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रिटायर्ड लैब टेक्नीशियन से ठगी करने वाला पुलिस रिमांड पर:आरोपी के ICICI बैंक के करंट अकाउंट में कई संदिग्ध ट्रांजेक्शन, बोला-उसे कमीशन मिलता था
शहर की 69 वर्षीय सेवानिवृत्त लैब टेक्नीशियन को 33 दिन तक कथित तौर पर 'डिजिटल अरेस्ट' कर 1.58 करोड़ रुपए की साइबर ठगी करने के मामले में क्राइम ब्रांच को पहली बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने महाराष्ट्र के नासिक निवासी लोहा कारोबारी बिट्ठल फसले को गिरफ्तार कर मंगलवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे एक दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। जांच में सामने आया है कि आरोपी के आईसीआईसीआई बैंक के करंट अकाउंट में ठगी के 19.50 लाख रुपए जमा हुए थे। इसके अलावा खाते में कई संदिग्ध लेन-देन भी मिले हैं, जिनके संबंध में पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। क्राइम ब्रांच के अनुसार प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया है कि उसका बैंक खाता एक 'म्यूल अकाउंट' के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। खाते में आने वाली रकम के बदले उसे लगभग 10 प्रतिशत कमीशन मिलता था। आरोपी ने पुलिस को उन लोगों के बारे में भी जानकारी दी है, जिनके कहने पर उसने अपना बैंक खाता उपलब्ध कराया था। अब पुलिस उन लोगों की तलाश में जुट गई है, जो ऐसे बैंक खातों का इस्तेमाल कर साइबर ठगी की रकम इधर-उधर ट्रांसफर करते हैं। ऐसे दिया गया ठगी को अंजाम क्राइम ब्रांच के अनुसार पीड़िता मीनाक्षी नाखरे, जो ग्वालियर में नेहरू पेट्रोल पंप के पास सरदार पाटनकर साहब का बाड़ा क्षेत्र की निवासी हैं, ने शिकायत दर्ज कराई थी कि 10 मई 2026 को उन्हें दो अलग-अलग मोबाइल नंबरों से कॉल आए। कॉल करने वाले ने स्वयं को दिल्ली टेलीकॉम विभाग का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके नाम से एक अन्य मोबाइल नंबर संचालित हो रहा है, जिसका उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में किया जा रहा है। जब महिला ने बताया कि वह नंबर उनका नहीं है, तो कॉल करने वालों ने खुद को दिल्ली पुलिस और सीबीआई का अधिकारी बताकर उन्हें कथित जांच का हवाला दिया। गिरफ्तारी का भय दिखाते हुए उन्हें लगातार 33 दिनों तक अपने नियंत्रण में रखा और इसी दौरान विभिन्न खातों में कुल 1.58 करोड़ रुपए ट्रांसफर करा लिए। 11 राज्यों के 133 खातों में पहुंचाई गई रकम साइबर जांच में सामने आया है कि पीड़िता से ठगी गई राशि सबसे पहले पश्चिम बंगाल, केरल, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के चार करंट अकाउंट में भेजी गई। इसके बाद महज एक दिन के भीतर यह रकम देश के 11 राज्यों के 40 से अधिक शहरों में मौजूद 133 अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी गई, ताकि धन के स्रोत का पता लगाना मुश्किल हो सके। जांच में यह भी सामने आया है कि अधिकांश खाते म्यूल अकाउंट थे, जिन्हें कमीशन के आधार पर उपलब्ध कराया गया था। पुलिस का मानना है कि साइबर ठग ऐसे खातों का उपयोग ठगी की रकम को तेजी से कई खातों में बांटने के लिए करते हैं। कई राज्यों तक फैला है नेटवर्क क्राइम ब्रांच की जांच में अब तक महाराष्ट्र, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, गुजरात और राजस्थान तक साइबर ठगी के नेटवर्क के तार जुड़े होने के संकेत मिले हैं। पुलिस का कहना है कि विभिन्न राज्यों में सक्रिय एजेंट कमीशन लेकर बैंक खाते उपलब्ध कराते हैं, जिनके माध्यम से ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में स्थानांतरित किया जाता है। क्राइम ब्रांच के सब-इंस्पेक्टर धर्मेंद्र शर्मा ने बताया कि आरोपी से रिमांड के दौरान बैंक खातों, संदिग्ध लेन-देन और पूरे नेटवर्क के संबंध में पूछताछ की जा रही है। साथ ही पुलिस की कई टीमें अन्य खाताधारकों और गिरोह से जुड़े लोगों की तलाश में जुटी हैं। आरोपी को बुधवार को दोबारा कोर्ट में पेश किया जाएगा।