत किए गए कंपनी कर्मियों को पदावनत (रिवर्ट) कर पात्र मंडल कर्मियों को पदोन्नति देने की कार्रवाई की जा सकती है। यह शिकायत की थी अभियंता संघ ने यहां गौरतलब है कि ऊर्जा विभाग के अभियंता संघ का कहना है कि सरकार चाहती है कि खाली पद जल्द भरे जाएं, ताकि कामकाज बेहतर हो और नए लोगों को रोजगार मिले लेकिन बिजली कंपनियों में इसके उलट हो रहा है। जुलाई 2026 में मंडल कैडर के अधिकारियों को पदोन्नति दे दी गई, जबकि कंपनी कैडर के पात्र और वरिष्ठ इंजीनियर अब भी इंतजार कर रहे हैं। 69 और 72 पद खाली, फिर भी प्रमोशन नहीं संघ के अनुसार, मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी में सहायक अभियंता से कार्यपालन अभियंता के करीब 69 पद खाली हैं। वहीं मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में ऐसे 72 पद रिक्त हैं। इसके अलावा मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी में भी कार्यपालन अभियंता से अधीक्षण अभियंता के पद खाली हैं, लेकिन इन पर भी पदोन्नति नहीं की जा रही। 10 से 17 जुलाई तक भी नहीं दिए प्रमोशन संघ का कहना है कि 10 जुलाई से 17 जुलाई 2026 के बीच ऐसी स्थिति थी, जब मंडल कैडर में कोई पात्र अधिकारी उपलब्ध नहीं था। इसके बावजूद कंपनी कैडर के योग्य इंजीनियरों को प्रमोशन नहीं दिया गया। अब जो अधिकारी हाल में पदोन्नत हुए हैं, वे कई साल तक दोबारा प्रमोशन के पात्र नहीं होंगे। ऐसे में ये पद लंबे समय तक खाली रह सकते हैं। नियमों की गलत व्याख्या का आरोप अभियंता संघ ने आरोप लगाया था कि ऊर्जा विभाग के 9 जून 2011 के आदेश की गलत व्याख्या कर प्रमोशन रोके जा रहे हैं जबकि वर्ष 2014 में इसी तरह की स्थिति में कंपनी कैडर के अधिकारियों को पदोन्नति दी गई थी। संघ का कहना है कि मौजूदा फैसला न तो नियमों के अनुरूप है और न ही न्यायसंगत है।