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Durga Puja 2026: पलामू में 40 साल से बंगाल के कलाकार गढ़ रहे देवी प्रतिमाएं, जिससे पलता है परिवार का पेट

Durga Puja 2026: झारखंड के पलामू जिले में दुर्गा पूजा महोत्सव को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं. नावा बाजार, छतरपुर, लठैया, सुल्तानी समेत कई क्षेत्रों में पूजा पंडालों का निर्माण शुरू हो चुका है, जबकि मूर्ति कलाकार देवी प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं. पश्चिम बंगाल से हर साल आने वाले कलाकार पिछले करीब 40 वर्षों से पलामू में दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती की प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं. उनकी बनाई प्रतिमाएं जिले के कई पूजा समितियों की पहली पसंद मानी जाती हैं.
40 साल से पलामू आ रहा है कलाकारों का परिवार
मूर्ति कलाकार लोखी नारायण सूत्रधर ने बताया कि उनका परिवार पीढ़ियों से मूर्ति निर्माण की कला से जुड़ा है. करीब चार दशक पहले उन्होंने पलामू में काम शुरू किया था और तब से हर साल दुर्गा पूजा के मौसम में पश्चिम बंगाल से यहां आते हैं. उनके साथ मनोज कुमार समेत चार सदस्यीय टीम रहती है, जो अलग-अलग स्थानों पर प्रतिमाएं तैयार करती है. उन्होंने बताया कि मूर्ति बनाना उनके लिए केवल रोजी-रोटी का जरिया नहीं है, बल्कि यह पूर्वजों से मिली कला और परंपरा को आगे बढ़ाने का माध्यम भी है. इंसानों की दुनिया में कुछ विरासतें जमीन के कागजों से नहीं, मिट्टी से बने चेहरों से बची रहती हैं.
लठैया के मंदिर परिसर में अंतिम रूप ले रही हैं प्रतिमाएं
इन दिनों लठैया स्थित कंडा देवी मंदिर और महावीर मंदिर परिसर में कलाकारों की टीम लगातार काम कर रही है. मिट्टी से आकार देने के बाद प्रतिमाओं पर रंग, आभूषण और बारीक सजावट का काम अंतिम चरण में पहुंच गया है. कलाकारों की मेहनत से तैयार हो रही प्रतिमाएं आकर्षक नजर आ रही हैं. पूजा समितियां भी समय पर प्रतिमाएं तैयार कराने के लिए नियमित रूप से निर्माण कार्य की निगरानी कर रही हैं, ताकि दशहरा से पहले सभी प्रतिमाएं अपने निर्धारित स्थानों तक पहुंच सकें.
10 से 12 दुर्गा प्रतिमाएं बनाकर होती है अच्छी कमाई
लोखी नारायण सूत्रधर के अनुसार दुर्गा पूजा के दौरान उनकी चार सदस्यीय टीम करीब 10 से 12 दुर्गा प्रतिमाएं तैयार करती है. इससे उन्हें करीब एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक की आमदनी होती है. उन्होंने बताया कि काम सिर्फ दुर्गा पूजा तक सीमित नहीं रहता. इसके बाद लक्ष्मी पूजा और फिर सरस्वती पूजा के लिए भी बड़ी संख्या में प्रतिमाओं के ऑर्डर मिलते हैं, जिससे पूरे पूजा सीजन में रोजगार बना रहता है.
लक्ष्मी और सरस्वती पूजा में बढ़ जाती है मांग
कलाकारों के अनुसार दुर्गा पूजा के बाद लक्ष्मी पूजा के लिए करीब 30 प्रतिमाएं तैयार की जाती हैं, जिससे लगभग 1.20 लाख रुपये की आय होती है. वहीं सरस्वती पूजा के दौरान मांग और बढ़ जाती है. इस समय उनकी टीम करीब 60 प्रतिमाएं बनाती है, जिससे करीब दो लाख रुपये तक की कमाई हो जाती है. पूजा का पूरा मौसम खत्म होने के बाद सभी कलाकार वापस पश्चिम बंगाल लौट जाते हैं.
सालभर बनाते हैं सीमेंट की मूर्तियां
लोखी नारायण ने बताया कि साल के बाकी समय भी वे झारखंड में रहकर सीमेंट की मूर्तियां बनाने का काम करते हैं. इसके अलावा घरों में पुट्टी और रंग-रोगन का काम भी करते हैं, जिससे पूरे परिवार का भरण-पोषण चलता है. उनका कहना है कि मौसम बदलने के साथ काम का स्वरूप बदल जाता है, लेकिन कला नहीं बदलती. दुर्गा पूजा का समय उनके लिए सबसे व्यस्त और सबसे महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसी दौरान उनकी वर्षों पुरानी पहचान और मेहनत सबसे अधिक दिखाई देती है.
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पूजा का उत्साह बढ़ा, बाजारों में भी लौटी रौनक
जैसे-जैसे दुर्गा पूजा नजदीक आ रही है, पलामू के बाजारों में भी रौनक बढ़ने लगी है. पूजा समितियां पंडालों को अंतिम रूप देने में जुटी हैं, जबकि कलाकारों की कार्यशालाओं में दिनभर मिट्टी, रंग और सजावट का काम जारी है. चार दशकों से चली आ रही बंगाल के कलाकारों की यह परंपरा आज भी पलामू की दुर्गा पूजा की पहचान बनी हुई है. हर साल इनकी बनाई प्रतिमाएं न केवल पूजा समितियों का भरोसा जीतती हैं, बल्कि स्थानीय लोगों के बीच भी खास आकर्षण का केंद्र बनती हैं.
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