दिल्ली के वकीलों की मांग का उच्चतम न्यायालय बार एसोसिएशन और दिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन का भी साथ मिला और दोनों संगठनों ने उपराज्यपाल के नोटिफिकेशन को वापस लेने की मांग की है। उच्चतम न्यायालय और दिल्ली उच्च न्यायालय की बार एसोसिएशंस ने अलग-अलग नोटिस जारी कर ये मांग की है।
दिल्ली में शनिवार काे वकीलों के न्यायिक कार्य बहिष्कार का दूसरा दिन था। इस वजह से निचली अदालतों में काम बाधित हुआ। निचली अदालतों में लिस्टेड मामलों में केवल तारीख ही मिली। इस वजह से चर्चित मामलों की भी सुनवाई नहीं हो सकी।
राऊज एवेन्यू कोर्ट में मकोका के मामले में आम आदमी पार्टी नेता नरेश बाल्यान से जुड़े मामले में सभी आरोपितों को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पेश किया गया लेकिन कोई प्रभावी सुनवाई नहीं हो सकी। राऊज एवेन्यू कोर्ट में ही 2020 में कोरोना प्रतिबंधों का उल्लंघन करने और जल बोर्ड के दफ्तर पर तोड़फोड़ के मामले में भाजपा सांसद योगेंद्र चांदोलिया के खिलाफ दर्ज मामले की सुनवाई भी टल गई।
हड़ताल का आह्वान दिल्ली की निचली अदालतों के सभी बार एसोसिएशंस के संगठन कोआर्डिनेशन कमेटी ऑफ ऑल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट बार एसोसिएशंस ने किया है। कोआर्डिनेशन कमेटी ने कहा कि दिल्ली के उपराज्यपाल ने 13 अगस्त को एक नोटिफिकेशन जारी कर पुलिस थानों से पुलिसकर्मियों के बयान वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए दर्ज करने की अनुमति दी थी। इसके लिए कुछ स्थान तय किए गए हैं। उपराज्यपाल के इस फैसले के खिलाफ कोआर्डिनेशन कमेटी ने 20 अगस्त को दिल्ली के उपराज्यपाल, केंद्रीय गृह मंत्री, केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री और दिल्ली के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अपना विरोध जताया था। कोआर्डिनेशन कमेटी के मुताबिक उपराज्यपाल का नोटिफिकेशन केंद्रीय गृह सचिव के 15 जुलाई 2024 के सर्कुलर के विपरीत है। केंद्रीय गृह सचिव के सर्कुलर में पुलिस थानों में किसी भी किस्म की गवाही से इनकार किया गया था।
कोआर्डिनेशन कमेटी ने 20 अगस्त को लिखे पत्र में कहा था कि उपराज्यपाल के इस नोटिफिकेशन को 48 घंटों के अंदर वापस लिया जाए, लेकिन दो दिनों के बावजूद इस पत्र पर विचार नहीं किया गया। उसके बाद कोआर्डिनेशन कमेटी ने 21 अगस्त को आपात बैठक कर दिल्ली की सभी जिला अदालतों में 22 और 23 अगस्त को न्यायिक कार्यों के बहिष्कार का फैसला किया था।
