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'हॉस्टल लौटने पर प्रेग्नेंसी टेस्ट अपमानजनक', आदिवासी छात्रों के समर्थन में राहुल गांधी ने CM फडणवीस को लिखा पत्र

INT News24 August 2026 at 10:46 pm

राहुल गांधी ने एक्स पर लेटर की कॉपी शेयर की है, जिसमें लिखा, "महाराष्ट्र के कई आदिवासी छात्र अपने अधिकारों की मांग को लेकर 10 दिनों से ज्यादा समय से भूख हड़ताल पर हैं. पुणे में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के दौरान, छात्राओं ने बताया कि हॉस्टल में 30 साल की अनावश्यक उम्र सीमा, अपमानजनक नियम, असुरक्षित सुविधाएं और महिलाओं के लिए प्रेग्नेंसी टेस्ट जैसे अमानवीय नियम लागू हैं. दूर-दराज के गांवों और कस्बों से आए ये छात्र कोई खैरात नहीं मांग रहे हैं—वे अपने जायज हक की मांग कर रहे हैं. उम्मीद है कि आप उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलेंगे और उनकी समस्याओं का तुरंत समाधान करेंगे."

राहुल गांधी के पत्र की मुख्य बातें?

30 वर्ष की आयु सीमा का नियम: राहुल गांधी ने उल्लेख किया है कि सरकारी छात्रावासों में प्रवेश के लिए 30 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा का नया नियम उन आदिवासी छात्रों को अपनी शिक्षा पूरी करने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने से वंचित कर रहा है, जो दूर-दराज के गांवों से शहर आते हैं.

छात्रावासों की बदहाल और असुरक्षित स्थिति: छात्रावासों में भोजन, स्वच्छता और चिकित्सा सुविधाओं की भारी कमी है. छात्रों को सांप के काटने (Snake bites) जैसी घटनाओं और चोटों का सामना करना पड़ा है.

महिला छात्रों के सम्मान से खिलवाड़: लंबी अनुपस्थिति के बाद लौटने वाली छात्राओं के लिए प्रेग्नेंसी टेस्ट (Pregnancy test) और अन्य मेडिकल टेस्ट अनिवार्य किए जाने वाले नियम को राहुल गांधी ने छात्रों की गरिमा, स्वाभिमान और मानवीय अधिकारों पर सीधा हमला बताया है.

मुख्यमंत्री से मांग: राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि वे प्रदर्शनकारी आदिवासी छात्रों के प्रतिनिधियों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करें, उनकी समस्याओं को सुनें और उनका तुरंत समाधान करें.

राहुल गांधी ने रखी मांगें

शासनादेश (GR) और आयु सीमा: 5 और 14 अगस्त 2026 के GR को रद्द किया जाए, 2011 के GR को संशोधित किया जाए, तथा छात्रावास में प्रवेश की आयु सीमा को हटाकर या 30 से बढ़ाकर 36 वर्ष किया जाए.

मुआवजा नीति: छात्रावास या आश्रम स्कूल में छात्र की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु पर ₹1 करोड़, स्थाई विकलांगता पर ₹50 लाख और गंभीर चोट लगने पर ₹25 लाख का मुआवजा निर्धारित किया जाए.

फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर कार्रवाई: फर्जी प्रमाण पत्र से नौकरी पाने वालों पर सख्त कानूनी और आपराधिक कार्रवाई हो तथा 95,000 आरक्षित पदों की सुरक्षा करते हुए 12,500 लंबित रिक्तियों को तुरंत भरा जाए.

DBT व्यवस्था की समाप्ति: DBT (Direct Benefit Transfer) भोजन व्यवस्था को समाप्त कर छात्रावासों में सीधे पौष्टिक और स्वच्छ भोजन (Direct meal system) की व्यवस्था की जाए.

एंटी-स्नेक वेनम (Anti-Snake Venom): सभी आश्रम शालाओं और सरकारी हॉस्टलों में पर्याप्त मात्रा में सर्पदंश-रोधी दवा (ASV) और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं.

PESA भर्ती कर्मचारियों की बहाली: PESA प्रक्रिया से भर्ती होकर हटाए गए कर्मचारियों को सेवा में पुनः बहाल किया जाए.

आदिवासी एवरेस्ट विजेताओं का सम्मान: महाराष्ट्र के आदिवासी एवरेस्ट विजेताओं को विशेष नीति के तहत सरकारी नौकरी और वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाए.

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