जब शिक्षकों ने उन्हें ढूंढना शुरू किया और फोन मिलाया तो कोई जवाब नहीं मिला। प्रयोगशाला का दरवाजा अंदर से बंद मिला। दरवाजा तोड़ने पर सभी के होश उड़ गए, क्योंकि अंदर डॉ. सिंह का शव पंखे से लटका मिला।
सूचना पर कछवां थानाध्यक्ष पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और फोरेंसिक टीम को बुलाकर जांच कराई। शव को नीचे उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
डॉ. दिलीप सिंह मूल रूप से वाराणसी जनपद के चोलापुर थाना क्षेत्र के सहमलपुर गांव के निवासी थे। वर्तमान में वह परिवार के साथ मोहनसराय में रहते थे। पत्नी मंजुला सिंह वाराणसी के राजातालाब स्थित एक प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका हैं। पुत्र अमन सिंह लखनऊ से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है और पुत्री आयुषी सिंह कानपुर से एम.फार्मा कर रही है।
घटना की सूचना मिलते ही विद्यालय परिसर में हड़कम्प मच गया। शव को देखकर पत्नी बेहोश हो गईं। पुलिस ने उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से उपचार दिलवाया।
डॉ. दिलीप सिंह अक्टूबर 1996 से गांधी विद्यालय में कार्यरत थे। हाल ही में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के चलते हरिद्वार भी गए थे। आत्महत्या का कारण अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। पुलिस मामले की गम्भीरता से जांच कर रही है।
