समाचार · मध्य प्रदेश
3D प्रिंटिंग जबड़े का मॉडल बनाकर होगा ऑपरेशन:विशेषज्ञ बोले- डिजिटल प्लानिंग से कम होगा ऑपरेशन का समय, मरीज तेजी से होंगे स्वस्थ
चेहरे और जबड़े की सर्जरी अब पहले से ज्यादा सटीक और सुरक्षित होने जा रही है। भोपाल में आयोजित ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जनों के राष्ट्रीय सम्मेलन MIDCOMS-2026 में विशेषज्ञों ने बताया कि 3D प्रिंटिंग, डिजिटल सर्जिकल प्लानिंग और माइक्रोवैस्कुलर रिकंस्ट्रक्शन जैसी आधुनिक तकनीकें ऑपरेशन के तरीके को तेजी से बदल रही हैं। इनकी मदद से सर्जरी से पहले मरीज के जबड़े या चेहरे का त्रि-आयामी (3D) मॉडल तैयार किया जा सकता है, जिससे ऑपरेशन की पूरी योजना पहले ही बना ली जाती है। इससे सर्जरी अधिक सटीक होती है और मरीज के ठीक होने की संभावना भी बेहतर होती है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि त्रिपुरा के मुख्यमंत्री एवं प्रख्यात ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जन डॉ. माणिक साहा रहे। ऑपरेशन से पहले बनती है पूरी रणनीति विशेषज्ञों ने बताया कि पहले कई जटिल सर्जरी के दौरान ही डॉक्टरों को निर्णय लेने पड़ते थे। अब डिजिटल प्लानिंग और 3D मॉडल की मदद से ऑपरेशन से पहले ही पूरी प्रक्रिया की तैयारी कर ली जाती है। इससे समय की बचत होती है और सर्जरी के दौरान जोखिम भी कम होता है। चेहरे की गंभीर चोट और कैंसर के मरीजों को मिलेगा फायदा विशेषज्ञों ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में चेहरे और जबड़े की गंभीर चोट, मुंह के कैंसर के बाद चेहरे के पुनर्निर्माण, जन्मजात विकृतियों और डेंटल इम्प्लांट जैसी जटिल सर्जरी में नई तकनीकों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इससे मरीजों के चेहरे की बनावट, बोलने और भोजन करने की क्षमता को बेहतर तरीके से बहाल किया जा सकता है। डॉक्टरों ने सीखा आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल सम्मेलन के दौरान हैंड्स-ऑन वर्कशॉप और प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किए गए, जिनमें देशभर से आए सर्जनों और पीजी छात्रों को आधुनिक उपकरणों और नई सर्जिकल तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि नई तकनीकों का उद्देश्य केवल ऑपरेशन को आसान बनाना नहीं, बल्कि मरीजों को अधिक सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराना है। 700 से ज्यादा शोध और क्लिनिकल केस पर हुई चर्चा देशभर से आए 1200 से अधिक ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल (चेहरे, जबड़े और मुंह के सर्जन) विशेषज्ञों ने भोपाल में इलाज की नई तकनीकों और जटिल सर्जरी पर मंथन किया। तीन दिवसीय MIDCOMS-2026 सम्मेलन में 700 से अधिक शोधपत्र, ई-पोस्टर और क्लिनिकल केस प्रस्तुत किए गए। इन पर वरिष्ठ विशेषज्ञों ने चर्चा की और इलाज के नए तरीकों पर अपने अनुभव साझा किए। युवा डॉक्टरों को भी अपनी रिसर्च प्रस्तुत करने का अवसर मिला।