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263 साल पुराने संकट मोचन मंदिर का जीर्णोद्धार:राजस्थानी शैली में हो रहा कायाकल्प, सावन में विशेष श्रृंगार
छतरपुर शहर के मध्य स्थित 263 साल पुराने संकट मोचन मंदिर का जीर्णोद्धार राजस्थानी स्थापत्य शैली में किया जा रहा है। इस प्राचीन शिवधाम का स्वरूप अब पहले से अधिक भव्य हो रहा है। सावन माह में भगवान शिव का विशेष श्रृंगार और धार्मिक आयोजन श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बने हुए हैं, जहां हर सोमवार हजारों भक्त दर्शन के लिए उमड़ रहे हैं। मंदिर का निर्माण वर्ष 1763 में महंत आधारदास महाराज ने करवाया था। ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार, श्री हिम्मत राव कायस्थ के संरक्षण में मंदिर परिसर और राव सागर तालाब का भी विकास हुआ था। यह तालाब अब शहर में छोटे तालाब के नाम से जाना जाता है। शुरुआती दौर में मंदिर तक पहुंचने के लिए कोई स्थायी मार्ग नहीं था, जिसे बाद में विकसित किया गया। संकट मोचन मंदिर भगवान शिव की प्राचीन सिद्धपीठ के रूप में प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से पूजा करने वाले भक्तों के सभी संकट दूर होते हैं और उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मंदिर परिसर में विशाल शिवलिंग के साथ माता पार्वती, शनिदेव, संकट मोचन हनुमान, रामदरबार, धनुषधारी मंदिर और बड़े बब्बाजू सहित कई प्राचीन देवालय स्थापित हैं। सावन माह के दौरान मंदिर में 24 घंटे अखंड रामधुन का आयोजन किया जाता है। महाशिवरात्रि, हनुमान जयंती और सावन सोमवार जैसे प्रमुख अवसरों पर हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इसके अतिरिक्त, मंदिर परिसर में प्रतिवर्ष एक प्राचीन मेले का भी आयोजन होता है। वर्तमान में मंदिर का जीर्णोद्धार राजस्थानी स्थापत्य शैली में प्रगति पर है। मुख्य द्वार, संकट मोचन हनुमान मंदिर, धनुषधारी मंदिर और बड़े बब्बाजू मंदिर को नया और आकर्षक स्वरूप दिया जा रहा है। इस कार्य में प्राचीन पहचान को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक सुविधाओं का भी समावेश किया जा रहा है। यह कार्य वर्तमान महंत रामदास महाराज के नेतृत्व में चल रहा है, जिसमें सामाजिक कार्यकर्ता और धरोहर संरक्षण से जुड़े राजेंद्र अग्रवाल 'पप्पू' सहित कई श्रद्धालु और दानदाता सहयोग कर रहे हैं।