उद्धव बोले- शिवसेना 30 साल तक कांग्रेस से लड़ी:लेकिन पार्टी नहीं तुड़वाई; भाजपा ने ये पाप किया, जो दूसरों के बच्चे चुराती है

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शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पार्टी टूट पर रविवार को कहा कि बाल ठाकरे की बनाई शिवसेना ने 30 साल तक कांग्रेस से लड़ाई लड़ी। लेकिन कांग्रेस ने कभी शिवसेना को खत्म करने या उसका नाम छीनने की कोशिश नहीं की। मुंबई के भांडुप में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा- शिवसेना ने जिस भाजपा को उसके शुरुआती दौर में आगे बढ़ने में मदद की, आज वही शिवसेना तोड़ने का पाप कर रही है। भाजपा दूसरों के बच्चे चुराने का काम करती है। उद्धव ने एक दिन पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान पर पलटवार किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि अब केवल एक ही शिवसेना है और उसका नेतृत्व एकनाथ शिंदे कर रहे हैं। ठाकरे ने कहा कि उनके नेतृत्व वाली शिवसेना ही असली और एकमात्र शिवसेना है। उन्होंने यह भी कहा कि छह सांसदों की बगावत के बावजूद वह निराश नहीं हैं। उद्धव ठाकरे की स्पीच, 3 बातें; कहा- गद्दारों की वजह से नया जोश आया 6 विधायकों में से दो रविवार को सामने आए उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) के बागी 6 विधायकों में से दो रविवार को सामने आए। धराशिव के सांसद ओमराजे निंबालकर ने पुणे में कार्यकर्ताओं के साथ एक बैठक में ऐलान किया कि वह एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होंगे। वहीं, हिंगोली से सांसद नागेश पाटिल आष्टीकर ने सोशल मीडिया के जरिए अपना रुख साफ किया है। उन्होंने कहा- मैं पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे से बिल्कुल भी नाराज या परेशान नहीं हूं। बगावत का मुख्य कारण निर्वाचन क्षेत्र का विकास और धन की कमी है। पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों ने बगावत कर दी थी। 17 जून को बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को लेटर सौंपकर खुद को अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की थी। सांसदों ने चिट्‌ठी में उद्धव से अलग होने की वजह बताते हुए दावा किया है कि ठाकरे गुट के सीनियर नेता शिवसेना का विलय कांग्रेस में करना चाहते थे। उद्धव विचारधारा बदल चुके हैं। पार्टी का अस्तित्व बचाने के लिए हम अलग हो रहे हैं। पार्टी में 4 साल में दूसरी बार टूट जून 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में 39 विधायकों ने बगावत कर शिवसेना को दो हिस्सों में बांट दिया था। इसके बाद चुनाव आयोग ने शिंदे गुट को शिवसेना नाम और धनुष-बाण चुनाव चिह्न दिया था। अब 6 सांसदों की बगावत पिछले चार साल में पार्टी के लिए दूसरी बड़ी टूट है। उद्धव की बैठक में 3 सांसद नहीं पहुंचे उद्धव ठाकरे ने 18 जून को शिवसेना (UBT) के संसदीय दल की दिल्ली में बैठक बुलाई थी। इस बैठक में 9 में से सिर्फ 3 लोकसभा सांसद अनिल देसाई, अरविंद सावंत और राजाभाऊ वाजे पहुंचे थे। संजय राउत ने कहा कि हमारे सांसदों को किडनैप किया गया है। जो बैठक में आएगा वो हमारे साथ है, जो नहीं आएगा वो गद्दार। 6 सांसदों के गुट को दल-बदल कानून से मिल सकती है राहत लोकसभा में शिवसेना (UBT) के 9 सांसद हैं। दल-बदल कानून के तहत किसी दल में टूट के बाद अयोग्यता से बचने के लिए कम से कम दो-तिहाई सांसदों का साथ होना जरूरी है। यानी अगर 9 में से 6 सांसद एक साथ अलग होने का फैसला करते हैं, तो वे खुद को वैध गुट बताने का दावा कर सकते हैं। इसी वजह से 6 सांसदों के बगावत करने की खबर राजनीतिक और कानूनी, दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जानकारों के मुताबिक, सिर्फ अलग गुट बनाना ही काफी नहीं होगा। आगे चलकर इन सांसदों को किसी दूसरे दल में विलय की प्रक्रिया भी पूरी करनी पड़ सकती है, ताकि उनकी स्थिति कानूनी रूप से और मजबूत हो सके। शिवसेना से पहले AAP-TMC के 27 सांसद बागी हुए पिछले 3 महीने के दौरान विपक्षी गुट के 27 सांसदों ने अपनी पार्टी से बगावत करते हुए भाजपा या NDA को समर्थन दिया है। इनमें 7 AAP के राज्यसभा सांसद और 20 TMC के लोकसभा सांसद हैं। शिवसेना (UBT) में टूट की अटकलों के बीच सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) चीफ और यूपी के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी में बड़ी टूट होने वाली है और पार्टी के कई नेता BJP में शामिल होने के लिए तैयार हैं। सपा चीफ अखिलेश यादव ने पार्टी में टूट की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि सपा मजबूत और एकजुट है। अखिलेश ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा के अपने विधायक पाला बदलने वाले हैं। —————————————- ये खबर भी पढ़ें… उद्धव की पार्टी टूटी, राउत ने प्रेस-कॉन्फ्रेंस में गाली दी, 9 में से 6 सांसद बागी महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के 9 में से 6 सांसदों ने बगावत कर दी है। दिल्ली में राज्यसभा सांसद संजय राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बागी सांसदों को गाली दी। राउत ने कहा- ये साले #$% के। ये बेईमान लोग हैं। बेईमानी उनके खून में हैं। पूरी खबर पढ़ें…