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पत्नी के सिर में रॉड मारकर हत्या, पति को उम्रकैद:राजगढ़ में मोबाइल चलाने से रोकने पर हुआ था झगड़ा; दो साल पुराना मामला

INT News23 August 2026 at 10:26 pm

राजगढ़ जिले के खुजनेर में पत्नी वंदना की हत्या के मामले में कोर्ट ने पति प्रखर उपाध्याय को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। हत्या की वजह कोई बड़ा विवाद नहीं, बल्कि रात में मोबाइल चलाने को लेकर हुआ झगड़ा सामने आया। गुस्से में प्रखर ने पत्नी के सिर पर लोहे की रॉड से तीन वार किए। पत्नी के गिरने के बाद भी वह नहीं रुका और एयर पिस्टल से फायर कर दिया। मामले में रॉड पर मिले आरोपी के अंगुलियों के निशान अभियोजन के लिए अहम सबूत बने। पत्नी की मौत के बाद सामने आया घटनाक्रम

अभियोजन के अनुसार 3 मार्च 2024 की रात प्रखर और वंदना घर के कमरे में अकेले थे। प्रखर मोबाइल चला रहा था। वंदना ने उसे मोबाइल चलाने पर टोका तो दोनों के बीच विवाद हो गया। विवाद बढ़ने पर प्रखर ने लोहे की रॉड उठाई और वंदना के सिर पर तीन बार हमला किया। गंभीर चोट लगने से वह पलंग पर गिर गई। इसके बाद आरोपी ने एयर पिस्टल से भी फायर किया। सुबह परिजन पहुंचे तो पलंग पर पड़ा था शव

4 मार्च की सुबह वंदना की मौत की जानकारी उसके मायके पक्ष को मिली। मामा गौतम दुबे समेत परिजन खुजनेर पहुंचे। घर के अंदर पलंग पर वंदना मृत अवस्था में मिली। उसके सिर से खून निकल रहा था। परिजनों ने ससुराल पक्ष पर दहेज को लेकर प्रताड़ित करने और मारपीट का आरोप लगाया। पुलिस ने हत्या का केस दर्ज कर जांच शुरू की। रॉड ने खोल दिया राज, अंगूठे का निशान आरोपी से मिला

जांच में पुलिस ने प्रखर की निशानदेही पर लोहे की रॉड और एयर पिस्टल समेत अन्य सामान जब्त किया। रॉड के मध्य हिस्से पर मिले चांस प्रिंट को अंगुल चिन्ह विशेषज्ञ ने विकसित किया। जांच में यह निशान प्रखर के दाहिने हाथ के अंगूठे से मैच हुआ। अभियोजन ने इस विशेषज्ञ साक्ष्य को कोर्ट में महत्वपूर्ण आधार बनाया। विशेष लोक अभियोजक आलोक श्रीवास्तव ने कोर्ट में तर्क दिया कि हत्या ससुराल के कमरे में हुई, जहां घटना के समय पति-पत्नी मौजूद थे। अंदर की घटना के बारे में आरोपी ही स्पष्ट जानकारी दे सकता था। बचाव पक्ष की ओर से ऐसा कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया, जिससे हत्या में उसकी भूमिका पर संदेह पैदा हो। कोर्ट ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को माना पर्याप्त मामला प्रत्यक्षदर्शी के बजाय परिस्थितिजन्य और विशेषज्ञ साक्ष्यों पर आधारित था। अभियोजन ने आरोपी की मौजूदगी, उसकी निशानदेही पर बरामद रॉड और उस पर मिले अंगुलियों के निशान समेत अन्य साक्ष्य कोर्ट में पेश किए। राजगढ प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश लखनलाल गोस्वामी ने प्रखर उपाध्याय को धारा 302 के तहत दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और ₹5 हजार अर्थदंड से दंडित किया।