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फ्रीडम फाइटर कोटे से बने सभी डॉक्टरों की जांच; 3 राज्यों में दबिश, और गिरफ्तारियां होंगी

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे के फर्जी प्रमाण पत्र से एमबीबीएस में दाखिला दिलाने वाले गिरोह की तह तक जाने के लिए एसआईटी की अलग-अलग टीमों ने दिल्ली, मेरठ और मुजफ्फरनगर में दबिश दी है। पुलिस की एक टीम मुजफ्फरनगर निवासी उस छात्रा और उसके पिता को पूछताछ के लिए देहरादून ले आई है। जिसने फर्जीवाड़े के जरिए सरकारी कॉलेज में दाखिला लिया था।एसआईटी ने दून में पिता-पुत्री से घंटों तक सघन पूछताछ की। इन्हें जल्द तथ्य जुटाकर गिरफ्तार किया जा सकता है। जांच टीम यह जानने का प्रयास कर रही है कि राजधानी के तहसील प्रशासन में किस अधिकारी या कर्मचारी के स्तर से प्रमाण पत्र जारी कराने की मजबूत सेटिंग की गई थी। हाल ही में गिरफ्तार किए गए गिरोह के सरगना बिहार निवासी रूपेश पंडित ने भी पूछताछ में कई अहम राज उगले हैं। रूपेश ने गैंग में सक्रिय भूमिका निभाने वाले चार अन्य लोगों के नामों का खुलासा किया है। एसआईटी इंचार्ज जया बलोनी ने बताया कि गुरुवार या शुक्रवार तक मामले में दो से चार नई गिरफ्तारियां हो सकती हैं। वहीं, 60 लाख की रकम में से 10 लाख रुपये की रिकवरी होने की भी उम्मीद है। पुलिस के सक्रिय होने के बाद आरोपी मिटा रहे डिजिटल डाटाअंकित कुमार चौधरी, देहरादून: एमबीबीएस दाखिले के फर्जीवाड़े का खुलासा होते ही गिरोह के सदस्य पुलिस से बचने के लिए सतर्क हो गए हैं। जांच में सामने आया है कि गैंग के मास्टरमाइंड और अन्य सदस्यों ने अपने डिजिटल फुटप्रिंट मिटाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। पुलिस की रडार से बचने के लिए गिरोह के सदस्य मोबाइल नेटवर्क के बजाय केवल इंटरनेट कॉलिंग का इस्तेमाल कर रहे थे।एसआईटी जांच में यह तथ्य पुख्ता हुआ है कि दाखिले के लिए गैंग संचालकों और छात्रों या उनके परिजनों के बीच बातचीत सिर्फ व्हाट्सएप कॉल के जरिए ही होती थी। जैसे ही फर्जीवाड़े की एफआईआर दर्ज हुई और मामला सुर्खियों में आया, इसे लेकर गिरोह पहले से ही सक्रिय हो गया था। कई आरोपियों ने पुलिस के पहुंचने से पहले ही अपने मोबाइल से व्हाट्सएप का पूरा डाटा, चैट हिस्ट्री और कॉल लॉग्स डिलीट कर दिए हैं।मामला सिर्फ डाटा डिलीट करने तक सीमित नहीं है, बल्कि कुछ शातिर आरोपियों के अपने मोबाइल फोन तक बदलने की बात भी सामने आई है। सुबूत नष्ट करने की इस कोशिश ने एसआईटी के लिए जांच को थोड़ा चुनौतीपूर्ण बना दिया है। हालांकि, एसआईटी अब साइबर एक्सपर्ट की मदद से तकनीकी पहलुओं की गहनता से पड़ताल कर रही है। डिलीट किए गए डाटा को रिकवर करने और आरोपियों की डिजिटल लोकेशन को ट्रेस करने के लिए पुलिस आधुनिक सॉफ्टवेयर और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (सीडीआर) का सहारा ले रही है। इसके आधार पर पुलिस जल्द ही आरोपियों तक पहुंच सकती है।फ्रीडम फाइटर कोटे से बने सभी डॉक्टरों की होगी जांचफर्जी फ्रीडम फाइटर प्रमाण पत्र से एमबीबीएस एडमिशन के मामले सामने आने के बाद सरकार ने पिछले सालों में इस कोटे के तहत हुए एडमिशन की भी जांच कराने का निर्णय लिया है। चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल ने विभागीय सचिव को इसके निर्देश दिए हैं।सरकार के इस फैसले के बाद अब राज्य में फ्रीडम फाइटर सार्टिफिकेट के आधार पर एमबीबीएस करने वाले डॉक्टर भी जांच के दायरे में आ गए हैं। विदित है कि राज्य में फ्रीडम फाइटर श्रेणी में दो प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण मिलता है और इसके तहत हर साल कॉलेजों में एमबीबीएस में प्रवेश दिए जाते हैं। राज्य में हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज 2005 में शुरू हुआ था। जबकि 2008 में श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई शुरू हुई। इसके बाद दून, अल्मोड़ा और हरिद्वार में भी पढ़ाई शुरू हो चुकी है। जबकि इस साल पिथौरागढ़ में भी प्रवेश दिए जाने हैं।तीन पीढ़ियों तक मिलता है आरक्षण का लाभफ्रीडम फाइटर कोटे का लाभ स्वतंत्रता संग्रमा सेनानी की तीन पीढ़ियों तक मिलता है। राज्य सरकार के नियमों के अनुसार स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, उनके पुत्र, पुत्री और नाती नातिन को ही इस श्रेणी में आरक्षण की सुविधा मिलती है। शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि फ्रीडम फाइटर प्रमाण पत्र में मिली खामियों के बाद इस कोटे में पिछले सत्रों में दिए गए सभी एडमिशन की भी जांच के निर्देश दिए गए हैं। प्रमाणपत्रों की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है। यदि किसी का प्रमाण पत्र गलत पाया जाता है तो निश्चित तौर पर कार्रवाई की जाएगी।