Saturday, 5 September 2026
INTइंडियन न्यूज़ ट्रस्टजहाँ सत्य मिले विश्वास से
ताज़ा खबरें

national · दिल्ली

मोदी के लिए आया था चॉकलेट का ‘इंडिया गेट’, रास्ते में टूट गया… लेकिन इसके पीछे छिपी है 9,000 भारतीय सैनिकों की कहानी

INT News5 September 2026 at 09:25 am

बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर भारत दौरे पर आए तो पीएम नरेंद्र मोदी के लिए एक बेहद खास तोहफा लाना चाहते थे.

तोहफा था- बेल्जियन चॉकलेट से बना इंडिया गेट.

लेकिन दिल्ली पहुंचने से पहले ही कहानी में ट्विस्ट आ गया.

चॉकलेट से बना यह इंडिया गेट यात्रा के दौरान टूट गया/पिघल गया और डी वेवर इसे पीएम मोदी को सौंप नहीं पाए.

बेल्जियम PM ने खुद सुनाई पूरी कहानी

3 सितंबर को नई दिल्ली में पीएम मोदी के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में डी वेवर ने इस घटना को मजाकिया अंदाज में बताया.

उन्होंने कहा कि चॉकलेट कूटनीति के लिए बेहतरीन है, लेकिन diplomatic travel के लिए उतनी अच्छी नहीं.

यानी गिफ्ट तो शानदार था, लेकिन हवाई सफर उसकी ‘कमजोरी’ साबित हो गया.

लेकिन कहानी सिर्फ चॉकलेट की नहीं थी…

यहां से इस कहानी का असली मोड़ शुरू होता है.

सवाल है-

बेल्जियम के प्रधानमंत्री पीएम मोदी के लिए इंडिया गेट की चॉकलेट replica ही क्यों लाना चाहते थे?

क्या यह सिर्फ एक creative diplomatic gift था?

नहीं.

इसके पीछे छिपा था भारत और बेल्जियम के बीच प्रथम विश्व युद्ध का एक साझा इतिहास.

इसे भी पढ़ें: UP के 9 नेता जो कभी चुनाव नहीं हारे, किसी ने 9 तो किसी ने 11 बार जीता चुनाव; देखें पूरी List

100 साल पीछे चलिए… Flanders Fields तक

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारतीय सैनिक हजारों किलोमीटर दूर यूरोप के युद्धक्षेत्रों में पहुंचे थे.

बेल्जियम के Flanders Fields में भी भारतीय सैनिकों ने लड़ाई लड़ी.

वे अपने घर से हजारों किलोमीटर दूर थे.

लेकिन उस युद्ध में उन्होंने जो कीमत चुकाई, उसकी स्मृति आज भी बेल्जियम में मौजूद है.

9,000 से ज्यादा भारतीय सैनिकों का बलिदान

भारत और बेल्जियम की संयुक्त स्टेटमेंट में दोनों देशों ने Flanders Fields में 9,000 से अधिक भारतीय सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान को याद किया.

यानी जिस India Gate की चॉकलेट replica पीएम मोदी को दी जानी थी, वह सिर्फ एक खूबसूरत मॉडल नहीं था.

उसमें भारतीय सैनिकों की स्मृति भी जुड़ी हुई थी.

चॉकलेट इंडिया गेट पर था खास संदेश

बार्ट डी वेवर ने बताया कि chocolate sculpture पर उस inscription के हिस्से को बड़ा किया गया था, जो प्रथम विश्व युद्ध में Flanders Fields में लड़ने और शहीद होने वाले भारतीय सैनिकों की याद में था.

डी वेवर का संदेश साफ था-

एक सदी से भी पहले भारतीय सैनिक हजारों किलोमीटर की यात्रा करके बेल्जियम की धरती पर लड़ने आए थे.

और बेल्जियम ने उनका बलिदान नहीं भुलाया.

गिफ्ट टूट गया, लेकिन कहानी नहीं

चॉकलेट वाला इंडिया गेट भारत नहीं पहुंच पाया.

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई.

डी वेवर ने बताया कि इसका एक backup version बेल्जियम में सुरक्षित रखा गया है.

अब कोशिश होगी कि उसे बिना नुकसान के भारत पहुंचाया जाए.

यानी इस बार शायद चॉकलेट को diplomatic baggage की तरह नहीं, बल्कि इतिहास की निशानी की तरह संभालकर लाया जाएगा.

एक छोटा-सा गिफ्ट, इतिहास की बड़ी कहानी

इस पूरी घटना में तीन अलग-अलग तस्वीरें दिखाई देती हैं.

एक तरफ बेल्जियम की मशहूर चॉकलेट.

दूसरी तरफ दिल्ली का इंडिया गेट.

और इनके बीच जुड़ी है Flanders Fields में भारतीय सैनिकों की कहानी.

एक आधुनिक diplomatic gesture ने अचानक एक सदी पुरानी shared history को सामने ला दिया.

आज की India-Belgium Partnership

भारत और बेल्जियम के रिश्ते अब सिर्फ ऐतिहासिक स्मृतियों तक सीमित नहीं हैं.

दोनों देश व्यापार, निवेश, technology, defence, clean energy, critical minerals और strategic cooperation जैसे क्षेत्रों में संबंध मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं.

यानी Flanders Fields का इतिहास और 21वीं सदी की partnership, दोनों एक ही रिश्ते की अलग-अलग परतें हैं.

चॉकलेट पिघल गई… इतिहास नहीं

तो अगली बार जब आप India Gate देखें, तो उसे सिर्फ दिल्ली की पहचान के रूप में मत देखिए.

उससे जुड़ी है युद्ध, स्मृति और बलिदान की एक लंबी कहानी.

और इस बार बेल्जियम से आया एक चॉकलेट इंडिया गेट भले ही रास्ते में टूट गया-

लेकिन उसने 100 साल पुरानी एक कहानी फिर से दुनिया के सामने ला दी.

चॉकलेट पिघल गई…

लेकिन Flanders Fields में शहीद हुए भारतीय सैनिकों की याद नहीं.

इसे भी पढ़ें: मोदी के बाद BJP का बॉस कौन? योगी या शाह नहीं, RSS के सामने है इससे भी बड़ा सवाल