पहाड़ी राज्यों में हो रही बर्फबारी से मध्यप्रदेश ठिठुर गया है। भोपाल, इंदौर समेत 5 जिलों में शीतलहर का असर है। इंदौर में दो दिनों से ठंड का असर जारी है। रविवार सुबह से मौसम सर्द बना रहा। उज्जैन में भी ठंडी हवा के कारण पिछले चार दिनों से सर्दी बढ़ रही है। दिन और रात के तापमान में 1-2 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। ग्वालियर में ठंड और कोहरे ने लोगों का जनजीवन प्रभावित किया है। सड़क किनारे रहने वाले लोग आग जलाकर ठंड से बचते दिखाई दिए। रविवार सुबह कोहरे के चलते दृश्यता 100 से 150 मीटर तक सीमित रही। न्यूनतम तापमान 7.2 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम 24.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। भोपाल में भी कोहरे का असर बना हुआ है। दृश्यता काफी कम है और 2 किलोमीटर से आगे कुछ दिखाई नहीं दे रहा। मौसम विभाग ने रविवार को भोपाल, इंदौर, शाजापुर, सीहोर और राजगढ़ में कोल्ड वेव यानी, शीतलहर का अलर्ट जारी किया है। यहां दिन का पारा 25 डिग्री से नीचे रहेगा। यानी, लोगों को दिन में भी ठंड का एहसास होगा। ऐसे में लोगों को गर्म कपड़े पहनकर ही घर से बाजार निकलने की सलाह दी गई है। प्रदेश का मालवा सबसे ठंडा
इस समय सर्दी का सबसे ज्यादा असर मालवा और निमाड़ में है। इनमें इंदौर और उज्जैन संभाग के कुल 15 जिले शामिल हैं। इनमें से मंदसौर प्रदेश में सबसे ठंडा बना हुआ है। यहां पारा 2.9 डिग्री रिकॉर्ड हो चुका है। वहीं, दूसरा बसे ठंडा शहर शाजापुर रहा और पारा 3.1 डिग्री पहुंच गया। प्रदेश के 5 बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 4.6 डिग्री, इंदौर में 6.2 डिग्री, ग्वालियर में 6.7 डिग्री, उज्जैन में 7.3 डिग्री और जबलपुर में 7.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कोहरे से ट्रेनों पर भी असर
इससे पहले शनिवार को ग्वालियर, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल और अनूपपुर में घना कोहरा रहा। अन्य शहरों में भी कोहरे का असर देखा गया। इस वजह से दिल्ली से आ रही ट्रेनें लेट हो गईं। दूसरी ओर, भोपाल, राजगढ़, शाजापुर, सीहोर, मंदसौर, इंदौर, सिवनी, शहडोल और अनूपपुर में सर्द हवाएं चली। मौसम विभाग के अनुसार, शुक्रवार-शनिवार की रात में शहडोल के कल्याणपुर में 3.2 डिग्री, राजगढ़ में 3.8 डिग्री, नौगांव में 4.6 डिग्री, उमरिया में 4.7 डिग्री, पचमढ़ी में 4.8 डिग्री, खजुराहो में 5 डिग्री, मलाजखंड में 5.6 डिग्री और रीवा में तापमान 5.8 डिग्री रहा। वहीं, रायसेन, शिवपुरी, दमोह, मंडला, दतिया, सतना, गुना, श्योपुर, धार, रतलाम समेत करीब 30 शहरों में पारा 10 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया। इधर, 16 से ज्यादा जिलों में कोहरे का असर भी देखा गया। इस वजह से दिल्ली से भोपाल, इंदौर और उज्जैन आने वाली ट्रेनें लेट हो गईं। हिमालयी क्षेत्र में सिस्टम, बढ़ेगी ठंड
मौसम विभाग के अनुसार, 30 दिसंबर को एक वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है। इसका असर एमपी में भी देखने को मिलेगा। सर्द हवाओं की वजह से ठंड का मिजाज और भी बढ़ सकता है। जेट स्ट्रीम की रफ्तार 222 किमी प्रतिघंटा
वर्तमान में जेट स्ट्रीम भी चल रही है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में जेट स्ट्रीम का असर है। शनिवार को यह जमीन से 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर 222 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से बही। रविवार को भी इतनी ही रफ्तार रहने का अनुमान है। क्या होती है जेट स्ट्रीम?
मौसम एक्सपर्ट की माने तो प्रदेश में ठंड बढ़ने की वजह खास वजह जेट स्ट्रीम भी है। यह जमीन से लगभग 12 किमी ऊंचाई पर चलने वाली तेज हवा है। इस बार रफ्तार 262 किमी प्रति घंटा तक पहुंच गई है। यह देश के उत्तरी हिस्से में सक्रिय है। पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवा के अलावा ये ऊंची हवा सर्दी बढ़ा रही है। उत्तर के मैदानी इलाकों से जब ठंडी हवा और पहाड़ी इलाकों से बर्फीली हवा हमारे यहां आती है, तब तेज ठंड पड़ती है। यह सब उत्तर भारत में पहुंचने वाले मौसमी सिस्टम वेस्टर्न डिस्टरबेंस के कारण होता है। ऐसे में यदि जेट स्ट्रीम भी बन जाए तो सर्दी दोगुनी हो जाती है। इस बार यही हो रहा है। लोगों के लिए यह अलर्ट…. नवंबर-दिसंबर में रिकॉर्ड तोड़ चुकी है सर्दी
इस बार नवंबर के बाद दिसंबर में भी सर्दी रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। नवंबर में भोपाल में लगातार 15 दिन तक शीतलहर चली। रिकॉर्ड के अनुसार, साल 1931 के बाद शीतलहर के यह सबसे ज्यादा दिन है। दूसरी ओर, 17 नवंबर की रात में पारा 5.2 डिग्री तक पहुंच गया, जो ओवरऑल रिकॉर्ड भी रहा। इससे पहले 30 नवंबर 1941 में तापमान 6.1 डिग्री रहा था। इंदौर में भी पारा 6.4 डिग्री ही रहा। यहां भी सीजन की सबसे सर्द रात रही। 25 साल में पहली बार पारा इतना लुढ़का। दूसरी ओर, दिसंबर में इंदौर में पारा सबसे कम रहा। भोपाल में भी यह 5 डिग्री से नीचे पहुंच चुका है। ठंड के लिए दिसंबर-जनवरी खास
मौसम विभाग के अनुसार, जिस तरह मानसून के चार महीने (जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर) में से दो महीने जुलाई-अगस्त महत्वपूर्ण रहते हैं और इन्हीं में 60 प्रतिशत या इससे अधिक बारिश हो जाती है, ठीक उसी तरह दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है। इन्हीं दो महीने में प्रदेश में उत्तर भारत से सर्द हवाएं ज्यादा आती हैं। इसलिए टेम्प्रेचर में अच्छी-खासी गिरावट आती है। सर्द हवाएं भी चलती हैं। पिछले 10 साल के आंकड़े यही ट्रेंड बताते हैं। वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के एक्टिव होने से दिसंबर में मावठा भी गिरता है। इससे दिन में भी सर्दी का असर बढ़ जाता है। अब जानिए दिसंबर में कैसी रहती है ठंड? मौसम का ट्रेंड देखें तो दिसंबर में स्ट्रॉन्ग वेस्टर्न डिस्टरबेंस आते हैं। वहीं, उत्तरी हवाएं आने से दिन-रात के तापमान में गिरावट होती है। इस बार भी यही हो रहा है। शुरुआत से अब तक कई वेस्टर्न डिस्टरबेंस उत्तर भारत को प्रभावित कर चुके हैं। इस वजह से एमपी में कड़ाके की ठंड के साथ शीतलहर का असर है। इन जिलों में सबसे ज्यादा सर्दी MP के 5 बड़े शहरों में दिसंबर में ऐसा ट्रेंड भोपाल में 3.1 डिग्री रिकॉर्ड हो चुका टेम्प्रेचर
भोपाल में दिन-रात ठंड और बारिश का ट्रेंड रहा है। 10 में से पिछले 5 साल से भोपाल दिसंबर में भीग रहा है। आधा से पौन इंच तक बारिश हो गई। हालांकि, इस बार अब तक बारिश नहीं हुई है। दिसंबर में ठंड की बात करें तो 11 दिसंबर 1966 की रात में पारा 3.1 डिग्री पहुंच गया था। यह अब तक का ओवरऑल रिकॉर्ड है। 3 साल पहले 2021 में पारा 3.4 डिग्री पहुंच चुका है। इंदौर में 5 से 8 डिग्री के बीच रहा है पारा
इंदौर में दिसंबर में रात का तापमान 5 से 8 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। पिछले साल तापमान 8.6 डिग्री तक पहुंच गया था। 10 साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो दिन में पारा 28 से 31 डिग्री के बीच ही रहता है। इस महीने इंदौर में बारिश भी होती है। पिछले 4 साल से बारिश हो रही है। हालांकि, इस बार अब तक बारिश नहीं हुई है। 31 दिसंबर 2015 को दिन का सर्वाधिक तापमान 33 डिग्री दर्ज किया गया था। 27 दिसंबर 1936 की रात में टेम्प्रेचर 1.1 डिग्री रहा था। सर्वाधिक कुल मासिक बारिश वर्ष 1967 को 108.5 मिमी यानी 4.2 इंच हुई थी। 24 घंटे में सर्वाधिक 53 मिमी यानी 2.1 इंच बारिश 17 दिसंबर 2009 को हुई थी। ग्वालियर में सबसे ज्यादा सर्दी, इस बार कोहरे का असर
ग्वालियर में दिन में गर्मी तो रात में ठंड रहती है। पिछले 10 साल में यहां अधिकतम तापमान 26.2 से 31.6 डिग्री तक रह चुका है। वहीं, रात में पारा 1.8 से 6.9 डिग्री दर्ज किया गया। इस बार तेज ठंड है। साथ ही घना कोहरा भी छा रहा है। 6 दिसंबर 2006 को दिन का तापमान 32.1 डिग्री सेल्सियस पहुंच चुका है। 26 दिसंबर 1961 को न्यूनतम तापमान 0.4 डिग्री पहुंचा था। वर्ष 1997 में कुल मासिक बारिश 106.6 मिमी यानी 4.1 इंच हुई थी। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश 13 दिसंबर 2013 को 32.1 मिमी यानी 1.2 इंच हुई थी। जबलपुर में तेज रहता है सर्दी का असर
जबलपुर में 28 दिसंबर 1960 को दिन का तापमान 33.2 डिग्री पहुंच चुका है। 28 दिसंबर 1902 की रात में तापमान 0.6 डिग्री रहा था। यह ओवरऑल रिकॉर्ड है। वर्ष 1885 में सर्वाधिक मासिक बारिश 125 मिमी यानी 4.9 इंच हुई थी। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड 68.1 मिमी यानी 2.6 इंच 16 दिसंबर 1885 का है। इस बार भी कड़ाके की ठंड का दौर है। बारिश नहीं हुई है। उज्जैन में भी कड़ाके की ठंड
उज्जैन में दिन का औसत तापमान 28.2 डिग्री और रात में 9.4 डिग्री सेल्सियस है। इस महीने औसत 4.6 मिमी बारिश होती है। पिछले पांच साल से उज्जैन में दिसंबर में बारिश हो रही है, लेकिन अबकी बार एक भी दिन बारिश नहीं हुई है। 18 दिसंबर 2002 को दिन में टेम्प्रेचर 34.9 डिग्री पहुंच चुका है। यह ओवरऑल रिकॉर्ड है। 28 दिसंबर 1968 और 29 दिसंबर 1983 को रात में पारा 0.5 डिग्री पहुंच चुका है। वर्ष 1997 में कुल मासिक बारिश 119.4 मिमी यानी 4.7 इंच बारिश हो चुकी है। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश की बात करें तो 11 दिसंबर 1967 को 35.3 मिमी यानी 1.3 इंच बारिश हुई थी। मौसम के पल-पल के अपडेट के लिए नीचे लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…
सर्द हवा से ठिठुरा MP…भोपाल-इंदौर समेत 5 जिलों में अलर्ट:उज्जैन संभाग सबसे ठंडा, मंदसौर में पारा 2.9 डिग्री; उत्तरी हिस्से में घना कोहरा
