Saturday, 26 September 2026
INTइंडियन न्यूज़ ट्रस्टजहाँ सत्य मिले विश्वास से
ताज़ा खबरें

समाचार · बिहार

कम उम्र में शादी, दो बच्चों की जिम्मेदारी... फिर भी नहीं छोड़ी पढ़ाई, एक महीने के बच्चे को गोद में लेकर दी परीक्षा

INT News25 September 2026 at 08:39 pm

Kajal Kumari Success Story जमुई के सुदूर गांवों में बेटियों का स्कूल-कॉलेज तक पहुंचना आज भी कई परिवारों के लिए बड़ी उपलब्धि है. ऐसे में जब कोई लड़की शादी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच छूटी पढ़ाई दोबारा शुरू करती है, तो यह सिर्फ उसके व्यक्तिगत संघर्ष की कहानी नहीं होती, बल्कि बदलते सामाजिक सोच की तस्वीर भी दिखाती है. जमुई जिले के केनडीह गांव की 19 वर्षीय काजल कुमारी की कहानी कुछ ऐसी ही है. कम उम्र में शादी, दो बच्चों की जिम्मेदारी और आर्थिक परेशानियों के बीच काजल की पढ़ाई छूट गयी थी. लेकिन पढ़ने की इच्छा मन में बनी रही. परिस्थितियां बदलीं, तो उन्होंने दोबारा पढ़ाई शुरू की. एक महीने के बच्चे को गोद में लेकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचीं और अपनी माध्यमिक शिक्षा पूरी करने का सपना पूरा किया.

आर्थिक परेशानी के कारण छूट गयी थी पढ़ाई

काजल की पढ़ाई शुरू से ही नियमित नहीं रही. आर्थिक परेशानियों के कारण उन्हें कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा. दसवीं की परीक्षा में अपेक्षित अंक नहीं आने के कारण वह सफल नहीं हो सकीं. इसके बाद कम उम्र में ही उनकी शादी हो गयी. शादी के बाद घर-परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ती गयीं और पढ़ाई पीछे छूट गयी. महज 19 साल की उम्र में काजल दो बच्चों की मां बन चुकी थीं. इसके बावजूद पढ़ाई पूरी करने की इच्छा उनके मन में बनी रही.

बिहार से जुड़ी अन्य ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें..

मायके लौटीं तो मिला पढ़ाई दोबारा शुरू करने का मौका

काजल जब अपने ससुराल से जमुई स्थित मायके आयीं, उसी दौरान जिले में एजुकेट गर्ल्स के प्रगति प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई. शिक्षार्थियों की पहचान के दौरान काजल से संपर्क हुआ. उन्हें पढ़ाई दोबारा शुरू करने के लिए मार्गदर्शन और सहयोग मिला. प्रगति प्रोजेक्ट 15 से 29 वर्ष की उन किशोरियों और युवतियों को शिक्षा का दूसरा अवसर देने की पहल है, जिनकी पढ़ाई किसी कारण से बीच में छूट गयी है या जो कभी स्कूल नहीं जा सकीं. काजल के लिए यह मौका वर्षों से अधूरे पड़े सपने को फिर से पूरा करने जैसा था. उन्होंने पढ़ाई शुरू की और माध्यमिक शिक्षा पूरी करने का फैसला किया.

गर्भावस्था के दौरान भी जारी रखी पढ़ाई

पढ़ाई दोबारा शुरू करने के बाद भी काजल की राह आसान नहीं थी. गर्भावस्था के अंतिम महीनों में वह नियमित रूप से कैंप नहीं जा पाती थीं. ऐसे में उन्होंने घर पर रहकर पढ़ाई जारी रखी. बच्चे के जन्म के समय परीक्षा में करीब एक महीने का समय बचा था. एक ओर नवजात बच्चे की जिम्मेदारी थी, तो दूसरी ओर वर्षों बाद मिला शिक्षा का अवसर। काजल ने हार नहीं मानी और परीक्षा देने का निर्णय लिया.

चादर में बच्चे को लपेटकर मुंगेर पहुंचीं

परीक्षा के दिन काजल अपने करीब एक महीने के बच्चे को चादर में लपेटकर गोद में उठायीं और परीक्षा देने के लिए मुंगेर रवाना हो गयीं. ठंड, लंबा सफर और नवजात बच्चे की जिम्मेदारी के बावजूद उन्होंने परीक्षा केंद्र तक पहुंचकर पेपर दिया. काजल के लिए यह सिर्फ एक परीक्षा नहीं थी. यह उस सपने को पूरा करने की कोशिश थी, जो शादी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच कहीं पीछे छूट गया था.

अच्छे अंकों से पास कर पूरा किया अधूरा सपना

बिहार बोर्ड ऑफ ओपन स्कूलिंग एंड एग्जामिनेशन (BBOSE) के माध्यम से काजल को माध्यमिक शिक्षा पूरी करने का अवसर मिला. उन्होंने इस मौके को हाथ से नहीं जाने दिया और परीक्षा पूरी की. अच्छे अंकों के साथ परीक्षा पास कर उन्होंने साबित किया कि पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती और परिस्थितियां चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण हों, इच्छाशक्ति के साथ आगे बढ़ने का रास्ता निकाला जा सकता है. काजल की कहानी उन ग्रामीण बेटियों और युवतियों के लिए भी एक मिसाल है, जिनकी पढ़ाई पारिवारिक, आर्थिक या सामाजिक परिस्थितियों के कारण बीच में छूट गयी. एक महीने के बच्चे को गोद में लेकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचने से लेकर माध्यमिक शिक्षा पूरी करने तक का उनका सफर बताता है कि मौका मिले, तो अधूरे सपनों को फिर से पूरा किया जा सकता है.

Also Read  7 राज्यों के 10 स्कूल बदले, फिर भी नहीं डिगा हौसला, तीसरे प्रयास में UPSC में हासिल की 54वीं रैंक; जानें IAS कशिश बख्शी की कहानी