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बुरहानपुर में क्यूआर कोड शिकायत प्रणाली कारगर:भास्कर के रियलिटी चेक में 3 मिनट में आया पुलिस का फोन
बुरहानपुर जिले के थानों और पुलिस चौकियों में 21 मई से शुरू की गई क्यूआर कोड आधारित शिकायत प्रणाली अब असर दिखाने लगी है। अगर किसी फरियादी की सुनवाई थाने में नहीं होती, तो वह मौके पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन कर सीधे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक शिकायत पहुंचा सकता है। के रियलिटी चेक में यह व्यवस्था पूरी तरह सक्रिय और प्रभावी मिली। नेपानगर थाने में की गई टेस्ट शिकायत पर महज 3 मिनट में पुलिस कंट्रोल रूम से कॉल बैक आया। भास्कर के रियलिटी चेक में सामने आई त्वरित कार्रवाई
की टीम ने गुरुवार दोपहर 1:05 बजे नेपानगर थाने पहुंचकर बाइक चोरी की ऑनलाइन शिकायत दर्ज की। शिकायत सबमिट होते ही दोपहर 1:08 बजे बुरहानपुर पुलिस कंट्रोल रूम से कॉल आया। कंट्रोल रूम ने शिकायत की जानकारी लेते हुए पूछा कि क्या थाने में सुनवाई नहीं हुई थी। इसके बाद दोपहर करीब 1:45 बजे नेपानगर थाने के एक एएसआई ने भी कॉल कर घटना स्थल और शिकायत से जुड़ी जानकारी ली। खास बात यह रही कि उसी समय खरगोन रेंज के डीआईजी सिद्धार्थ बहुगुणा जिले में क्राइम मीटिंग ले रहे थे। एसपी बोले- क्विक रिस्पांस सिस्टम से बढ़ी जवाबदेही
एसपी आशुतोष बागरी ने बताया कि क्यूआर कोड से आने वाली शिकायतों की मॉनिटरिंग वे खुद, एएसपी और सीएसपी स्तर तक करते हैं। उनका कहना है कि यह व्यवस्था पुलिसिंग को ज्यादा जवाबदेह और नागरिक केंद्रित बना रही है। यदि किसी की थाने में सुनवाई नहीं होती, तो वह सीधे शिकायत दर्ज कर सकता है और तत्काल कॉल बैक मिलता है। ऐसे काम करती है यह व्यवस्था
थानों और चौकियों में लगाए गए क्यूआर कोड को मोबाइल के गूगल लेंस से स्कैन करने पर एक ऑनलाइन फॉर्म खुलता है। इसमें आवेदक अपना नाम, मोबाइल नंबर और शिकायत का संक्षिप्त विवरण दर्ज करता है। शिकायत सबमिट होते ही उसकी जानकारी रियल टाइम में एसपी, एएसपी, सीएसपी, थाना प्रभारी और कंट्रोल रूम के साझा ग्रुप तक पहुंच जाती है। इसके बाद जिला कंट्रोल रूम तत्काल आवेदक से संपर्क करता है। जरूरत पड़ने पर वीडियो कॉल के जरिए भी शिकायतकर्ता से संवाद किया जा सकता है। एक महीने में 50 शिकायतें, नेपानगर में सिर्फ एक
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, एक महीने में जिलेभर से करीब 50 शिकायतें इस माध्यम से दर्ज हुई हैं। इनमें नेपानगर क्षेत्र से केवल एक शिकायत आई है। पुलिस का दावा है कि सभी शिकायतों का समय पर निराकरण किया जा रहा है। ग्रामीणों और आम लोगों को सीधा फायदा
इस व्यवस्था से खासतौर पर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग बिना किसी मध्यस्थ के सीधे वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच सकते हैं। पुलिस का कहना है कि इससे छोटी शिकायतों को अनदेखा होने से रोका जा सकेगा और बड़े विवादों की संभावना भी कम होगी।