इंडियन फाइटर संग्राम सिंह ने अर्जेंटीना में इतिहास रचते हुए महज 1 मिनट 45 सेकंड में अपनी एमएमए फाइट जीत ली। प्रोफेशनल रेसलिंग से मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (एमएमए) के मुकाबले में शानदार जीत के साथ वह अर्जेंटीना में एमएमए मुकाबला जीतने वाले पहले भारतीय बन गए हैं। ब्यूनस आयर्स में आयोजित मुकाबले में संग्राम सिंह ने अपने अनुभव, तकनीक और आत्मविश्वास का बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए फ्रांस के उभरते फाइटर को मात दी। उनकी इस उपलब्धि से पूरे देश में खुशी की लहर है और खेल प्रेमी इसे भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं। करीबन 55 साल के संग्राम सिंह ने अपनी उम्र से 16 साल छोटे फ्रांस के उभरते हुए फाइटर फ्लोरियन काउडियर को करारी शिकस्त दी और दुनिया में हरियाणा का नाम रोशन किया है। उनकी जीत के लिए रोहतक, उदयपुर और वाराणसी में हवन यज्ञ किए गए हैं। देश में लौटने पर उनका भव्य स्वागत किया जाएगा। तेज शुरुआत और शानदार जीत ब्यूनस आयर्स में हुए इस बहुप्रतीक्षित मुकाबले में संग्राम सिंह ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी फ्लोरियन काउडियर को संभलने का मौका ही नहीं दिया और महज 1 मिनट 45 सेकंड के भीतर मुकाबला अपने नाम कर लिया। उनकी इस जीत ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन किया। बड़े दावों से दूर, प्रदर्शन से दिया जवाब फाइट से पहले संग्राम सिंह ने किसी भी तरह के बड़े दावे करने से परहेज किया था। उन्होंने हमेशा की तरह अपने प्रदर्शन पर भरोसा जताया और मुकाबले में उसी का परिणाम देखने को मिला। उनका मानना है कि असली चैम्पियन वही होता है जो लगातार प्रयास करता है और इस जीत ने उनके इस विचार को सही साबित किया। वजन और तैयारी की चुनौती को किया पार मुकाबले से पहले संग्राम सिंह के सामने वजन नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती थी। उन्होंने कड़ी मेहनत, सीमित आहार और लगातार अभ्यास के जरिए इस चुनौती को पार किया। अपने कोच भूपेश कुमार के मार्गदर्शन में उन्होंने फिटनेस और तकनीक पर विशेष ध्यान दिया, जिसका असर मुकाबले में साफ दिखाई दिया। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन सैमुराई फाइट हाउस द्वारा आयोजित बड़े आयोजन में संग्राम सिंह ने अपने करियर की तीसरी एमएमए फाइट लड़ी और शानदार जीत हासिल की। यह मुकाबला उनके लिए अब तक का सबसे बड़ा मंच था, जहां उन्होंने दक्षिण अमेरिकी दर्शकों के सामने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया और भारत का गौरव बढ़ाया। कड़ी मेहनत और अभ्यास का मिला फल ब्यूनस आयर्स में संग्राम सिंह ने योग, पारंपरिक कुश्ती और आधुनिक एमएमए तकनीकों का गहन अभ्यास किया। उनके कोच भूपेश कुमार ने उनकी ग्राउंड कंट्रोल, स्ट्राइकिंग और फिटनेस पर खास ध्यान दिया। इसके अलावा मुंबई, अहमदाबाद और दिल्ली में भी उन्होंने अपने सपोर्ट स्टाफ के साथ कड़ी तैयारी की थी, जिसका परिणाम इस शानदार जीत के रूप में सामने आया। कुश्ती से एमएमए तक का प्रेरणादायक सफर संग्राम सिंह का सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। ग्रीको-रोमन कुश्ती से शुरुआत कर उन्होंने कॉमनवेल्थ चैंपियन बनने तक का सफर तय किया। इसके बाद प्रोफेशनल रेसलिंग, अभिनय, मॉडलिंग और मोटिवेशनल स्पीकिंग में भी अपनी पहचान बनाई। अब एमएमए में भी उन्होंने अपनी ताकत साबित कर दी है। देश के लिए गर्व का क्षण संग्राम सिंह की यह जीत केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर हौसले बुलंद हो, तो किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है। उनकी इस ऐतिहासिक जीत ने आने वाली पीढ़ियों के खिलाड़ियों को भी प्रेरित करने का काम किया है।
हरियाणा के संग्राम सिंह की MMA फाइट में धमाकेदार जीत:16 साल छोटे फाइटर को चंद सेकंड में दी मात; अर्जेंटीना में रचा इतिहास
