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सिविल अस्पताल में स्पीच थैरेपी शुरू, नवजात की सुनने की क्षमता जांचेंगी
कपिल कुमार | जालंधर सिविल अस्पताल में बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और विकास को ध्यान में रखते हुए दो बड़ी सहूलियतों की शुरुआत की गई है। अब अस्पताल में बच्चों की स्पीच थैरेपी (वाक् उपचार) बिल्कुल मुफ्त की जा रही है। इसके साथ ही, नवजात शिशुओं में सुनने की क्षमता की जांच के लिए अस्पताल को एक आधुनिक मशीन भी मिली है। इन सुविधाओं से क्षेत्र के सैकड़ों बच्चों और उनके अभिभावकों को बड़ी राहत मिलेगी। इस संबंध में एमएस डॉ. नमिता घई ने बताया कि जिन बच्चों को बोलने में परेशानी आती है, जो बच्चा तुतलाता है या फिर उम्र के हिसाब से देरी से बोलना सीखता है, उनकी यहां विशेष थैरेपी की जा रही है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में बच्चों को सही तरीके से बोलना सिखाया जाता है, ताकि वे बिना किसी झिझक के अपनी बात कह सकें। शिशुओं की सुनने की जांच को और सटीक बनाने के लिए अस्पताल प्रशासन जल्द ही रूम को “साउंड प्रूफ” करने जा रहा है। इसके लिए आवश्यक प्रक्रिया शुरू की जा रही है। रूम के साउंड प्रूफ होते ही बच्चों के लिए “ऑडियोमेट्री” (सुनने की क्षमता का टेस्ट) की सुविधा भी पूर्ण रूप से चालू कर दी जाएगी। न्यू बॉर्न हियरिंग स्क्रीनिंग के लिए मिली नई ओएई मशीन ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. अमनप्रीत कौर के अनुसार, सरकार के न्यू बॉर्न हियरिंग स्क्रीनिंग प्रोग्राम के तहत अब नवजात शिशुओं की सुनने की जांच भी की जा रही है। अस्पताल को इसके लिए नई ओएई (ऑटो एकाउस्टिक एमिशन) मशीन मिली है। 350 से अधिक डिलीवरी: सिविल अस्पताल के गायनी विभाग में हर महीने 350 से ज्यादा बच्चों का जन्म होता है। हर नवजात की जांच: जन्म लेने वाले सभी शिशुओं की इस नई मशीन से अनिवार्य रूप से हियरिंग स्क्रीनिंग की जाएगी, ताकि सुनने की किसी भी समस्या का शुरुआती चरण में ही पता लगाया जा सके। सबसे खास बात इसका इलाज फ्री है।