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करनाल में हुड्डा के आइडियल पर शिक्षा मंत्री का तंज:महिपाल ढांडा बोले- दोषी व्यक्ति किसी के आदर्श हैं तो जवाब वही दें; गेस्ट टीचरों पर जल्द परिणाम का दावा
हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा रविवार देर शाम को करनाल के कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में अपने किसी निजी काम के लिए पहुंचे। इस दौरान मीडिया से बातचीत के दौरान मंत्री कांग्रेस पर जमकर बरसे। सबसे ज्यादा चर्चा रोहतक सांसद भूपेंद्र हुड्डा की उस पोस्ट पर हुई, जिसमें उन्होंने पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन सिंह को अपना आइडियल बताया था। इस पर ढांडा ने सीधे हुड्डा पर हमला करने के बजाय सवाल को उन्हीं पर छोड़ते हुए कहा दोषी करार दिए गए व्यक्ति किसी के आदर्श हो सकते हैं तो इसका जवाब वही लोग दें, जो उन्हें अपना आइडियल मानते हैं। ढांडा ने कहा कि किसी को अपना आदर्श मानना व्यक्तिगत धारणा है। साथ ही उन्होंने कहा कि सज्जन सिंह को उच्च न्यायालय दोषी करार दे चुका था। उन्होंने कहा कि उनके लिए आदर्श वह व्यक्ति है, जो समाज में सकारात्मक योगदान दे और लोगों के लिए अच्छा काम करे। गेस्ट टीचरों पर सरकार का मंथन जल्द आ सकता है फैसला
करनाल में शिक्षा मंत्री से जब गेस्ट टीचरों की मांगों को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर गंभीरता से विचार कर रही है। ढांडा ने संकेत दिया कि इस मामले में जल्द ही परिणाम सामने आ सकते हैं। उनके इस बयान से गेस्ट टीचरों की मांगों पर सरकार की ओर से जल्द कोई निर्णय लिए जाने की उम्मीद बढ़ी है। चीनी महंगी होने पर कांग्रेस के सवालों का जवाब
चीनी के बढ़ते दामों को लेकर कांग्रेस के हमले पर भी ढांडा ने पलटवार किया। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से सवाल किया कि उनके शासनकाल में जनता को कौन सी ऐसी सुविधाएं और राहत मिली थीं, जिन्हें वे आज सरकार को गिना सकते हैं। शिक्षा मंत्री ने कहा कि चीनी के दाम बढ़े हैं, इससे इनकार नहीं किया जा सकता। सरकार कीमतों पर नजर बनाए हुए है और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। कालाबाजारी के आरोप पर बोले- ऐसा नहीं हुआ
चीनी के दाम बढ़ने के पीछे कालाबाजारी के सवाल पर ढांडा ने इससे साफ इनकार किया। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उसके शासनकाल में ऐसे मामलों में कालाबाजारी के आरोप सामने आते रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज कांग्रेस के नेता सरकार पर व्यंग्यात्मक कटाक्ष कर रहे हैं, जबकि उनके शासनकाल में जनता की जेब काटने वालों को संरक्षण मिलने के आरोप लगते रहे हैं।