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मालवा में पहली बार सनफ्लॉवर की फसल:युवा किसान का खेत बना सेल्फी पॉइंट, पीले फूलों से 150 बीघा जमीन दमकी
उज्जैन के लालपुर क्षेत्र में पहली बार ऑर्गेनिक सूरजमुखी (सनफ्लावर) की खेती की गई है। युवा किसान ऋषभ पंड्या और उनकी टीम ने करीब 150 बीघा जमीन पर इसकी फसल लगाई है। सूरजमुखी के पीले फूलों से खेत आकर्षण का केंद्र बन गया है और लोग यहां फोटो खिंचवाने पहुंच रहे हैं। दूर-दूर से देखने आ रहे किसान ऋषभ के मुताबिक, सूरजमुखी की फसल अभी खेत में लहलहा रही है। इसकी खेती को समझने और देखने के लिए दूर-दूर से किसान उनके पास आने लगे हैं। सूरजमुखी के फूल लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। वहीं, इसकी खेती की सफलता से उज्जैन जिले और पूरे मालवा संभाग के किसानों के लिए नई संभावना बनी है। सोयाबीन का विकल्प बन सकती है ऋषभ ने बताया कि मालवा के किसान लंबे समय से सोयाबीन समेत पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहे हैं। ऐसे में सूरजमुखी भविष्य में सोयाबीन के विकल्प के तौर पर उभर सकती है। सूरजमुखी के बीजों से सनफ्लावर ऑयल निकाला जाता है, जिसकी बाजार में मांग है। ऋषभ के मुताबिक, खेत में फूल आने के बाद कई कंपनियों ने उपज खरीदने के लिए उनसे संपर्क करना शुरू किया है। यूक्रेन युद्ध के बाद बढ़ी मांग मालवा में गेहूं, सोयाबीन, चना, मक्का और दूसरी फसलों की खेती प्रमुख रूप से होती है। पिछले कुछ वर्षों में किसानों का ध्यान ऐसी फसलों की ओर भी बढ़ा है, जिनकी बाजार में मांग हो और आमदनी के नए अवसर मिल सकें। सूरजमुखी प्रमुख तिलहनी फसल है। इसके बीज और तेल दोनों की बाजार में मांग रहती है। लालपुर में बड़े स्तर पर इसकी खेती ने किसानों के सामने एक नई संभावना रखी है। भारत में पहले यूक्रेन से बड़ी मात्रा में सूरजमुखी आयात किया जाता था। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भारत में इसकी मांग बढ़ गई। अभी तक पंजाब और उत्तराखंड में इसकी खेती की जाती थी। सूरजमुखी की फसल करीब 90 से 100 दिन में तैयार हो जाती है। एक बीघा में करीब डेढ़ किलो बीज लगता है। एक किलो बीज की कीमत 2500 से 3000 रुपए के बीच है। ऑर्गेनिक तरीके से की खेती लालपुर में सूरजमुखी की खेती ऑर्गेनिक पद्धति से की गई है। खेती में फसल की गुणवत्ता और उत्पादन को लेकर अच्छे परिणाम सामने आए हैं। सूरजमुखी के बड़े पीले फूल लोगों के आकर्षण का केंद्र हैं। इसके बीजों से खाद्य तेल के अलावा कई दूसरे खाद्य उत्पाद भी तैयार किए जाते हैं। बीजों से बनते हैं कई उत्पाद सूरजमुखी के बीजों से मुख्य रूप से खाद्य तेल तैयार किया जाता है। इसका इस्तेमाल घरों के साथ खाद्य उद्योग में भी होता है। बीजों को भूनकर सीधे खाया जाता है। इन्हें सलाद, बेकरी और दूसरे खाद्य पदार्थों में भी इस्तेमाल किया जाता है। इनके अलावा पैक्ड सीड्स और दूसरे वैल्यू एडेड फूड प्रोडक्ट्स भी तैयार किए जा सकते हैं। किसान ने बताया प्रयोग का अनुभव युवा किसान ऋषभ पंड्या ने बताया कि लालपुर में ऑर्गेनिक सूरजमुखी की खेती एक नए प्रयोग के तौर पर शुरू की गई थी। इसके नतीजे काफी अच्छे रहे हैं। फसल की गुणवत्ता और उत्पादन को देखकर उम्मीद बढ़ी है कि आने वाले समय में उज्जैन और मालवा संभाग के किसान भी सूरजमुखी की खेती को एक विकल्प के तौर पर अपना सकते हैं।