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प्रशासन बोला-नकटी गांव में सरकारी जमीन से हटाया गया अतिक्रमण:कहा- सब कुछ नियम से हुआ, करोड़ों की शासकीय जमीन पर था कब्जा
नवा रायपुर के नकटी गांव में शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर चर्चा जरूर है। लेकिन इस पूरे मामले का दूसरा पहलू भी है। वहीं, प्रशासन का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया नियमों और लंबे समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है। जानकारी के मुताबिक, यह कार्रवाई अचानक नहीं की गई। पिछले करीब दो साल से कब्जाधारियों को नोटिस दिए जा रहे थे और जमीन खाली करने का समय भी दिया गया था। इसके बावजूद कई लोगों ने सरकारी जमीन पर कब्जा बनाए रखा। प्रशासन की सूची के अनुसार, कई लोगों ने छोटी नहीं बल्कि बड़ी मात्रा में जमीन पर कब्जा किया था। इनमें कुछ मामलों में हजारों से लेकर 29,700 वर्गफुट तक जमीन शामिल है। इस इलाके में जमीन का बाजार मूल्य करीब 5,000 रुपए प्रति वर्गफुट बताया जाता है, यानी कई जगहों पर करोड़ों रुपए की सरकारी जमीन पर कब्जा रहा। यह भी बताया गया है कि यह जमीन सामान्य आवासीय नहीं बल्कि शासकीय गौचर और सार्वजनिक उपयोग की भूमि है, जहां नियम के अनुसार स्कूल, अस्पताल या अन्य सार्वजनिक सुविधाएं बन सकती हैं। प्रशासन का कहना है कि हटाए गए कई परिवारों को नवा रायपुर के सेक्टर-30 में आवास भी उपलब्ध कराया गया है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना से प्रभावित परिवारों के लिए भी पुनर्वास की व्यवस्था की गई है। इस कार्रवाई को लेकर प्रशासनिक स्तर पर यह स्पष्ट किया गया है कि शासकीय भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा नियमों के खिलाफ है, चाहे वह किसी भी वर्ग या स्थिति के व्यक्ति द्वारा किया गया हो। कानून सभी के लिए समान है और इसी आधार पर कार्रवाई की गई है। जानकारों का मानना है कि यदि सरकारी भूमि पर अतिक्रमण को नजरअंदाज किया जाए तो भविष्य में विकास योजनाओं और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए जमीन की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। इस पूरे मामले में प्रशासन का पक्ष यही है कि कार्रवाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि शासकीय संपत्ति की सुरक्षा और नियमानुसार उपयोग सुनिश्चित करने के लिए की गई है।