हरियाणा शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों (पीआरटी, पीजीटी और टीजीटी) के लिए एक बड़ा और कड़ा निर्णय लिया है। सुप्रीम कोर्ट के सितंबर 2025 के आदेश का पालन करते हुए विभाग ने उन सभी शिक्षकों के लिए हरियाणा शिक्षक पात्रता परीक्षा (एचटेट) पास करना अनिवार्य कर दिया है, जिनकी सेवा अवधि में अभी 5 साल से अधिक का समय शेष है। विभाग ने इसके लिए दिसंबर 2027 तक की अंतिम समय-सीमा (डेडलाइन) तय की है। नए निर्देशों के अनुसार, जो शिक्षक तय समय-सीमा के भीतर एचटेट उत्तीर्ण करने में विफल रहेंगे, उन्हें सेवा नियमों के तहत नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है या उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति (वॉलंटरी रिटायरमेंट) दी जा सकती है। हालांकि, जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में 5 साल से कम का समय बचा है, उन्हें इस परीक्षा से छूट दी गई है। विभाग ने शिक्षण क्षमता बढ़ाने के लिए उठाया कदम शिक्षा विभाग का उद्देश्य शिक्षकों की विषयगत दक्षता और शिक्षण क्षमता को आधुनिक मानकों के अनुरूप परखना है। आरटीई एक्ट 2009 से पहले भर्ती हुए शिक्षकों के लिए यह मूल्यांकन अनिवार्य किया गया है ताकि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो सके। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन डॉ. पवन कुमार ने बताया कि सभी डीईओ को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए गए हैं। शिक्षकों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय दिया गया है, ताकि वे बिना किसी दबाव के परीक्षा में शामिल हो सकें। इस फैसले पर शिक्षक जगत में मिली-जुली प्रतिक्रिया है, जहां विभाग इसे सुधारवादी कदम मान रहा है। वहीं, कुछ अनुभवी शिक्षक इसे अतिरिक्त मानसिक दबाव बता रहे हैं।
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