चौक-चौराहों में सगरी बनाकर महिलाओं द्वारा भगवान शिव व माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा अर्चना की गई। सगरी(गड्ढा) बनाकर भगवान शंकर और माता पार्वती की। विधि-विधान से पूजा अर्चना की गई। सगरी में लाई, फलपत्ती, हल्दी, कुमकुम, पसहर चावल, के साथ-साथ सात प्रकार की भाजी, मिट्टी के सात अलग-अलग खिलौने, भैंस के दूध से तैयार, दही, घी, दातून, पलाश के पत्तों से बना दोना, नारियल व अन्य पूजन सामग्री को अर्पण किया गया। शहर के सोरिद वार्ड, पोस्ट आफिस वार्ड, बठेना वार्ड, जोधापुर वार्ड, जालमपुर वार्ड, टिकरापारा, डाकबंगला वार्ड, विंध्यवासिनी वार्ड, आमापारा वार्ड सहित अन्य स्थानों में महिलाओं ने सगरी बनाकर पूजा अर्चना की। पश्चात सगरी स्थल पर पंडितों द्वारा सात प्रकार की कहानियां का पठन भी हुआ। पूजा के बाद व्रतधारी महिलाओं ने पसहर चावल से बना प्रसाद ग्रहण किया।
पंडित राजकुमार तिवारी ने बताया कि हिंदू धर्म में सभी रिश्ते-नातों के लिए अलग-अलग तीज त्योहार है। पौराणिक मान्यता के अनुसार सगरी बनाकर भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति स्थापित कर पूजा करने से संतान की आयु में वृध्दि होती है, वहीं नि:संतान महिलाओं को संतान प्राप्ति का वरदान प्राप्त होता है।
