Saturday, 26 September 2026
INTइंडियन न्यूज़ ट्रस्टजहाँ सत्य मिले विश्वास से
ताज़ा खबरें

national · राजस्थान

BJP के 10 पार्षद: फिर भी प्रत्याशी को मिला ‘0’ वोट, बागी को जिताया; नागौर में चौंकाने वाला चुनावी गणित

INT News22 September 2026 at 07:59 am

Rajasthan Nikay chunav 2026: राजस्थान के नागौर जिले के मुंडवा नगर पालिका (नगर परिषद) अध्यक्ष चुनाव में एक बेहद ही दिलचस्प और चौंकाने वाला चुनावी गणित देखने को मिला है. इस बार के चुनावी गणित ने सबको चौंका दिया. चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पास 10 पार्षद (और 4 समर्थित निर्दलीय मिलाकर कुल 14 पार्षदों का समर्थन) होने के बावजूद उसकी आधिकारिक अध्यक्ष प्रत्याशी गीता देवी को एक भी वोट नहीं मिला. इस '0' वोट के गणित ने पूरे प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चा बटोर ली है.

चुनाव परिणाम और वोटों का गणित

नगर पालिका चुनाव में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) की उम्मीदवार अलका कंदोई ने 13 वोट हासिल कर अध्यक्ष पद पर शानदार जीत दर्ज की. वहीं, भाजपा से बगावत कर निर्दलीय चुनावी मैदान में उतरे घनश्याम सदावत को 12 वोट मिले. इस कड़े मुकाबले में भाजपा की अधिकृत प्रत्याशी गीता को 'शून्य' (0) वोट पर ही संतोष करना पड़ा.

RLP और कांग्रेस का साथ

मुंडवा नगर परिषद के कुल 25 वार्डों के नतीजों में भाजपा के 10 पार्षद जीते थे, जबकि RLP के 7 और कांग्रेस के 3 पार्षद जीते थे. बहुमत के लिए 13 वोटों की आवश्यकता थी. RLP और कांग्रेस ने आपस में हाथ मिलाया. इसके अलावा, क्रॉस वोटिंग और निर्दलीय पार्षदों के समर्थन की बदौलत RLP-कांग्रेस गठबंधन 13 का जादुई आंकड़ा छूने में सफल रहा, जिससे अलका कंदोई दोबारा अध्यक्ष बनने में कामयाब रहीं.

क्यों हुआ ऐसा? (भाजपा की क्रास-वोटिंग और बगावत)

भाजपा प्रत्याशी को एक भी वोट न मिलने के पीछे पार्टी के भीतर की भीतरी बगावत और गुटबाजी को मुख्य वजह माना जा रहा है:

टिकट वितरण पर असंतोष: अध्यक्ष पद के लिए भाजपा ने वरिष्ठ नेताओं के बजाय पहली बार पार्षद बनीं गीता देवी को टिकट दिया था. इससे नाराज होकर भाजपा के बागी नेता घनश्याम सदावत निर्दलीय मैदान में उतर गए.

सारे वोट बागी को गए: भाजपा के सभी 10 पार्षदों और उनके समर्थक निर्दलीयों ने अपनी ही पार्टी की आधिकारिक प्रत्याशी को खारिज करते हुए बागी निर्दलीय प्रत्याशी घनश्याम सदावत को वोट दे दिया, जिससे सदावत को 12 वोट मिले और पार्टी की मुख्य प्रत्याशी 'शून्य' पर सिमट गई.

इस हार और '0' वोट के नतीजों ने भाजपा के भीतर स्थानीय स्तर पर अनुशासन और समन्वय की भारी कमी को उजागर कर दिया है. जिसकी बदौलत स्पष्ट बढ़त होने के बावजूद भाजपा का बोर्ड नहीं बन सका और RLP-कांग्रेस गठबंधन बाजी मार गया.

ये भी पढ़ें: School Holiday: सितंबर के आखिरी सप्ताह में स्कूलों की लंबी छुट्टी, कई राज्यों में 3 से 4 दिन बंद रहेंगे स्कूल, देखें पूरी लिस्ट