Monday, 10 August 2026
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उखड़ी सड़कों का मुद्दा उठा सीएम की मीटिंग में:शहरों में जल भराव और आपदा की स्थिति से निबटने तीन स्तरीय कमेटी बनी

INT News10 August 2026 at 09:40 pm

प्रदेश में बारिश के कारण उखड़ी सड़कों का मामला सोमवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में हुई मंत्रियों और अधिकारियों की बैठक में उठा है। सड़कों की खराब स्थिति पर सीएम यादव ने कहा कि जहां सड़कें खराब हैं वहां जरूरत के हिसाब से मरम्मत कराई जाए और वर्षा के उपरांत सड़कों की मरम्मत में तेजी लाने की प्लानिग कर काम किया जाए। उधर शहरी क्षेत्रों में जलभराव और बाढ़ आपदा की स्थिति को देखते हुए तीन स्तरीय कमेटी का गठन किया गया है और इसके लिए जिला शहरी विकास अभिकरण के परियोजना अधिकारी को नोडल अफसर बनाया गया है। प्रदेश में कम वर्षा की वर्तमान स्थिति और ताजा हालातों की समीक्षा बैठक में सीएम यादव ने ये बातें कहीं। इस बैठक में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा, सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, सामाजिक न्याय मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपतिया उइके भी उपस्थित थीं। वहीं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर और कृषि मंत्री एन्दल सिंह कंसाना बैठक में वर्चुअल रूप से जुड़े। प्रदेश के आधे जिलों में सामान्य वर्षा मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा और अन्य अफसरों की मौजूदगी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस मानसून में प्रदेश में औसत से 15 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। कुछ जिलों में वर्षा कम हुई है और कुछ जिलों में आने वाले समय में अधिक वर्षा की संभावना है। वर्तमान में प्रदेश के आधे जिलों में सामान्य वर्षा हुई है। ऐसी असामान्य स्थितियों में किसानों सहित नागरिकों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं हो, यह सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुछ जिलों में कम वर्षा की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए निर्देश दिए कि प्रदेश में कम वर्षा के कारण उत्पन्न हालातों से निपटने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां संबंधित विभाग सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को जानकारी दी गई कि प्रदेश में 1 जून से 10 अगस्त की अवधि में सामान्य वर्षा 571 मिली मीटर की तुलना में 483 मिली मीटर वर्षा रिकॉर्ड हुई है जो औसतन 15 प्रतिशत कम है। बैठक में बताया कि प्रदेश में पूर्वी मध्यप्रदेश में 513.20 मिलीमीटर और पश्चिम मध्यप्रदेश में 459.80 मिलीमीटर वर्षा हुई है। प्रदेश की कुल औसत वर्षा 949. 50 मि.मी. है।जहां तक फसलों की बोवनी का प्रश्न है प्रदेश में धान की 84 प्रतिशत बोवनी हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रमुख निर्देश 10 अगस्त तक जलभराव की स्थिति बैठक में बताया गया कि प्रदेश के बांधों में 10 अगस्त तक जलभराव की स्थिति लगभग 49 प्रतिशत है, जो औसत से 10 प्रतिशत कम है। गत 5 वर्ष में 59 प्रतिशत औसत जल भराव की स्थिति रही है। गत वर्ष जल भराव की स्थिति 75 प्रतिशत थी। ऐसे जलाशय जिनमें जल भराव 50 प्रतिशत या उससे कम है उनकी संख्या 36 है। प्रदेश के ऐसे जलाशय जिनमें जलभराव 50 से 90 प्रतिशत कम है उनकी संख्या 18 है। शहरी क्षेत्रों में तीन स्तरीय कमेटी निबटेगी प्राकृतिक आपदा से दूसरी ओर नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा प्रदेश के सभी शहरी क्षेत्रों में प्राकृतिक एवं आकस्मिक आपदा से निपटने के लिए त्रिस्तरीय (राज्य, संभाग एवं जिला स्तर) नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) स्थापित किए गए हैं। नगरीय विकास एवं आवास आयुक्त संकेत भोंडवे ने कहा कि अतिवृष्टि, जलभराव, बाढ़, जर्जर भवनों के धराशायी होने तथा वज्रपात जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों में जन-धन की सुरक्षा करना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यह कंट्रोल रूम अंतर-विभागीय समन्वय के माध्यम से आपदा प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित जल निकासी, प्रभावित नागरिकों के सुरक्षित विस्थापन तथा भोजन, शुद्ध पेयजल एवं चिकित्सा जैसी मूलभूत जीवनरक्षक सुविधाओं की निर्बाध उपलब्धता का काम करेंगे। जर्जर भवनों को चिन्हित कर समय पर लेंगे निर्णय कमिश्नर भोंडवे ने कहा कि आपदा प्रबंधन व्यवस्था को व्यावहारिक रूप देते हुए जर्जर एवं क्षतिग्रस्त भवनों को चिन्हित कर समय रहते आवश्यक सुरक्षात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त आंधी-तूफान के कारण मार्ग में धराशायी हुए वृक्षों को तत्काल हटाकर यातायात को अविलंब सुचारू बनाने तथा वज्रपात से उत्पन्न आपातकालीन स्थितियों में त्वरित राहत एवं बचाव कार्य संचालित करने पर विशेष बल दिया गया है। कंट्रोल रूम मौसम विज्ञान केंद्र के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखेंगे, जिससे मिलने वाले पूर्व अनुमानों एवं चेतावनी संदेशों को संबंधित नगरीय निकायों तक समय रहते संप्रेषित किया जा सके और किसी भी संभावित आपदा के प्रभाव को न्यूनतम किया जा सके। डूडा के परियोजना अधिकारी होंगे नोडल अफसर आपदा प्रबंधन के कुशल क्रियान्वयन एवं मॉनिटरिंग के लिए प्रत्येक जिले में जिला शहरी विकास अभिकरण के परियोजना अधिकारी को जिला स्तरीय कंट्रोल रूम का नोडल अधिकारी, प्रभारी नियुक्त किया गया है। जिले से संबंधित परियोजना अधिकारी जिला प्रशासन के साथ निरंतर समन्वय स्थापित कर अतिवृष्टि एवं जलभराव से प्रभावित नागरिकों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराएंगे। आपदा की किसी भी स्थिति में न्यूनतम प्रतिक्रिया समय के साथ राहत एवं बचाव कार्य संपादित करना अनिवार्य होगा, जिससे शहरी क्षेत्रों में जनजीवन सामान्य बना रहे।