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झारखंड में ओवरस्पीडिंग लील रही लोगों की जान, NCRB की रिपोर्ट में पहले ही दी गई थीं चेतावनियां

INT News25 September 2026 at 07:32 pm

Jharkhand Road Accident: झारखंड की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की छोटी बेटी तृषा सिंह की गुरुवार तड़के जमशेदपुर के सड़क हादसे में हुई मौत ने सबके रोंगटे खड़े कर दिए हैं. न केवल दीपिका पांडेय सिंह के संबंधी और नजदीकी लोग ही शोक संतप्त हैं, बल्कि सूबे के तमाम लोग मायूस और गमगीन है. इस सड़क हादसे की मीडिया की पड़ताली रिपोर्ट में हादसे के पीछे अहम वजह ओवरस्पीडिंग बताई जा रही है. यह कोई नया मामला नहीं है, जब झारखंड में ओवरस्पीडिंग की वजह से किसी की जान गई है. इससे पहले भी ओवर स्पीडिंग की वजह से कई लोगों ने अपनी जान गंवा दी है. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ओर से मई 2026 में जारी की गई रिपोर्ट में कई खुलासे किए गए थे. बावजूद इसके झारखंड में ओवरस्पीडिंग की रोकथाम के लिए प्रशासनिक तौर पर कोई पुख्ता इंतजामात नहीं किए गए.

झारखंड में सड़क सुरक्षा बड़ी चुनौती

वर्ष 2024 के दौरान सड़क हादसों और उनमें होने वाली मौतों की संख्या में 2023 की तुलना में हल्की कमी दर्ज की गई है. हालांकि, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ओर से मई 2026 में जारी रिपोर्ट में राज्य के लिए कई गंभीर चेतावनियां भी दी गई थीं. रिपोर्ट में कहा गया है कि झारखंड उन पांच राज्यों में शामिल है, जहां सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वालों से अधिक लोगों की मौत हुई. इसके अलावा, शराब या नशीले पदार्थों के प्रभाव में वाहन चलाने से होने वाली मौतों के मामले में भी राज्य देश के टॉप पांच राज्यों में शामिल रहा. आंकड़े बताते हैं कि दुर्घटनाओं की संख्या भले थोड़ी घटी हो, लेकिन सड़क सुरक्षा अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है.

2023 के मुकाबले 2024 में घटी दुर्घटनाएं और मौतें

NCRB की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में झारखंड में कुल 5,196 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 4,114 लोगों की मौत हुई. वहीं 3,266 लोग घायल हुए. इसके मुकाबले 2023 में राज्य में 5,316 दुर्घटनाएं हुई थीं, जिनमें 4,173 लोगों की जान गई थी और 3,586 लोग घायल हुए थे. यानी एक वर्ष में दुर्घटनाओं में 120, मौतों में 59 और घायलों की संख्या में 320 की कमी दर्ज की गई.

झारखंड के सड़क हादसों में घायलों से ज्यादा हुई मौत

रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि झारखंड उन पांच राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में शामिल रहा, जहां सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वालों से अधिक लोगों की मौत हुई. इस सूची में उत्तर प्रदेश, पंजाब, बिहार, झारखंड और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह शामिल हैं. सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी स्थिति गंभीर दुर्घटनाओं, समय पर इलाज नहीं मिलने और हाई-स्पीड टक्करों की ओर संकेत कर सकती है. सड़कें कभी-कभी ऐसा गणित पढ़ाती हैं, जहां बचने वालों की संख्या से ज्यादा मौतों की गिनती हो जाती है.

शराब पीकर गाड़ी चलाने से 167 मौतें

शराब या नशीले पदार्थों के प्रभाव में वाहन चलाने से होने वाली मौतों के मामले में भी झारखंड देश के टॉप पांच राज्यों में रहा. 2024 में ऐसी दुर्घटनाओं में 167 लोगों की मौत हुई. इस सूची में उत्तर प्रदेश 1,229 मौतों के साथ पहले स्थान पर रहा. इसके बाद मध्य प्रदेश (444), ओडिशा (357), महाराष्ट्र (174) और झारखंड (167) का स्थान रहा. हालांकि, 2023 की तुलना में इसमें सुधार दर्ज हुआ है. उस वर्ष झारखंड में ऐसी दुर्घटनाओं में 288 लोगों की मौत हुई थी और राज्य इस मामले में देश के शीर्ष तीन राज्यों में शामिल था.

ओवरस्पीडिंग बनी सबसे बड़ा खतरा

NCRB रिपोर्ट के मुताबिक झारखंड में सड़क हादसों की सबसे बड़ी वजह ओवरस्पीडिंग रही. 2024 में तेज रफ्तार के कारण 3,715 दुर्घटनाएं हुईं. इनमें 2,910 लोगों की मौत हुई, जबकि 2,149 लोग घायल हुए. यानी राज्य में अधिकांश सड़क हादसे और मौतें सीधे तौर पर तेज गति से वाहन चलाने से जुड़ी रहीं.

किस समय सबसे ज्यादा हुए हादसे?

रिपोर्ट में दिन के अलग-अलग समय के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं का भी विवरण दिया गया है. सबसे अधिक हादसे सुबह 9 बजे से रात 9 बजे के बीच हुए.

सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक: 658 हादसे

दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक: 706 हादसे

शाम 3 बजे से 6 बजे तक: 946 हादसे

शाम 6 बजे से रात 9 बजे तक: 1,079 हादसे

इससे साफ है कि शाम के व्यस्त समय में दुर्घटनाओं का जोखिम सबसे अधिक रहा.

फरवरी में सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं

महीनों के हिसाब से देखें तो फरवरी 2024 सड़क हादसों के मामले में सबसे आगे रहा. फरवरी में 503 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं. इसके बाद दिसंबर में 498 और जनवरी में 488 सड़क हादसे रिकॉर्ड किए गए.

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सड़क हादसों पर कैसे लगे ब्रेक?

NCRB रिपोर्ट बताती है कि सिर्फ कानून नहीं, सड़क पर व्यवहार बदलना भी जरूरी है. ओवरस्पीडिंग, शराब पीकर ड्राइविंग, ट्रिपल राइडिंग, जिगजैग ड्राइविंग और मोबाइल इस्तेमाल पर सख्ती से रोक लगानी होगी. दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट पर स्पीड कैमरे, बेहतर रोशनी और चेतावनी संकेत बढ़ाने चाहिए. ब्रीथ एनालाइजर की नियमित जांच, हेलमेट और सीट बेल्ट नियमों का सख्ती से पालन, स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता अभियान और ब्लैक स्पॉट के पास एंबुलेंस की तैनाती से गोल्डन ऑवर में इलाज सुनिश्चित होगा. गुड समैरिटन नीति को प्रभावी बनाकर राहगीरों को घायलों की मदद के लिए प्रोत्साहित करना भी जरूरी है.

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