हरियाणा राज्यसभा चुनाव, अब BJP के कैंसिल वोट की चर्चा:जिस 1 वोट से हारे नांदल उसकी पूरी कहानी; कांग्रेस के एक्शन लेने की 6 वजहें

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हरियाणा के राज्यसभा चुनाव में क्रॉस और कैंसिल वोटों को लेकर विवाद लगातार जारी है। कांग्रेस के बाद अब बीजेपी के एक कैंसिल वोट की चर्चा हो रही है। बताया जा रहा है कि बीजेपी के एक वोट कैंसिल होने की वजह कांग्रेस के 3 कैंसिल वोट हैं। हालांकि बीजेपी के एक कैंसिल वोट के कारण पार्टी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल चुनाव हारे। कुछ राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि बीजेपी का इस चुनाव में मैनेजमेंट पहले के चुनाव जैसा नहीं था। इसके अलावा पार्टी के नेता अपनी तैयारियों को लेकर पूरी तरह से कान्फिडेंट नजर आ रहे थे। जिसके कारण पार्टी के नीति निर्धारण करने वाले गलती कर गए और कांग्रेस को घेरने के चक्कर में खुद ही घिर गए। कांग्रेस इन विधायकों को भेज चुकी नोटिस… यहां पढ़ते हैं BJP और कांग्रेस के कैंसिल वोटों की कहानी… पहले 88 वोट डालने की पूरी टाइमलाइन 16 मार्च को सुबह 9.00 बजे वोटिंग शुरू हुई। 10.00 बजे के करीब सीएम नायब सैनी ने पहला वोट कास्ट किया। इसके बाद 11:20 बजे तक राज्यसभा चुनाव के लिए 25 वोट डाले गए थे। दोपहर 1:02 PM बजे तक राज्यसभा चुनाव के लिए 68 वोट डाले गए थे। इसके बाद शाम 4 बजे के करीब सभी वोट कास्ट हुए। तीन आपत्तियों के कारण काउंटिंग शुरू नहीं हुई, चुनाव आयोग की तरफ से आपत्तियों के निपटारे के बाद रात 10.31 पर काउंटिंग शुरू हुई। बीजेपी का ऐसे कैंसिल हुआ एक वोट वोटिंग पूरी होने के बाद बीजेपी ने कांग्रेस के 4, कांग्रेस ने एक वोट पर आपत्ति लगाई। जिसके बाद आरओ के द्वारा ये आपत्तियां और संबंधित वीडियो केंद्रीय चुनाव आयोग को भेजे गए। दरअसल, स्क्रूटिंग के दौरान बीजेपी ने कांग्रेस के 4 बैलेट पर डॉट का निशान होने के कारण उन पर आपत्ति जताई, इस दौरान बीजेपी के एक वोट पर भी ऐसा ही डॉट दिखाई दिया। जिसको देखकर कांग्रेस ने आरओ के सामने अपनी आपत्ति जताई। जिसके बाद कांग्रेस के 3 और बीजेपी के एक वोट आरओ ने कैंसिल कर दिया। जबकि कांग्रेस के परमवीर सिंह का वोट सीक्रेसी लीक होने की वजह से अमान्य हुआ। कैंसिल और क्रॉस वोटिंग पर बीजेपी-कांग्रेस का क्या रिएक्शन कांग्रेस: क्रॉस और कैंसिल वोटों को लेकर कांग्रेस काफी उग्र है। अब तक पार्टी की ओर से 4 विधायकों शैली चौधरी, मोहम्मद इलियास, मोहम्मद इजराइल और रेनू बाला को शोकॉज नोटिस जारी कर 7 दिनों के भीतर जवाब मांगा है। केंद्रीय नेतृत्व ने स्पष्ट संदेश दिया है कि एक-दो दिन में कैंसिल वोट करने वाले एक और विधायक के खिलाफ भी नोटिस जारी होगा। वहीं हरियाणा कांग्रेस के प्रभारी बीके हरिप्रसाद ने कहा है कि कांग्रेस के 9 विधायकों के खिलाफ पार्टी कार्रवाई करने जा रही है। उन्होंने बताया कि जिनके वोट रद्द हुए हैं, उनके खिलाफ भी एक्शन लिया जाएगा। बीजेपी: राज्यसभा चुनाव में वोटिंग के दौरान बीजेपी का एक वोट कैंसिल हुआ है। ये वोट जिस विधायक का कैंसिल हुआ है वह दक्षिण हरियाणा की विधानसभा क्षेत्र का बताया जा रहा है। इसकी वजह से बीजेपी समर्थित उम्मीदवार सतीश नांदल को हार का सामना करना पड़ा। हालांकि बीजेपी की ओर से अभी तक इस कैंसिल वोट को लेकर कोई भी नेता के द्वारा बयान नहीं दिया गया है और न ही पार्टी स्तर पर कोई चर्चा हो रही है। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में कांग्रेस के उग्र होने की ये वजहें… अनुशासन का संदेश देना जरूरी: कांग्रेस चाहती है कि विधायकों में यह साफ संदेश जाए कि पार्टी लाइन से हटकर वोटिंग बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर जीत के बावजूद ढील दी गई, तो भविष्य में और ज्यादा क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ सकता है। हाईकमान की साख बचाने की कोशिश: राज्यसभा उम्मीदवार का चयन सीधे हाईकमान करता है। ऐसे में क्रॉस वोटिंग को नजरअंदाज करना मतलब हाईकमान के फैसले पर सवाल खड़े होने देना होगा, जिससे नेतृत्व कमजोर दिख सकता है। भविष्य के चुनावों के लिए सख्ती: आने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों को देखते हुए पार्टी अभी से अनुशासन मजबूत करना चाहती है। अगर अभी कार्रवाई नहीं हुई, तो बड़े चुनावों में भी बगावत बढ़ सकती है। अंदरूनी गुटबाजी पर कंट्रोल: हरियाणा कांग्रेस में पहले से गुटबाजी रही है। क्रॉस वोटिंग उसी का संकेत है, इसलिए कार्रवाई के जरिए पार्टी अंदरूनी विरोध को कंट्रोल करना चाहती है। विधायक पार्टी लाइन के खिलाफ वोट करते हैं, तो उन पर कार्रवाई का प्रावधान है, जिससे पार्टी कानूनी आधार पर भी सख्त कदम उठा सकती है। राजनीतिक संदेश-BJP पर भी निशाना: कांग्रेस इस कार्रवाई के जरिए यह मैसेज देना चाहती है कि “तोड़फोड़ या दबाव की राजनीति” करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। यह एक तरह से बीजेपी पर भी अप्रत्यक्ष हमला है। ‘जीत गई तो क्या हुआ’ वाला फैक्टर: हालांकि सीट जीत ली गई, लेकिन क्रॉस वोटिंग ने पार्टी की कमजोरी उजागर कर दी। इसलिए कार्रवाई “डैमेज कंट्रोल” का हिस्सा है, ताकि पब्लिक और कार्यकर्ताओं के बीच भरोसा बना रहे। यहां पढ़िए क्या बोले विशेषज्ञ…