विधायक के पति ने रची थी हत्या की साजिश:जिला पंचायत राजनीति से शुरू हुआ विवाद, सीएम भी नहीं बचा पाए जान

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मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स के पार्ट-1 में आपने पढ़ा कि 15 मार्च 2019 की सुबह दमोह के हटा स्थित डामर-क्रेशर प्लांट में बीएसपी नेता और ठेकेदार देवेंद्र चौरसिया पर जानलेवा हमला हुआ। देवेंद्र अपने बेटे सोमेश और परिवार के लोगों के साथ प्लांट पहुंचे ही थे कि कई गाड़ियों से आए 25 से 30 हमलावरों ने उन्हें घेरकर जानलेवा हमला किया। कुछ घंटों बाद देवेंद्र की मौत हो गई। हत्या से तीन दिन पहले ही देवेंद्र ने तत्कालीन सीएम कमलनाथ से मुलाकात कर जान का खतरा बताया था और कांग्रेस जॉइन की थी। हत्या के बाद आरोप पथरिया विधायक रामबाई सिंह परिहार के पति गोविंद सिंह, उनके परिवार और समर्थकों पर लगे। आखिर इस हत्या की असली वजह क्या थी? राजनीतिक दुश्मनी, वर्चस्व की लड़ाई या कोई गहरी साजिश? 28 आरोपियों में से हत्या की साजिश किसने रची थी? क्राइम फाइल्स के इस हिस्से में इसका खुलासा… जांच आगे बढ़ी तो सामने आया कि यह संघर्ष केवल व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं था। इसके पीछे जिला पंचायत की राजनीति, सत्ता का संघर्ष और राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई थी। देवेंद्र चौरसिया बीएसपी के सक्रिय नेता थे और ठेकेदारी का काम भी करते थे। उनके परिवार का इलाके की राजनीति में प्रभाव था। उनकी चाची लता चौरसिया जिला पंचायत सदस्य थीं। अविश्वास प्रस्ताव से शुरू हुआ तनाव
देवेंद्र के बेटे सोमेश के मुताबिक, जिला पंचायत अध्यक्ष शिवचरण पटेल के खिलाफ नौ सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। इसकी सुनवाई 12 फरवरी 2019 को होनी थी। जैसे ही इसकी जानकारी शिवचरण पटेल और विधायक रामबाई तक पहुंची, देवेंद्र चौरसिया पर दबाव बनाया जाने लगा कि वे इस राजनीतिक गतिविधि से दूर रहें। सोमेश के अनुसार, देवेंद्र और रामबाई दोनों बीएसपी से जुड़े थे। देवेंद्र को चेतावनी दी गई कि अगर उन्होंने विरोध जारी रखा तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
परिजनों का आरोप- सुनियोजित साजिश से की हत्या देवेंद्र के परिजनों ने अदालत में दावा किया कि हमला पूरी तरह सुनियोजित था। महेश चौरसिया ने आरोप लगाया कि जिला पंचायत अध्यक्ष शिवचरण पटेल और विधायक रामबाई ने मिलकर पूरी साजिश रची। परिजनों के मुताबिक, हमले में शिवचरण पटेल का बेटा इंद्रपाल पटेल, विधायक रामबाई के पति गोविंद सिंह, देवर कौशलेन्द्र उर्फ चंदू, भतीजा गोलू उर्फ दीपेंद्र ठाकुर और लोकेश सिंह मुख्य रूप से शामिल थे। बचाव पक्ष ने अलग कहानी बताई दूसरी तरफ अदालत में बचाव पक्ष ने पूरे मामले को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया। शिवचरण पटेल ने अदालत में स्वीकार किया कि उनकी और देवेंद्र चौरसिया की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता थी। उन्होंने कहा कि चुनावों के दौरान देवेंद्र ने उनसे समर्थन मांगा था, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच कटुता बढ़ गई। विधायक रामबाई सिंह परिहार ने भी अदालत में कहा कि उनके पति और परिवार के लोगों को राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया है। उनका दावा था कि 2018 विधानसभा चुनाव जीतने के बाद देवेंद्र और उनका परिवार राजनीतिक रूप से उनके खिलाफ हो गया था। फरारी, दबाव और फिर गिरफ्तारी हत्या के बाद कई आरोपी लंबे समय तक फरार रहे। विधायक के पति गोविंद सिंह की गिरफ्तारी भी तुरंत नहीं हो सकी। इस बीच देवेंद्र चौरसिया के परिवार ने कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया कि मामले को कमजोर किया जा रहा है और मुख्य आरोपियों को बचाया जा रहा है। लगातार बढ़ते दबाव के बाद सरकार ने सख्ती दिखाई और कुछ महीनों के भीतर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। पांच साल तक निचली अदालत में चली सुनवाई मामला बेहद चर्चित था। देवास डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में अभियोजन पक्ष के 59 गवाहों और बचाव पक्ष के 19 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट, कॉल रिकॉर्ड और सीडीआर समेत कई तकनीकी सबूत अदालत में पेश किए। हाईकोर्ट ने 7 की सजा बरकरार रखी निचली अदालत के फैसले को आरोपियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। दूसरी ओर देवेंद्र चौरसिया के बेटे सोमेश ने दोषियों को फांसी देने की मांग करते हुए अपील दायर की। सभी याचिकाओं पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 20 जनवरी 2026 को अपना विस्तृत फैसला सुनाया। अदालत ने सात आरोपियों की उम्रकैद बरकरार रखी, जबकि 18 अन्य को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। जिन सात लोगों की सजा बरकरार रही, उनमें विधायक रामबाई परिहार के पति गोविंद परिहार, कौशलेन्द्र उर्फ चंदू परिहार, गोलू परिहार, इंद्रपाल पटेल, अमजद बूटा, श्रीराम शर्मा और लोकेश पटेल शामिल थे। क्राइम फाइल्स पार्ट-1 भी पढ़ें… सीएम से मुलाकात, 3 दिन बाद कांग्रेसी नेता का मर्डर मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स में आज कहानी दमोह के चर्चित देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड की, जिसने प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया था। मामला एक बड़े नेता की हत्या से जुड़ा था, जिसमें विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष समेत कई प्रभावशाली नाम सामने आए। पढ़ें पूरी खबर…