ऑटो ड्राइवर ने राम मंदिर मैनेजमेंट में कैसे मारी एंट्री:चढ़ावा चोरी से सुर्खियों में आया टिन्नू; 28 साल पहले चंपत राय से जुड़ा

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टिन्नू यादव…अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के बाद देशभर में ये नाम सुर्खियों में है। कहने को टिन्नू ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के खास सहयोगी है। लेकिन, श्रीराम मंदिर ट्रस्ट में वो बहुत पावरफुल बताया जाता है। चाहे सिक्योरिटी का मैनेजमेंट हो या चढ़ावे को बैंक में डिपॉजिट कराना हो, टिन्नू ही सब कुछ मैनेज करता आया है। भले ही राम मंदिर ट्रस्ट ने अभी तक इस मामले में कोई FIR नहीं की है। लेकिन, सरकार ने जांच के लिए SIT बना दी है। हमारी इस खास स्टोरी में पढ़िए, एक वक्त पर ऑटो ड्राइवर रहे टिन्नू यादव कैसे रामजन्म भूमि परिसर में इतना अहम किरदार बन गया… पिता चाय बेचते थे, ड्राइवर टिन्नू कारसेवकपुरम आने लगा विहिप से जुड़े एक पदाधिकारी बताते हैं- टिन्नू का पूरा नाम राम शंकर यादव है। उसके पिता अयोध्या के नया घाट पर चाय बेचा करते थे। टिन्नू की कहानी साल 1994-95 में शुरू हुई। तब वो अयोध्या की सड़कों पर टेंपो चलाता था। अचानक श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के मंत्री महेश नारायण के संपर्क में आया। उन्होंने अपनी कार चलाने के लिए टिन्नू को ड्राइवर रख लिया। अब वो महेश नारायण के साथ कारसेवकपुरम आने-जाने लगा। महेश के निधन के बाद चंपत राय के लिए काम करने लगा टिन्नू कारसेवकपुरम में लोगों से अच्छा व्यवहार रख रहा था। मेहनती था। साल 1991 में चंपत राय को क्षेत्रीय संगठन मंत्री बनाकर अयोध्या भेजा गया। 1996 में विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री बनाए गए। साल 2002 में संयुक्त महामंत्री और फिर अंतरराष्ट्रीय महामंत्री बनाए गए। 1998 में टिन्नू यादव चंपत राय के संपर्क में आया। 31 मई, 2002 में महेश नारायण का निधन हो गया, तब चंपत राय की मदद से टिन्नू कारसेवकपुरम में अलग-अलग गाड़ियां चलाने लगा। जीप से लेकर मालवाहक वाहन तक। यहीं से वह चंपत राय के विश्वस्त लोगों में शामिल हो गया। मंदिर निर्माण के दौरान ट्रस्ट से जुड़ा, फिर ताकत बढ़ती गई 2019 में श्रीराम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद जब मंदिर निर्माण शुरू हुआ, तब टिन्नू ट्रस्ट की ओर से कामकाज संभालने लगा। ट्रस्ट ने उसे आंतरिक वेतनभोगी कार्यकर्ता के रूप में रखा था। सूत्रों के अनुसार, उसे हर महीने करीब 16 हजार रुपए मिलते थे। हालांकि, वेतन से ज्यादा महत्वपूर्ण ओहदा उसे मंदिर परिसर में मिला हुआ है। मंदिर की सुरक्षा और प्रबंधन से जुड़े लोगों को वॉकी-टॉकी दी गई है। टिन्नू को भी वॉकी-टॉकी उपलब्ध कराई गई है। मंदिर परिसर का मैनपावर मैनेजमेंट मुख्य रूप से टिन्नू ही संभालता रहा। ट्रस्ट के अलग-अलग पदाधिकारियों से बात करके समझ आया कि महासचिव चंपत राय का सबसे भरोसेमंद व्यक्ति रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू ही है। पूर्व लेखा प्रभारी बोले- दान पेटियों का चढ़ावा टिन्नू ही बैंक में जमा कराता था मंदिर परिसर में 14 दानपेटियां रखी गई हैं। रोजाना मंदिर में 1 करोड़ से ज्यादा का चढ़ावा आता है। इसके अलावा बड़ी मात्रा में सोने-चांदी और हीरे के जेवर भी भक्त दानपेटी में डालते हैं। इसमें आने वाले चढ़ावे की रकम को बंद कमरे में गिना जाता है। यह काम CCTV की निगरानी में ट्रस्ट के 6 पदाधिकारी, बैंक और TCS से जुड़े कुल 9 लोग करते हैं। राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह कहते हैं- गिनती के बाद यह रकम रामजन्मभूमि परिसर के लॉकर में रखी जाती थी। अगले दिन टिन्नू इस धनराशि को बैंक में जमा कराने लेकर जाता था। सबसे अहम यह था कि सोने-चांदी के जेवरों को तौले बिना सिर्फ अनुमान के आधार पर रखा जाता था। महिपाल का दावा है- कि उन्होंने दान में आए जेवरों की फोटो खींचकर टिन्नू को चंपत राय को भेजते देखा था। इन जेवरों के बैंक में जमा होने का कोई रिकॉर्ड नहीं है। जबकि टिन्नू का दावा है कि सारे जेवर समेत रुपए बैंक में जमा किए जाते रहे हैं। पूर्व लेखा प्रभारी के आरोप- 8 महीने की CCTV डिलीट कराई महिपाल सिंह बताते हैं- 2021 में जब मैं रामजन्मभूमि परिसर में रहता था, तब एक दिन नोट गिन रहे कर्मचारियों की हेरा-फेरी पकड़ ली गई। वे लोग 10 की जगह 12 गड्डी पैक कर रहे थे। तब मैंने चंपत राय से शिकायत की। दो लोगों की ड्यूटी और लगा दी गई। बाद में मुझे गिनती के काम से हटा दिया गया। आरोप है कि कुछ दिन बाद टिन्नू एक प्राइवेट कर्मचारी के साथ आए और CCTV रिकॉर्डिंग डिलीट करा दी। ये करीब 8 महीने की रिकॉर्डिंग थी। इसके कुछ दिन बाद महिपाल ने नौकरी छोड़ दी। बताया जाता है कि पूरे कार्यकाल में महिपाल ने ट्रस्ट से कोई पारिश्रमिक (मेहनताना) नहीं लिया था। राम मंदिर से सिर्फ 1.5 किमी दूर टिन्नू का पुश्तैनी घर टिन्नू यादव का किरदार समझने के बाद हमने उससे बात का प्रयास किया। टिन्नू का पुश्तैनी घर तुलसी पार्क के पीछे स्वर्गद्वारी मोहल्ले में है। यह जगह राम मंदिर से सिर्फ 1.5 किमी दूर है। सामने से यह घर करीब 7 फीट चौड़ा है। 3 मंजिला मकान में टिन्नू के भाई मिले। बातचीत में पता चला कि टिन्नू करीब 55 साल का है। उसकी 2 संतानों में से एक बेटी का 8 साल पहले निधन हो चुका है। इकलौता बेटा रवि यादव PWD में संविदा पर जॉब करता है। भाई से टिन्नू का मोबाइल नंबर मिला। फोन करने पर पता चला कि वह श्रीराम मंदिर परिसर के ट्रस्ट कार्यालय में है। उसने वहीं मिलने के लिए बुलाया। ट्रस्ट कार्यालय में नया लॉकर लगवाया श्रीराम मंदिर पहुंचने पर टिन्नू के बताए ट्रस्ट कार्यालय पर हमारी टीम पहुंची। यहां एक कमरे में तोड़-फोड़ चल रही थी। अंदर से ईंट के टुकड़ों की सफाई हो रही थी। उसी कमरे में एक कुर्सी पर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय बैठे थे। वहीं पर टिन्नू, संघ के पूर्व प्रांत प्रचारक भोलेंद्र और अन्य कर्मचारी खड़े थे। कमरे में एक नया लॉकर भी लगाया गया था। शायद अब दानपेटियों से निकलने वाला कैश और धातु (सोने-चांदी, हीरे-जेवर) इसी लॉकर में रखे जाने की व्यवस्था की जा रही थी। भास्कर टीम को देखते ही बाहर निकाला ट्रस्ट कर्मचारियों ने भास्कर टीम को ज्यादा देर रुकने नहीं दिया। पूछताछ शुरू कर दी। पहचान बताने पर पूछा गया कि यहां कैसे पहुंचे? टिन्नू का नाम लेते ही भोलेंद्र हमें बाहर ले आए। उन्होंने कहा कि टिन्नू यहां नहीं है, सीता रसोई की तरफ गया है। हमारे साथी ने टोका भी कि आप हमें बहला रहे हैं, यह निकालने का अच्छा तरीका है। (इस पर भोलेंद्र मुस्कराते रहे।) हमने कहा कि टिन्नू तो अंदर ही मौजूद था, सीता रसोई के पास कहां से मिलेगा? बहरहाल, उन्होंने हमें सीता रसोई के पास छोड़ दिया। हमने टिन्नू को फोन किया, लेकिन उसने कॉल नहीं उठाया। टिन्नू के मकान में 14 कमरे, सब किराये पर उठे इसके बाद हम टिन्नू के नए लग्जरी मकान की तलाश में नाका इलाके में पहुंचे। कोचिंग सेंटर के पास उसका नया 2 मंजिला मकान मिला, जो काफी शानदार दिख रहा था। इस मकान के बाहर एक स्टूडेंट मिल गया। उसने बताया- इस मकान में ग्राउंड फ्लोर पर 9 कमरे हैं। पहली मंजिल पर 5 कमरे हैं। नीचे लड़के और ऊपर लड़कियां रहकर पढ़ाई करती हैं। हर कमरे का किराया 2700 रुपए लिया जाता है। हमने कमरे के हिसाब से कैलकुलेट किया, तो करीब 37 हजार रुपए हर महीने किराया आ रहा था। यह मकान 1500 वर्गफीट जगह में बना हुआ है। ये मकान जिस लोकेशन पर बना था, वहां जमीन का रेट 2500-3000 रुपए प्रति वर्गफीट का है। मोहल्ले के युवक बोले- मंदिर से जुड़ने के बाद तरक्की की यहां रहने वाले लोगों ने बताया कि 5 महीने पहले इस मकान में टिन्नू ने अपने बेटे की भव्य शादी की थी। पूरे मोहल्ले और परिचितों को बुलाया। शादी में खूब खर्च किया था। मोहल्ले के एक युवक ने बताया- टिन्नू चाचा जब से मंदिर से जुड़े, तब से काफी तरक्की कर ली है। उनका निषाद राज चौराहे के पास एक हॉस्टल भी है। चर्चा यह भी है कि बस्ती जिले के विक्रमजोत इलाके में इन्होंने 20 से 22 बीघा खेती की जमीन खरीद रखी है। लखनऊ में एक घर है, वहां पर स्कॉर्पियो रहती है। यहां रामजन्म भूमि परिसर में 3 गाड़ियां अनुबंध पर चलती हैं। उसका किराया आता है। अब पढ़िए टिन्नू की बात टिन्नू ने दैनिक भास्कर से मोबाइल पर बात की। उन्होंने हमारे कई सवालों के जवाब दिए। इन्हें पढ़िए…

सवाल- राम मंदिर की दानपेटियों में आने वाले चढ़ावे की चोरी के आरोप लग रहे?
टिन्नू- सिर्फ बदनाम करने के लिए कहानी बनाई जा रही है। अगर किसी के पास कोई साक्ष्य है तो पेश करे। दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। सवाल- आरोप है कि पिछले कुछ सालों में आपकी खुद की संपत्तियां करोड़ों रुपए की हो गईं?
टिन्नू- कोई सबूत भी देना चाहिए। सब कुछ ऑनलाइन है, आप देख लो। मेरा और मेरे बेटे का…। सवाल- यह भी आरोप है कि बैंक के 2 कर्मचारियों को आपने अपॉइंट करवाया था?
टिन्नू- ये गलत है। सवाल- सब कहते हैं कि आप यहां पावरफुल हैं?
टिन्नू- नहीं, नहीं… यहां डॉ. अनिल हैं, चंपत राय हैं, गोपालजी हैं। वो इंचार्ज हैं। मैं कर्मचारी हूं। यहां किसी की नहीं, सिर्फ रामजी की चलती है। सवाल- कहा गया कि आपने 8 महीने पहले CCTV डिलीट करवाए थे?
टिन्नू- सब झूठ है। ऐसी किसी के पास पावर नहीं है। वो डॉ. अनिल और चंपत राय से पूछ लें। आप आइए, हम आपको फुटेज दिखाते हैं। (हालांकि परिसर पहुंचने पर टिन्नू सामने नहीं आया।) —————————- ये खबरें भी पढ़िए- राम मंदिर ट्रस्ट ने योगी से कहा-SIT गठित करें, चढ़ावा गिनने वाले कर्मचारी के घर से 10 लाख मिले, गोबर में दबाए था अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे के 7 करोड़ रुपए की चोरी के दावे का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, मंदिर ट्रस्ट ने शनिवार को सीएम योगी से चोरी के दावे की जांच SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) से कराने की मांग की है। इधर, मंदिर के कर्मचारी लवकुश मिश्रा (27) के घर से 10 लाख रुपए बरामद हुए हैं। उसने पैसे गोबर में दबाकर छिपाए थे। हालांकि, ये रुपए किसके हैं? इसके बारे में जानकारी नहीं मिल पाई है। पढ़िए पूरी खबर… ‘राम मंदिर ट्रस्ट में धर्माचार्य रहते तो गड़बड़ी नहीं होती’, शंकराचार्य बोले- चंपत राय ईमानदार नहीं, दान का एक-एक पैसा भगवान का ‘राम मंदिर के दान पर सबसे ज्यादा सवाल उठने चाहिए। दान का एक-एक पैसा भगवान का पैसा होता है। सनातन धर्म में देवस्व (चढ़ावा) को अत्यंत पवित्र माना गया है। अगर उस पैसे के उपयोग को लेकर सवाल हैं, तो जवाब भी होना चाहिए और जांच भी होनी चाहिए। चंपत राय ईमानदार नहीं हैं। पहले से एक ट्रस्ट मौजूद था, जिसमें चार शंकराचार्य, पांच वैष्णवाचार्य और 13 अखाड़ों के प्रमुख थे। जब वह ट्रस्ट था, तो नया ट्रस्ट बनाने की क्या जरूरत थी? अगर शंकराचार्य और धर्माचार्य ट्रस्ट में रहते, तो कोई गड़बड़ी नहीं कर पाता।’ पढ़िए पूरी खबर.…