जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि सरकार ने जानबूझकर जिला उपायुक्तों से ऐसी चिट्ठी लिखवाई, ताकि चुनाव टाले जा सकें। लेकिन यह चिट्ठी भी सरकार की अन्य नीतियों की तरह लीक हो गई, जिससे मंशा उजागर हो गई। उन्होंने कहा कि जब डीसी, मुख्य सचिव, मंत्री और मुख्यमंत्री अलग-अलग बयान दें और चुनाव आयोग कुछ और कहे, तो यह स्थिति प्रदेश के लिए घातक है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि उपायुक्तों की चिट्ठियों से यह स्पष्ट है कि सरकार ने आपदा राहत के नाम पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। आज भी अनेक सड़कें बंद हैं, पुनर्वास कार्य अधूरा है और सर्दियों के करीब होते हुए भी सरकार ने आपदा प्रभावितों को उनके हाल पर छोड़ दिया है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से मिले राहत कोष का उपयोग पीड़ितों के बजाय सरकार अपने खर्च चलाने में कर रही है। नगर निगम चुनाव की तरह अब पंचायत चुनाव को टालने की कोशिशें हो रही हैं।
जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार के झूठे वादों और गारंटियों से जनता का भरोसा उठ चुका है। यह सरकार नीयत और नीति दोनों में विफल है और केवल सत्ता बनाए रखने के लिए झूठ का सहारा ले रही है।
