कृषि विश्वविद्यालय ने अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान के लिए फिलीपींस के साथ मिलाया हाथ

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कुलपति प्रो. नवीन कुमार ने बताया कि इस परियोजना को आईआरआरआई द्वारा 15.30 लाख के प्रारंभिक अनुदान के साथ मंज़ूरी दी गई है, जिसमें से विश्वविद्यालय को पहली किस्त के रूप में 7.65 लाख पहले ही मिल चुके हैं। यह शोध चावल-गेंहू और चावल-आलू प्रणालियों में प्राकृतिक कृषि परिवर्तनों के प्रभाव का अध्ययन करेगा और 2027 तक जारी रहेगा।

उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह अंतर्राष्ट्रीय सहयोग विश्वविद्यालय के लिए गर्व की बात है और इससे विश्वविद्यालय की वैश्विक प्रतिष्ठा में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। प्रो. कुमार ने वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए आईआरआरआई के प्रति आभार व्यक्त किया और अनुसंधान, शिक्षण और प्रसार के माध्यम से सतत कृषि को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

जैविक कृषि और प्राकृतिक खेती विभाग, जिसे राष्ट्रीय ‘प्राकृतिक खेती मिशन’ के तहत ‘प्राकृतिक खेती केंद्र’ और प्रमाणन के लिए ‘क्षेत्रीय परिषद’ के रूप में नामित किया गया है, 2002 से प्राकृतिक और जैविक खेती को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहा है। इसने प्राकृतिक और जैविक खेती पर विभिन्न पद्धतियां, प्रशिक्षण, सेमिनार और सम्मेलन आयोजित किए हैं, और अब इस अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का नेतृत्व कर रहा है।

उन्होंने सहयोगी वैज्ञानिकों, आईआरआरआई, फिलीपींस के डॉ. पन्नीरसालवेन और डॉ. ए.के. मिश्रा तथा विश्वविद्यालय के डॉ. रामेश्वर, डॉ. गोपाल कतना और डॉ. राकेश कुमार के समर्पण की भी सराहना की।