शंकराचार्य ‘गो-LX’ पर गाय खरीदेंगे, लेकिन बेचेंगे नहीं:कहा- सेवा करने वालों को लाइसेंस देंगे; देश में 4 हजार ‘गऊ धाम’ बनाएंगे

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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद गो-LX ऐप शुरू कर रहे हैं। गोरक्षा यात्रा कर रहे शंकराचार्य कहते हैं- हम ऐप से सिर्फ गाय खरीद रहे हैं, बेच नहीं रहे। कोई सनातनी गाय लेना चाहेगा, तो उसके साथ एग्रीमेंट करेंगे। लाइसेंस देंगे कि आप गाय सेवा के लिए ले रहे हैं। समय-समय पर चेकिंग भी करवाएंगे कि गाय सुरक्षित है या नहीं। जो गाय खरीद रहे हैं, उन्हें रखने के लिए पूरे देश की 4,123 विधानसभाओं में गऊ-धाम खोलेंगे। दैनिक भास्कर को शंकराचार्य ने बताया कि ये सुविधा सिर्फ देसी गायों के लिए है। विदेशी नस्ल की गायों को हम नहीं खरीदेंगे। पहले शंकराचार्य के गो-LX ऐप की 3 खासियत समझिए… अब पढ़िए शंकराचार्य से हुई बातचीत सवाल- गो-LX वेबसाइट कब तक लॉन्च होगी? क्या ऐप भी आएगा?
जवाब- हमारा ऐप और वेबसाइट 1008.guru पहले से मौजूद है। अभी हम उसी ऐप में ये सुविधा शुरू कर रहे हैं। हमारे साथ जुड़े टेक्निशियन बता रहे हैं कि नया ऐप बनाने में 20 से 25 दिन लग जाएंगे। नया बनने के बाद उसकी लॉन्चिंग कर देंगे। सवाल- गो-LX नाम क्यों चुना?
जवाब- हमने गो-LX नाम इसलिए नहीं चुना कि OLX का बहुत ज्यादा प्रचार है। बल्कि इसलिए रखा है, क्योंकि OLX की प्रक्रिया से ज्यादातर लोग परिचित हैं। नई जनरेशन जिस भाषा को समझती है, उस भाषा में हम बात करेंगे तो उन्हें बात जल्दी समझ आ जाएगी। सवाल- आम आदमी अपनी गाय को बेचने के लिए कैसे लिस्ट करेगा?
जवाब- यह अलग तरह की प्रक्रिया है। इसमें खरीदने-बेचने जैसा कुछ नहीं है, सिर्फ खरीद ही है। गाय बेचने वाले ऐप पर आएंगे और अपना विज्ञापन डालेंगे। हम देश के किसी भी कोने से उसे खरीदेंगे। हमें गाय बेचनी नहीं है। हमारे पास जो गाय आएंगी, उनकी जीवनभर सेवा करेंगे। सवाल- पूरे देश में गाय बेचने वालों को विकल्प दे रहे हैं। इन गायों को रखेंगे कहां?
जवाब- इस बारे में हम लोग चर्चा कर रहे हैं। स्वाभाविक है कि पूरे देश से गाय खरीदकर उसे ट्रांसपोर्ट करके किसी एक जगह ले जाना संभव नहीं। इसके लिए एक प्रदेश में कम से कम एक यूनिट तैयार करनी पड़ेगी, जिससे उस प्रदेश की गाय उसी प्रदेश में रह सके। सवाल- इस अभियान के लिए फंड कहां से आएगा?
जवाब- गायों के लिए 3 तरह का फंड चाहिए। 1- गाय खरीदने के वक्त। 2- गाय को रखने के लिए गोशाला बनवाना। 3- हर रोज गाय के चारा-पानी और दवा के लिए। हम कोई धन्नासेठ नहीं हैं। पैसा नहीं है, लेकिन इच्छाशक्ति है। सनातनी लोग हमसे संपर्क कर रहे हैं। ऐसे लोगों से हम कह रहे हैं कि या तो एक गाय आप खुद खरीद लीजिए। कम से कम वो गाय कटेगी तो नहीं। अगर सेवा करने में दिक्कत आ रही है, तो वो गाय हमारी गोशाला में रखवा दीजिए। गाय आपकी ही रहेगी। हम रोज गाय के हाल वेबसाइट के जरिए आप तक पहुंचाते रहेंगे। आप जब चाहें, गाय को ले जा सकते हैं। सवाल- जिस गऊ धाम की बात आपने की है, उसकी व्यवस्था कैसी होगी?
जवाब- देशभर की 4,123 विधानसभाओं में एक-एक ‘गऊ धाम’ आदर्श रूप में स्थापित किया जाएगा। एक विधानसभा का इलाका इतना बड़ा नहीं होता है कि एक व्यक्ति उसे संभाल न सके। इस तरह जो गाय का मालिक होगा, वो भी गऊ धाम में जाकर गाय माता को खिला-पिला सकेगा। उसकी दुलार-सेवा कर सकेगा। इस मैनेजमेंट के लिए एक केंद्रीय टीम होगी। कामकाज के लिए SOP बनेगी। उसी के हिसाब से हर गऊ धाम का संचालन किया जाएगा। सवाल- क्या सिर्फ आप ही इस ऐप या वेबसाइट से गाय खरीद सकेंगे?
जवाब- हम बता चुके हैं कि गाय कोई भी खरीद सकता है। हमारा मकसद गाय खरीदकर एक जगह इकट्ठा करना नहीं है। हमारा मकसद गाय को कटने से बचाना है। इस समय मीडिया में ऐसे दिखाया जा रहा है जैसे हिंदू गाय बेचकर ही अपनी रोजी-रोटी चला रहा हो। इसी नैरेटिव के खिलाफ हमारी ये घोषणा है। सवाल- गाय खरीदने वालों की योग्यता क्या होगी?
जवाब- हमारे जरिए जो गाय खरीदेगा और गाय लेकर जाएगा, उसे हम अपनी ज्योतिष्पीठ की तरफ से लाइसेंस देंगे कि इन्होंने गाय की सेवा करने का बॉन्ड भरा है। उस व्यक्ति के साथ हमारा एग्रीमेंट होगा। वो व्यक्ति बॉन्ड भरेगा कि सेवा की दृष्टि से गाय ले जा रहा हूं। अगर सेवा नहीं हो पाएगी तो किसी और को नहीं बेचूंगा, वापस आपके पास ही दे दूंगा। सवाल- ऐप पर सिर्फ बूढ़ी गाय की खरीद-बिक्री होगी?
जवाब- ऐसा नहीं है कि सिर्फ बूढ़ी गाय ही कटने के लिए जा रही हैं। चूंकि हमारा उद्देश्य गाय को कटने से बचाना है, इसलिए हर तरह की गाय खरीदी जाएगी। हम ऐसा सिस्टम बनाएंगे, जिसमें रजिस्टर्ड गायों का रखरखाव, सेहत, वंश वृद्धि और अन्य जरूरतों का ध्यान रखा जाएगा। बीच-बीच में जाकर चेकिंग भी होती रहेगी। सवाल- क्या इस ऐप से गोसेवा के लिए फंडिंग भी जुटाई जाएगी?
जवाब- बिल्कुल, फंड तो जुटाना ही पड़ेगा। लेकिन ये फंड ऐसा नहीं होगा कि हमें पैसा दे दो, हम रखेंगे। फंड ऐसा होगा कि जब एक गाय नजर में आ जाएगी तो उस गाय को दिखाकर बताया जाएगा कि ये गाय है। इतने की मिल रही है। अगर नहीं खरीदी गई, तो ये कटने के लिए चली जाएगी। तब कुछ लोग मिलकर गाय ले लेंगे। फिर वो चाहे तो अपने पास रखें, चाहे तो हमारे गऊ धाम में उसकी सेवा होगी। सवाल- गाय कितने में खरीदी जाएंगी, इसकी कीमत कैसे तय होगी?
जवाब- देखिए, जिसकी चीज होती है, उसे कीमत तय करने का अधिकार होता है। हम गाय के ‘खरीदार’ नहीं हैं। ‘खरीदना’ शब्द सिर्फ इसलिए कह रहे, क्योंकि ये प्रचलन में है। असल में गाय को खरीदने की हमारी कोई ताकत नहीं है। बेचने की भी किसी की हैसियत नहीं होनी चाहिए। इसलिए विचार ये होगा कि गाय अब से हमारे पास रहेगी, बदले में तुम कुछ नेग-न्योछावर ले लो। ———————– ये खबर भी पढ़ें- शंकराचार्य से मिलने पहुंचे अखिलेश, जमीन पर बैठे दिखे, लखनऊ में एक घंटे बातचीत की सपा मुखिया अखिलेश यादव ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से गुरुवार को मुलाकात की। एक घंटे तक बातचीत हुई। इस दौरान अखिलेश जमीन पर बैठे नजर आए। बाहर निकलने पर अखिलेश ने मीडियाकर्मियों से कहा- शंकराचार्य से मिलकर आ रहा हूं। उनके आशीर्वाद से अब नकली संतों का अंत होगा। अब वे लोग भी बेनकाब होंगे, जो धर्म के नाम पर लोगों को गुमराह करते हैं। सबका सच सामने आएगा। पढ़ें पूरी खबर