गुजरात में प्रीपेड- पोस्टपेड का विकल्प, यूपी में प्रीपेड अनिवार्य:RDSS स्कीम पर सवाल, एक देश, एक योजना में अलग-अलग नियम क्यों?

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देश भर में रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) के तहत पुराने मीटरों को स्मार्ट मीटर में बदला जा रहा है। यूपी में इस स्कीम के तहत सिर्फ स्मार्ट प्रीपेड मीटर ही लगाए जा रहे हैं। जबकि गुजरात में उपभोक्ताओं को स्मार्ट प्रीपेड और पोस्टपेड—दोनों विकल्प दिए गए हैं। गुजरात में प्रीपेड मीटर चुनने पर 3% बिल में रिबेट मिल रही है, जबकि यूपी में यह छूट सिर्फ 2% है। इसी अंतर को लेकर अब सवाल खड़े हो रहे हैं। गुजरात में विकल्प, यूपी में अनिवार्यता उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने इस दोहरे रवैए पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा, “एक ही स्कीम के लिए विभिन्न राज्यों में अलग नियम क्यों लागू किए जा रहे हैं? उन्होंने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री के गृह प्रदेश गुजरात में विकल्प है, जबकि उनके संसदीय क्षेत्र वाले प्रदेश यूपी में स्मार्ट प्रीपेड मीटर अनिवार्य क्यों किए जा रहे हैं। परिषद ने यूपी में भी विकल्प देने की मांग की है। RDSS का ये है उद्देश्य RDSS योजना का मुख्य उद्देश्य देशभर में स्मार्ट मीटरिंग के जरिए आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है। इसके तहत राज्य की बिजली वितरण कंपनियां चरणबद्ध तरीके से पुराने मीटरों को स्मार्ट मीटर में बदल रही हैं। गुजरात में 1 अप्रैल 2026 से नई व्यवस्था गुजरात विद्युत नियामक आयोग ने 1 अप्रैल 2026 से लागू टैरिफ आदेश में स्पष्ट किया है कि उपभोक्ता स्मार्ट प्रीपेड और पोस्टपेड मीटर में से किसी एक का चयन कर सकते हैं। यदि उपभोक्ता प्रीपेड मीटर चुनता है, तो उसे 2% की जगह 3% रिबेट दी जाएगी। यूपी में 75 लाख मीटर बदले, सहमति नहीं ली यूपी पावर कॉरपोरेशन ने RDSS के तहत लगाए गए करीब 75 लाख स्मार्ट पोस्टपेड मीटरों को प्रीपेड में बदल दिया। आरोप है कि इसके लिए उपभोक्ताओं से सहमति तक नहीं ली गई। शिकायत करने वाले उपभोक्ताओं को यह कहकर गुमराह किया जा रहा है कि RDSS में प्रीपेड मीटर अनिवार्य हैं। कानून का उल्लंघन होने का आरोप उपभोक्ता परिषद का कहना है कि यह कदम सीधे विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 47(5) का उल्लंघन है। यह कानून उपभोक्ताओं को प्रीपेड और पोस्टपेड मीटर चुनने का अधिकार देता है। साथ ही बिना सहमति किसी भी मीटर की बिलिंग प्रणाली में बदलाव नहीं किया जा सकता। आयोग से याचिका पर जल्द फैसले की मांग राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने विद्युत नियामक आयोग के समक्ष लंबित याचिका पर शीघ्र निर्णय की मांग की है। परिषद ने आयोग को पत्र लिखकर कहा है कि उपभोक्ताओं को प्रीपेड और पोस्टपेड मीटर चुनने का अधिकार सुरक्षित किया जाए। साथ ही बिना सहमति पोस्टपेड मीटर को प्रीपेड में बदलने की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए।