यमुनानगर में महिला बैंक कर्मचारी की मौत, परिजनों का हंगामा:एक साल पहले हुई शादी, 9 महीने की गर्भवती; डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप

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यमुनानगर शहर के रेलवे रोड स्थित एक निजी अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद एक महिला बैंक कर्मचारी की मौत हो गई। इस दौरान परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया। मृतका के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और डॉक्टर पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया तथा सिटी थाना पुलिस को शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले को शांत कराने का प्रयास किया। मृतका की पहचान 28 वर्षीय एकता पत्नी चिराग अरोड़ा निवासी आजाद नगर के रूप में हुई है। एकता दिल्ली में एचडीएफसी बैंक में कैशियर के पद पर कार्यरत थी और 9 माह की गर्भवती थी। एक साल पहले ही हुई थी शादी मृतका की मासी सास प्रतिभा ने बताया कि उसके भांजे चिराग अरोड़ा का दिल्ली और यमुनानगर में कार एसेसरीज का कारोबार है। करीब एक वर्ष पहले चिराग और एकता की शादी हुई थी। शादी के बाद दोनों दिल्ली में रह रहे थे, लेकिन गर्भावस्था के चलते करीब दो माह पहले एकता अपने ससुराल आजाद नगर आकर रहने लगी थी। उसका इलाज रेलवे रोड स्थित जेपी अस्पताल में चल रहा था। परिजनों के अनुसार बुधवार को डिलीवरी के लिए एकता को अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। उस समय उसकी हालत सामान्य थी और उसे लेबर पेन भी शुरू नहीं हुआ था। आरोप है कि डॉक्टरों ने उसे इंजेक्शन लगाए, जिसके बाद उसे तेज दर्द शुरू हो गया और हालत बिगड़ने लगी। इसके बाद डॉक्टरों ने सिजेरियन ऑपरेशन करने का फैसला लिया। दोपहर बाद बिगड़ने लगी थी तबीयत परिजनों ने बताया कि सुबह करीब साढ़े दस बजे ऑपरेशन हुआ और एकता ने एक बच्ची को जन्म दिया। उनका कहना है कि ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने मां और बच्ची दोनों को स्वस्थ बताया था। हालांकि दोपहर करीब तीन बजे डॉक्टरों ने परिवार को बुलाकर बताया कि एकता का ब्लड प्रेशर लगातार ऊपर-नीचे हो रहा है और अत्यधिक ब्लीडिंग हो रही है। प्रतिभा ने बताया कि उन्होंने दिल्ली स्थित एम्स में परिचित डॉक्टर से भी फोन पर बात करवाई। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने एकता को मोहाली रेफर करने का निर्णय लिया। परिजनों का आरोप है कि मरीज की हालत गंभीर होने के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने उसे रेफर करने में करीब डेढ़ घंटे से अधिक का समय लगा दिया। मोहाली ले जाते वक्त रास्ते में तोड़ा दम परिजनों के मुताबिक शाम करीब पांच बजे एकता को एम्बुलेंस के जरिए मोहाली स्थित फोर्टिज ले जाया जा रहा था, लेकिन थाना छप्पर के पास पहुंचते ही उसकी रास्ते में मौत हो गई। इसके बाद परिजन शव को वापस उसके ससुराल लेकर पहुंचे। परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन ने मरीज के साथ किसी विशेषज्ञ मेडिकल टीम के बजाय अस्पताल के एक सफाई कर्मचारी को भेजा था। गुरुवार सुबह जब परिवार के सदस्य इलाज से संबंधित दस्तावेज लेने अस्पताल पहुंचे और डॉक्टरों से लापरवाही को लेकर सवाल किए, तो वहां विवाद हो गया। उनका आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने उनसे अभद्र व्यवहार किया। विवाद बढ़ने पर सिटी थाना पुलिस मौके पर पहुंची। ब्लीडिंग और बीपी ज्यादा था- डॉक्टर वहीं मामले में अस्पताल की डॉक्टर ममता ने सभी आरोपों को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि सिजेरियन ऑपरेशन के बाद मरीज को अत्यधिक ब्लीडिंग हो रही थी, जिसे रोकने के लिए अस्पताल की ओर से हर संभव प्रयास किए गए। परिजनों को मरीज की हालत के बारे में लगातार जानकारी दी जा रही थी। डॉक्टर के अनुसार मरीज की बच्चेदानी काफी ढीली हो चुकी थी, जिसके कारण ब्लीडिंग नियंत्रित नहीं हो पा रही थी। रैफर करने में देरी के आरोपों पर डॉक्टर ममता ने कहा कि मरीज को रेफर करने से पहले उसकी स्थिति को स्थिर करने के लिए जरूरी उपचार दिया गया था, ताकि रास्ते में कोई परेशानी न हो। उन्होंने बताया कि मरीज के साथ आईसीयू एक्सपर्ट भी भेजा गया था। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि उनके ऊपर लगाए गए लापरवाही के आरोप निराधार हैं। फिलहाल पुलिस ने परिजनों की शिकायत ले ली है और मामले की जांच शुरू कर दी है।