कानपुर में अखिलेश दुबे को बेनकाब करने वाले पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार को केंद्र सरकार ने तुरंत रिलीव करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए गृह मंत्रालय ने यूपी के चीफ सेक्रेटरी को लेटर लिखा है। यह लेटर ऐसे समय में आया है, जब कानपुर में अखिलेश दुबे प्रकरण चर्चा में है। इसके केंद्र में पुलिस कमिश्नर हैं, जिन्होंने अखिलेश दुबे के खिलाफ कार्रवाई की। चर्चा है कि दुबे के नेटवर्क की वजह से ही अखिल कुमार को रिलीव करने का आदेश जारी किया गया है। इसे अखिलेश दुबे के पावर के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार में तैनाती आदेश के बाद इस तरह के आदेश जारी किए जाते हैं। यह एक रूटीन प्रक्रिया है। 1994 बैच के IPS अखिल कुमार का 25 अगस्त की रात ट्रांसफर हुआ था। उनकी तैनाती केंद्र सरकार में सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन में प्रबंध निदेशक (MD) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के तौर पर की गई है। ऐसे में यूपी सरकार अखिल कुमार को एनओसी के साथ कार्यमुक्त करती। माना जा रहा था कि इस प्रक्रिया में एक महीने तक का समय लगता। इसी बीच गृह मंत्रालय के अंडर सेक्रेटरी संजीव कुमार की ओर से अखिल कुमार को रिलीव का लेटर जारी कर दिया गया। यह लेटर मुख्य सचिव को संबोधित है। इसकी प्रति डीजीपी, सचिव सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय और डीओपीटी के सचिव को भी भेजी गई है।
पुलिस कमिश्नर और अखिलेश दुबे की 2 तस्वीरें- अखिल कुमार और अखिलेश दुबे की दो तस्वीरें सामने आई हैं। पहली तस्वीर में अखिल कुमार और अखिलेश दुबे पार्टी के दौरान किसी से बातचीत करते नजर आ रहे हैं। यह तस्वीर अखिलेश दुबे की बेटी की मंगनी की बताई जा रही है। दूसरी तस्वीर में अखिल कुमार, अखिलेश दुबे को सम्मानित करते हुए दिख रहे हैं। तस्वीरें वायरल होने पर पुलिस कमिश्नर ने कहा- अखिलेश दुबे के सिंडीकेट में शामिल पत्रकार और अफसर उसे बचाने के लिए सोशल मीडिया पर वार शुरू कर दिए हैं। कार्रवाई से पहले अखिलेश दुबे कई पार्टियों और कार्यक्रम में उनसे मिला था। अब इन तस्वीरों को वायरल करके कार्रवाई को गलत ठहराने या फिर इसके पीछे साजिश का आरोप लगाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अखिलेश दुबे पर एक्शन सबूतों के आधार पर लिया गया है। जितनी भी शिकायतें SIT के पास आ रही हैं। एक-एक मामले की गंभीरता से जांच कराई जा रही है। 4 जनवरी को संभाला चार्ज, 3 बड़ी कार्रवाई से चर्चा में आए अखिल कुमार ने 4 जनवरी 2024 को कानपुर पुलिस कमिश्नर के रूप में चार्ज लिया था। इसके बाद उन्होंने शहर में ऑपरेशन महाकाल अभियान चलाकर अपराधियों के सिंडीकेट के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। 19 अगस्त को ऑपरेशन महाकाल पार्ट-2 किया था लॉन्च सीनियर IPS अखिल कुमार का नवंबर में डीजी रैंक पर प्रमोशन होना है। अखिल कुमार का करीब 4 महीने पहले केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए नाम चयनित हुआ था। केंद्र में प्रतिनियुक्ति का लेटर सोमवार को जारी हो गया। अखिल कुमार ने ऑपरेशन महाकाल के पहले चरण में वकील अखिलेश दुबे को अरेस्ट करके जेल भेज दिया है। इसके बाद अब उन्होंने ऑपरेशन महाकाल-2 मंगलवार यानी 19 अगस्त को लॉन्च किया। 20 सेकेंड के जारी टीजर में पूरी जानकारी दी गई। जल्द ही अब शहर के दूसरे बड़े माफियाओं को भी पुलिस पकड़ेगी। इस बार सफेदपोश अपराधियों पर एक्शन होगा। अब पढ़िए कौन है अखिलेश दुबे जिसे कमिश्नर ने जेल भेजा एक ऐसा वकील, जिसने कभी कोर्ट में नहीं की बहस
अखिलेश दुबे एक ऐसा वकील है, जिसने कभी कोर्ट में खड़े होकर किसी केस में बहस नहीं की। उसके दरबार में खुद की कोर्ट लगती थी और दुबे ही फैसला सुनाता था। वह सिर्फ अपने दफ्तर में बैठकर पुलिस अफसरों के लिए उनकी जांचों की लिखा-पढ़ी करता था। बड़े-बड़े केस की लिखा-पढ़ी दुबे के दफ्तर में होती थी। इसी का फायदा उठाकर वह लोगों के नाम निकालने और जोड़ने का काम करता था। इसी डर की वजह से बीते 3 दशक से उसकी कानपुर में बादशाहत कायम थी। कोई उससे मोर्चा लेने की स्थिति में नहीं था। काले कारनामों को छिपाने के लिए शुरू किया था न्यूज चैनल अखिलेश दुबे ने अपनी ताकत बढ़ाने के लिए सबसे पहले एक न्यूज चैनल शुरू किया था। इसके बाद वकीलों का सिंडीकेट बनाया। फिर इसमें कई पुलिस अफसरों को शामिल किया। कानपुर में स्कूल, गेस्ट हाउस, शॉपिंग मॉल और जमीनों के कारोबार में बड़े-बड़े बिल्डर उसके साथ जुड़ते चले गए। दुबे का सिंडीकेट इतना मजबूत था कि उसकी बिल्डिंग पर केडीए से लेकर कोई भी विभाग आपत्ति नहीं करता था। कमिश्नर का दफ्तर हो या डीएम ऑफिस, केडीए, नगर निगम और पुलिस महकमे से लेकर हर विभाग में उसका मजबूत सिंडीकेट फैला था। उसके एक आदेश पर बड़े से बड़ा काम हो जाता था। मेरठ से भागकर आया था कानपुर
अखिलेश दुबे मूलरूप से कन्नौज के गुरसहायगंज का रहने वाला है। उसके पिता सेंट्रल एक्साइज में कॉन्स्टेबल थे। मेरठ में तैनात थे। वहां रहने के दौरान अखिलेश दुबे की सुनील भाटी गैंग से भिड़ंत हो गई। इसके बाद वह भागकर कानपुर आ गया। बात 1985 की है। अखिलेश दुबे किदवई नगर में किराए का कमरा लेकर रहने लगा। दीप सिनेमा के बाहर साइकिल स्टैंड चलाता था। इस दौरान मादक पदार्थ तस्कर मिश्री जायसवाल की पुड़िया (मादक पदार्थ) बेचने लगा। धीरे-धीरे आपराधिक गतिविधियों में लिप्त हो गया। ———————— ये खबर भी पढ़िए- अखिलेश दुबे की ‘विषकन्या’ ने वकील पर कराई FIR: बोली- फर्जी हस्ताक्षर कर वकालतनामा लगाया; BJP नेता पर रेप का झूठा केस करवाया कानपुर में भाजपा नेता रवि सतीजा के खिलाफ अखिलेश दुबे के इशारे पर झूठा रेप केस दर्ज कराने वाली ‘विषकन्या’ शुक्रवार को सामने आई। युवती ने कोतवाली थाने में अधिवक्ता बिलाल आलम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। युवती ने बताया कि बिलाल ने बिना मेरी अनुमति के मेरा फर्जी हस्ताक्षर बनाकर कोर्ट में अपना वकालतनामा लाभ पाने के लिए लगाया है। कोतवाली थाने की पुलिस अधिवक्ता को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। जल्द ही पुलिस पर्दे के पीछे शामिल बड़े खिलाड़ियों के नाम उजागर करेगी। पढ़ें पूरी खबर…
अखिलेश दुबे को बेनकाब करने वाले कमिश्नर को रिलीव करें:केंद्र ने सरकार को भेजा लेटर, 5 दिन पहले अखिल कुमार का हुआ था ट्रांसफर
