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Hazaribagh Floating Restaurant: हजारीबाग झील के फ्लोटिंग रेस्टोरेंट पर सियासत तेज, जानें क्यों हो रहा विरोध

INT News25 September 2026 at 02:36 pm

Hazaribagh Floating Restaurant: हजारीबाग की पहचान मानी जाने वाली ऐतिहासिक झील इन दिनों चर्चा के केंद्र में है. नगर निगम झील के सौंदर्यीकरण फेज-2 के तहत यहां फ्लोटिंग रेस्टोरेंट बना रहा है, जिसे अक्टूबर में दशहरा तक शुरू करने की तैयारी है. जिला प्रशासन और नगर निगम इसे शहर के पर्यटन को नई पहचान देने वाली महत्वाकांक्षी योजना बता रहे हैं. दूसरी ओर पर्यावरण प्रेमियों, स्थानीय वेंडर्स और कांग्रेस नेताओं ने इस परियोजना पर सवाल उठाते हुए विरोध शुरू कर दिया है. ऐसे में यह परियोजना अब सिर्फ विकास का मुद्दा नहीं, बल्कि शहर में सियासी बहस का विषय भी बन गई है.

क्या है फ्लोटिंग रेस्टोरेंट?

फ्लोटिंग रेस्टोरेंट जमीन पर बना सामान्य होटल नहीं होगा. इसे झील के पानी पर तैरने वाले बड़े बजरे या प्लेटफॉर्म पर दो मंजिला ढांचे के रूप में तैयार किया जा रहा है. यह किनारे से एक छोटे पुल के जरिए जुड़ा रहेगा, ताकि लोग आसानी से अंदर पहुंच सकें. रेस्टोरेंट में एक साथ करीब 50 से 70 लोगों के बैठने की व्यवस्था होगी. इसमें फैमिली डाइनिंग, कैफेटेरिया और शाम के समय आकर्षक लाइटिंग के साथ लेक व्यू डिनर का अनुभव देने की योजना है. नगर निगम का कहना है कि इसे गोरखपुर के रामगढ़ताल और भोपाल की झील की तर्ज पर पीपीपी मॉडल के तहत संचालित किया जाएगा.

कितनी है लागत, कौन बना रहा है?

फ्लोटिंग रेस्टोरेंट हजारीबाग झील सौंदर्यीकरण फेज-2 परियोजना का हिस्सा है. इस पूरी योजना की लागत करीब 13.97 करोड़ रुपये है. इसी बजट में झील की डिसिल्टिंग, आइलैंड, हैंगिंग ब्रिज, गजीबो, म्यूजिकल फाउंटेन और फ्लोटिंग रेस्टोरेंट जैसे कई काम शामिल हैं. नगर निगम यह परियोजना झारखंड टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (JTDC) के सहयोग से तैयार कर रहा है. टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद निजी डेवलपर को 15 साल तक संचालन का अधिकार मिलेगा.

फ्लोटिंग रेस्टोरेंट के स्ट्रक्चर पर 2-2.5 करोड़ खर्च

अधिकारियों के मुताबिक, सिर्फ फ्लोटिंग रेस्टोरेंट के स्ट्रक्चर पर करीब 2 से 2.5 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. इससे पहले 2022 में नगर निगम झील की सफाई के लिए करीब 2 करोड़ रुपये की वीड हार्वेस्टर मशीन भी खरीद चुका है. इंसानों की एक खासियत है, मशीन खरीदने के बाद उम्मीद करते हैं कि प्रकृति खुद धन्यवाद का पत्र भेज दे.

पर्यावरण प्रेमियों ने क्यों जताई चिंता?

परियोजना का सबसे बड़ा विरोध पर्यावरण संरक्षण को लेकर सामने आया है. पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि हजारीबाग झील सात कृत्रिम झीलों का ऐतिहासिक समूह है, जो ब्रिटिश काल से शहर के पारिस्थितिक संतुलन का अहम हिस्सा रहा है. उनका तर्क है कि यदि रेस्टोरेंट से तेल, खाद्य अपशिष्ट, बर्तन धोने का पानी या अन्य कचरा झील तक पहुंचा, तो पहले से प्रदूषण और गाद की समस्या झेल रही झील की स्थिति और खराब हो सकती है. उनका मानना है कि पहले झील को पूरी तरह साफ और गहरा बनाया जाना चाहिए, उसके बाद पर्यटन परियोजनाओं पर ध्यान देना चाहिए.

गुणवत्ता और खर्च पर कांग्रेस उठा रही सवाल

परियोजना को लेकर राजनीतिक विरोध भी तेज हो गया है. कांग्रेस प्रदेश महासचिव सुरजीत नागवाला ने प्रेस वार्ता कर आरोप लगाया कि 13.97 करोड़ रुपये की योजना में गुणवत्ता के साथ समझौता किया गया है. उन्होंने तकनीकी और वित्तीय ऑडिट की मांग उठाते हुए कहा कि पूरे निर्माण कार्य की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए. हालांकि, नगर निगम ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है और कहा है कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार कराया जा रहा है.

छोटे कारोबारियों में भी बढ़ी चिंता

झील किनारे वर्षों से छोटे फूड स्टॉल चलाने वाले करीब 15 से 20 वेंडर्स भी इस परियोजना को लेकर चिंतित हैं. उनका कहना है कि बड़ा फ्लोटिंग रेस्टोरेंट शुरू होने के बाद नगर निगम उन्हें हटाने या कारोबार सीमित करने का फैसला ले सकता है. वेंडर्स का मानना है कि यदि पर्यटन बढ़ता है तो उसका लाभ छोटे दुकानदारों तक भी पहुंचना चाहिए, केवल बड़े व्यावसायिक मॉडल तक सीमित नहीं रहना चाहिए.

कई फायदे गिना रहा नगर निगम

नगर निगम का कहना है कि फ्लोटिंग रेस्टोरेंट से हजारीबाग पर्यटन मानचित्र पर मजबूत पहचान बना सकेगा. अधिकारियों के मुताबिक बरही और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले पर्यटक होटल अरण्य विहार के साथ झील का भी रुख करेंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को फायदा मिलेगा. प्रशासन का दावा है कि परियोजना से नगर निगम को हर महीने लाखों रुपये का किराया मिलेगा, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और शहर में शाम के समय पर्यटन गतिविधियां विकसित होंगी.

परियोजना पर बंटी शहरवासियों की राय

शहर में इस परियोजना को लेकर राय बंटी हुई है. युवा वर्ग इसे आधुनिक हजारीबाग की पहचान मानते हुए कह रहा है कि जब रांची और जमशेदपुर में नए पर्यटन आकर्षण विकसित हो सकते हैं, तो हजारीबाग में भी ऐसा होना चाहिए. वहीं, मॉर्निंग वॉक करने वाले बुजुर्गों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि झील की सफाई और जल संरक्षण पहले होना चाहिए, ताकि भविष्य में यह जलाशय प्रदूषण की समस्या का शिकार न बने.

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पर्यावरणीय मानकों पर क्या कहता है नगर निगम?

नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि फ्लोटिंग रेस्टोरेंट पूरी तरह पर्यावरण मानकों के अनुरूप बनाया जा रहा है. उनके अनुसार इसमें बायो-टॉयलेट, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम और नियमित निगरानी की व्यवस्था होगी, ताकि कोई भी कचरा झील में न पहुंचे. जिला प्रशासन का भी कहना है कि परियोजना से झील को अतिक्रमण से बचाने और लोगों का जुड़ाव बढ़ाने में मदद मिलेगी. अब असली परीक्षा उद्घाटन की नहीं, उस दिन की होगी जब पहली भीड़ जाएगी और झील तय करेगी कि उसे मेहमान मिले हैं या नया बोझ.

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