वाग्देवी की मूल प्रतिमा, जिसे मुगलों ने खंडित किया था:117 साल से लंदन में कांच में कैद; बॉक्स को टच करने की अनुमति नहीं

Spread the love

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धार की भोजशाला को हिंदू मंदिर माना है। शुक्रवार को दिए फैसले में हाईकोर्ट ने कहा- हमने पुरातात्विक और ऐतिहासिक तथ्यों, एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर विचार किया है। ASI एक्ट के प्रावधानों के साथ-साथ अयोध्या मामले को भी आधार माना। लंबे समय से भोजशाला को मुस्लिम मस्जिद मानते आ रहे थे, तो हिंदू भोजशाला यानी की मां वाग्देवी का मंदिर। भोजशाला में जिस मां वाग्देवी की पूजा होती है, हकीकत में वह मूल प्रतिमा मप्र के धार से 7350 किमी दूर ब्रिटिश म्यूजियम ग्रेट रसल स्ट्रीट में रखी है। मुगलों के आक्रमण के बाद खंडित हुई इस प्रतिमा को अंग्रेजों ने खुदाई कर 1875 में निकाला था। इसके बाद 117 साल से प्रतिमा लंदन में ही है। लंदन में रह रहे धार के कृष पाल ने ब्रिटिश म्यूजियम ग्रेट रसल स्ट्रीट से भास्कर के लिए रिपोर्टिंग की थी। भास्कर के आग्रह पर वे ब्रिटिश म्यूजियम, ग्रेट रसल स्ट्रीट पहुंचे, जहां मां वाग्देवी की प्रतिमा रखी हुई है। यह प्रतिमा धार की भोजशाला पर मुगलों के आक्रमण से खंडित हो गई थी। इसकी दो भुजा टूटी हुई हैं। जानिए कृष पाल ने लंदन में क्या कुछ देखा और बताया… मां वाग्देवी की प्रतिमा तक पहुंचना आसान नहीं कृष पाल ने बताया कि जब से होश संभाला तब से भोजशाला का नाम सुनता रहा हूं। भोजशाला का इतिहास जानने के लिए बहुत सारी किताबें पढ़ीं। बचपन में दादा-नानी से कहानियों में भोजशाला और मां वाग्देवी के बारे में सुना। फिर मां वाग्देवी की असली प्रतिमा को देखने की इच्छा हुई, लेकिन वहां तक पहुंचना आसान नहीं था, क्योंकि यह प्रतिमा लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम ग्रेट रसल स्ट्रीट में रखी थी। इसे भारत लाने को लेकर भोज उत्सव समिति 1952 से संघर्ष कर रही है। कृष पाल ने वीडियो कॉल पर ग्रेट रसल स्ट्रीट में स्थित ब्रिटिश म्यूजियम को दिखाया। कृष ने बताया कि यहां हमारे देवी-देवताओं की 100 से ज्यादा प्रतिमाएं हैं। म्यूजियम में दो प्रतिमाएं आसपास रखी हैं। 7 से 8 फीट ऊंचे कांच के बॉक्स में मां की 4 से 5 फीट ऊंची प्रतिमा के पास ही पूरी प्रतिमा रखी हुई थी। इस बॉक्स को टच करने की अनुमति नहीं है। इस पर प्रतिमा के बारे में पूरा उल्लेख चस्पा है। म्यूजियम में यूएस, अफ्रीका, चीन समेत एशिया के कई देशों की प्रतिमाएं रखी हुई हैं। भोज की नगरी नरेशचंद्र नगरी विद्याधरी शांभरी… अर्थात राजा भोज की नगरी की विद्या की देवी। सफेद पत्थर की चार भुजा वाली सुंदर प्रतिमा के नीचे लिखे 1034 ईस्वी के शिलालेख पर यह पंक्तियां अंकित हैं। हालांकि, हिंदूवादी संगठन भले ही इसे वाग्देवी की प्रतिमा बताते हों, लेकिन मूर्ति की पहचान के लिए म्यूजियम में जो जानकारी दी गई है, उसमें इसे जैन देवी अम्बिका बताया गया है। यह प्रतिमा 1909 में लंदन लाई गई थी। ब्रिटिश म्यूजियम में दुनियाभर से लाई गई मूर्तियां हैं म्यूजियम बहुत बड़ा है। यहां सेक्शन बने हुए हैं, जिसमें दुनियाभर से लाई गई वस्तुएं-प्रतिमाएं, ऐतिहासिक महत्व की चीजें देश के हिसाब से रखी गई हैं। भारत और चीन के सेक्शन आमने-सामने हैं। उसमें भव्य हॉल में भारत से ले जाई गई वस्तुएं-प्रतिमाएं रखी हैं। 100 से अधिक प्रतिमाओं के बीच मां वाग्देवी की प्रतिमा भी है। मां वाग्देवी की प्रतिमा के पास ही मां दुर्गा, गणेशजी की प्रतिमा के साथ भगवान महावीर समेत कई अन्य जैन तीर्थंकरों और बुद्ध की प्रतिमाएं भी रखी हैं। भोजशाला का इतिहास और इसे लेकर अब तक क्या-क्या संघर्ष हुआ नोट- उक्त जानकारी आंदोलन से जुड़े समिति के संयोजक गोपाल शर्मा के द्वारा दी गई है। प्रधानमंत्री मोदी से भी कर चुके हैं प्रतिमा को वापस लाने की मांग भोजशाला समिति के हेमंत दौराया ने बताया कि लंदन से मां वाग्देवी की मूर्ति पुन: वापस लाने के लिए समिति के माध्यम से सालों से संघर्ष किया जा रहा है। इसको लेकर शासन-प्रशासन के समक्ष ज्ञापन भी सौंपा गया है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती सहित अन्य नेताओं को भी ज्ञापन प्रेषित किया गया है। लोकसभा चुनाव वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री मोदी जब झाबुआ व धार आए थे, तब भी मूर्ति वापस लाने की मांग को लेकर ज्ञापन प्रेषित किया गया था। यह खबर भी पढ़ें
MP हाईकोर्ट ने धार भोजशाला को वाग्देवी मंदिर माना मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धार की भोजशाला को वाग्देवी मंदिर माना है। शुक्रवार को दिए फैसले में हाईकोर्ट ने कहा- हमने पुरातात्विक और ऐतिहासिक तथ्यों, एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर विचार किया है। ASI एक्ट के प्रावधानों के साथ-साथ अयोध्या मामले को भी आधार माना। पूरी खबर पढ़ें…