हिसार जिले के एक सरकारी स्कूल में छात्राओं को कथित तौर पर मुर्गा बनाकर पूरे परिसर में घुमाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने घटना पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने इसे छात्राओं की गरिमा और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। मामला 7 मार्च को सामने आया, जिसमें अग्रोहा ब्लॉक जगान गांव स्थित सरकारी उच्च विद्यालय में छात्राओं को अपमानजनक सजा देने की बात कही गई। घटना के तीन वीडियो भी सामने आए हैं, जिन्हें जिला शिक्षा अधिकारी को भेजा गया। इसके बाद जांच समिति गठित कर दी गई है। अनुशासन के नाम पर उत्पीड़न- आयोग आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा और सदस्यों ने स्पष्ट कहा कि अगर आरोप सही पाए गए, तो यह बच्चों के मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। आयोग ने दो टूक कहा कि अनुशासन के नाम पर शारीरिक या मानसिक उत्पीड़न किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। आयोग ने यह भी कहा कि छात्राओं को सार्वजनिक रूप से इस तरह अपमानित करना “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसे अभियानों की भावना के विपरीत है। स्कूलों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल सुनिश्चित करें। धारा 82 में शारीरिक दंड पर प्रतिबंध आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि बच्चों को शारीरिक दंड देना कानूनन अपराध है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 17 में शारीरिक दंड पर रोक है। किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 75 में क्रूरता दंडनीय है। धारा 82 में शारीरिक दंड पर प्रतिबंध है। इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार अभिसमय के तहत भी बच्चों को किसी भी प्रकार के अपमान और हिंसा से संरक्षण का अधिकार है। इन अधिकारियों से मांगी गई रिपोर्ट आयोग ने 4 स्तर पर जवाबदेही तय करते हुए रिपोर्ट मांगी है। इसमें उपायुक्त हिसार, जिला शिक्षा अधिकारी, पुलिस अधीक्षक, स्कूल प्रिंसिपल शामिल है। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि सभी संबंधित अधिकारी अपनी रिपोर्ट 12 मई 2026 की अगली सुनवाई से एक सप्ताह पहले प्रस्तुत करें। असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने कहा कि मामले की गहन जांच कराई जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
हिसार में छात्राओं को मुर्गा बनाकर घुमाने पर बवाल:मानवाधिकार आयोग ने मांगी रिपोर्ट; बोले- गरिमा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
