फरीदाबाद म्यूनिसिपल कारपोरेशन में लगभग 200 करोड़ रुपए के कथित घोटाले का मामला अब हरियाणा सरकार की सर्वोच्च निर्णय प्रक्रिया तक पहुंच गया है। इस मुद्दे को लेकर लगातार बढ़ते राजनीतिक दबाव और जनप्रतिनिधियों की आपत्तियों के बीच राज्य सरकार ने नगर निगम के पिछले 10 वर्षों के कार्यों की व्यापक जांच कराने का फैसला लिया है। हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में यह मामला प्रमुखता से उठा, जिसके बाद शहरी एवं स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल ने नगर निगम के एक दशक के दौरान कराए गए विकास कार्यों, ठेकों और भुगतान की जांच के निर्देश जारी कर दिए। दिशा बैठक में उठा था मामला यह मामला हाल ही में आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में जोर-शोर से उठाया गया था। बैठक में केंद्रीय मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर, विधायक मूलचंद शर्मा तथा धनदेश अधलखा ने नगर निगम में वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए विस्तृत जांच की मांग की थी। जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि कई विकास कार्यों में लागत बढ़ाकर भुगतान किए गए, कुछ कार्य कागजों में पूरे दिखाए गए, जबकि कई ठेकों में नियमों की अनदेखी की गई। 10 साल के रिकॉर्ड खंगाले जाएंगे शहरी एवं स्थानीय निकाय विभाग अब नगर निगम के पिछले 10 वर्षों के दौरान स्वीकृत परियोजनाओं, टेंडरों, ठेकेदारों को किए गए भुगतानों और कार्यों की गुणवत्ता की जांच करेगा। माना जा रहा है कि जांच के दायरे में सड़क निर्माण, सीवर, सफाई, स्ट्रीट लाइट, पार्क और अन्य विकास कार्य शामिल होंगे। यदि जांच में अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं, तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आपराधिक मुकदमे भी दर्ज किए जा सकते हैं। सीबीआई जांच की मांग इस मामले को लेकर कांग्रेस के पूर्व विधायक नीरज शर्मा भी लगातार सक्रिय हैं। उन्होंने कथित घोटाले की जांच सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन से कराने की मांग की है। उनका कहना है कि इतने बड़े वित्तीय घोटाले की निष्पक्ष जांच केवल केंद्रीय एजेंसी ही कर सकती है। कांग्रेस के पूर्व विधायक नीरज शर्मा ने निगम ऑफिस में हुए अग्निकांड को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ये हैरानी की बात है कि फाइलें सिर्फ 2018 तक ही जलीं। राजनीतिक सरगर्मी तेज 200 करोड़ रुपए के कथित घोटाले को लेकर फरीदाबाद की राजनीति गर्मा गई है। सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों द्वारा ही मामला उठाए जाने से प्रशासनिक तंत्र पर दबाव बढ़ गया है। वहीं विपक्ष इस मुद्दे को सरकार की जवाबदेही से जोड़ते हुए लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। जांच रिपोर्ट पर टिकी नजर अब सबकी निगाहें सरकार द्वारा कराई जाने वाली जांच पर टिकी हैं। यदि जांच में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ियां सामने आती हैं, तो यह मामला हरियाणा के सबसे चर्चित नगरीय घोटालों में शामिल हो सकता है। साथ ही कई अधिकारियों और ठेकेदारों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
हरियाणा कैबिनेट मीटिंग में गूंजा 200 करोड़ का घोटाला:मंत्री विपुल गोयल ने चर्चा के लिए रखा; बोले- इसकी जांच कराए सरकार
