यूपी में अब बच्चों से अपराध पर हो रहे एनकाउंटर:5 महीने में 4 अपराधी ढेर; पुलिस लगातार बदल रही अपना पैटर्न

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तारीख- 5 मई, जगह- हरदोई। 7 साल के एक बच्चे की कुकर्म के बाद हत्या कर दी गई। पुलिस ने आरोपी मेहनूर को पुलिस ने 12 घंटे के अंदर एनकाउंटर में मार गिराया। यूपी पुलिस की यह ताजा कार्रवाई बताती है कि उसका काम करने का पैटर्न अब बदल चुका है। माफिया और महिलाओं से अपराध करने वालों के साथ अब वह बच्चों के साथ वारदात करने वालों को भी सबक सिखा रही है। बच्चों के साथ अपराध करने वाले कई आरोपियों को एनकाउंटर में ढेर किया है। जानिए पहले किस तरह के अपराध पर पुलिस सख्त थी ताजा पैटर्न क्या है? बच्चों के खिलाफ अपराध पर चंद घटों में ले रही एक्शन
हाल की 4 बड़ी घटनाएं बताती हैं कि बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों पर पुलिस बेहद आक्रामक कार्रवाई कर रही है। अब जानिए 9 साल में योगी सरकार ने कैसे काम किया संगठित अपराध पर फोकस
2017 में योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने। संगठित अपराध रोकने की चुनौती थी। शुरुआती 10 महीने में कुल 1 हजार 142 एनकाउंटर हुए। इनमें 34 बदमाश मारे गए। पहला एनकाउंटर 31 मार्च, 2017 को सहारनपुर के गुरमीत का हुआ। पुलिस ने 29 जुलाई को शामली में नौशाद और सरवर को मारा। नौशाद पर 19 और सरवर पर 8 गंभीर केस धाराओं के केस थे। 10 अगस्त को इकराम का एनकाउंटर किया। 8 सितंबर को नदीम और 10 सितंबर को शमशाद मुठभेड़ में मारा गया। महिला अपराध पर सख्ती की ‘ऑपरेशन लंगड़ा’ चलाया, वीडियो से मैसेज दिए
महिलाओं और बेटियों के साथ छेड़खानी या हिंसा करने वालों के लिए पुलिस ने मनोवैज्ञानिक दबाव की रणनीति अपनाई। आरोपियों के पैर में पट्टी बांधकर (लंगड़ाते हुए) माफी मांगने के वीडियो जारी किए गए। इससे संदेश गया कि महिलाओं से छेड़छाड़ या रेप करने वाले बख्शे नहीं जाएंगे। 2019-21: वर्दी पर हमला करने वालों को सबक सिखाया पुलिस की हत्या या पिटाई पर एनकाउंटर
यूपी पुलिस के एनकाउंटर में सबसे अहम बात यह रही है कि जब भी पुलिस पर हमला हुआ या फिर पुलिसवालों की हत्या हुई, तो आरोपियों को बख्शा नहीं गया। 28 जनवरी, 2019 को अमरोहा में सिपाही हर्ष चौधरी की हत्या में शिव अवतार उर्फ शिविया का एनकाउंटर हुआ। 9 फरवरी, 2021 को कासगंज में सिपाही देवेंद्र की पीट-पीटकर हत्या करने वाले एलकार और शराब माफिया मोती धीमर को पुलिस ने मुठभेड़ में ढेर किया। कानपुर के विकास दुबे केस को कौन भूल सकता है? छापेमारी करने पहुंची पुलिस की टीम पर विकास दुबे और उसके साथियों ने घात लगाकर हमला किया था। इसमें DSP देवेंद्र मिश्रा, SO महेश यादव समेत 8 पुलिसकर्मी शहीद हुए थे। इस मामले में विकास दुबे और उसके 5 साथियों का एनकाउंटर हुआ। योगी सरकार में अब तक 18 पुलिसकर्मी शहीद हुए हैं। इन मामलों के ज्यादातर आरोपी पुलिस मुठभेड़ में मारे गए। 2024: बड़ी लूट करने वालों पर एक्शन एक साल में 25 मुठभेड़, लूट करने वाले ज्यादातर ढेर
2024 में दुकानदारों से लूट और डकैती की घटनाएं बढ़ीं। सबसे चर्चित केस सुल्तानपुर का था। सितंबर में सुल्तानपुर के भारत ज्वैलर्स में नकाबपोश बदमाशों ने करोड़ों की लूट की। पुलिस ने मंगेश यादव और अनुज प्रताप सिंह का एनकाउंटर किया था। सपा ने मंगेश के एनकाउंटर को फर्जी बताया था। इससे पहले जनवरी में कन्नौज के सर्राफा कारोबारी नायाब खान से दो नकाबपोश बदमाशों ने लूटपाट की। पुलिस ने 5 दिन बाद आरोपी इजहार को एनकाउंटर में मार गिराया। एक लाख के इनामी विनोद कुमार उपाध्याय, ढाई लाख के इनामी नीलेश राय और प्रशांत सिंह उर्फ प्रिंस का एनकाउंटर हुआ। ये सभी बड़ी लूट के आरोपी थे। इस साल कुल 25 एनकाउंटर हुए। 2025: सुपारी किलर मारे गए 2025 में 48 एनकाउंटर
इस साल सबसे ज्यादा 48 अपराधी मुठभेड़ में मारे गए। खासकर सुपारी किलर्स यूपी पुलिस के निशाने पर रहे। इनमें वाराणसी का बनारसी यादव मुख्य था। उस पर 24 मुकदमे दर्ज थे। इनमें आधे से ज्यादा सुपारी किलिंग के थे। UPSTF ने चौबेपुर में उसे मार गिराया। इसी तरह 90 मामलों में आरोपी शामली के मोहम्मद रेहान का STF ने एनकाउंटर किया। मुरादाबाद का आशु उर्फ मोंटी शॉर्प शूटर माना जाता था। STF और मुरादाबाद पुलिस ने एनकाउंटर में ढेर किया। पढ़िए रिटायर्ड IPS लालजी शुक्ला क्या कहते हैं? सवाल. अपराध के खिलाफ पुलिस पैटर्न कब और कैसे बदलती है?
रिटायर्ड IPS. अपराध का पैटर्न बदलने पर उसी हिसाब से एनकाउंटर होते हैं। आज से 20 साल पहले संगठित अपराध ज्यादा होते थे। लुटेरे रात में किसी सड़क पर खड़े हो जाते, आने-जाने वालों को लूटते थे। चीजें बदलीं तो ये कम हो गया। फिर पिस्टल दिखाकर पूरे परिवार को बांधकर लूट शुरू हुई। पुलिस से मुठभेड़ होती तो अपराधी उनके ऊपर भी फायर कर देते थे। जहां तक बच्चों और महिलाओं के खिलाफ अपराध की बात है, तो यह मामला भावनाओं से जुड़ा है। बच्चों की हत्या या रेप करने वाले को कोई भी माफी नहीं देना चाहता। इसी तरह से महिलाओं के खिलाफ अपराध होने पर भी लोग गुस्से से भर जाते हैं। अब तो CCTV हर जगह लगे हैं। छेड़छाड़ के मामले अक्सर कैद हो जाते हैं। इससे पुलिस पर प्रेशर पड़ता है कि कार्रवाई करे। बाकी यही है कि जैसे अपराध का पैटर्न बदलता है, पुलिस भी अपना पैटर्न बदलती है। सवाल. बंगाल चुनाव में इस मॉडल को दिखाकर नैरेटिव गढ़ने में कामयाबी मिली, यूपी चुनाव में क्या फायदा होगा? रिटायर्ड IPS. जनता के नजरिए से सुरक्षित महसूस करना जरूरी है। वह उसी सरकार को चुनती है, जो सुरक्षित माहौल देती है। चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में योगी शासन को अपनी इस छवि को और मजबूत करना होगा। आखिर में जानिए यूपी मॉडल का बंगाल चुनाव पर असर पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत के बाद ‘यूपी का पुलिस मॉडल’ सुर्खियों में है। PM मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और CM योगी ने प्रचार के दौरान जनता को समझाया कि यूपी में माफियाराज कैसे खत्म किया? स्टेट बॉर्डर कैसे सुरक्षित किए? इस पर ममता बनर्जी को कहना पड़ा था कि बंगाल को किसी ‘बाहरी मॉडल’ की जरूरत नहीं है। मां-माटी-मनुष (मां, मिट्‌टी, मनुष्य) का एजेंडा ठीक है। ———————— यह खबर भी पढ़ें. मथुरा में 2 डकैत एनकाउंटर में मारे गए, जिस कारोबारी को बंधक बनाकर डाका डाला था, वह बोला- बढ़िया काम हुआ मथुरा में कारोबारी को बंधक बनाकर डकैती डालने वाले दो डकैतों को गुरुवार सुबह पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया। बाबरिया गिरोह के दोनों डकैतों पर 50-50 हजार का इनाम था। मारे गए डकैतों में धर्मवीर उर्फ लंबू (35) और राजेंद्र उर्फ पप्पू (55) हैं। दोनों मूलरूप से राजस्थान के रहने वाले थे। पढ़िए पूरी खबर…