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पहले बहू पर हत्या का शक, अब बेटा निकला मास्टरमाइंड! 19 दिन बाद विनीत मनोचा हत्याकांड में बदली पूरी कहानी

UP Crime News: कानपुर के चर्चित दवा कारोबारी विनीत मनोचा हत्याकांड की जांच में 19 दिन बाद ऐसा मोड़ आया, जिसने शुरुआती कहानी पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं. जिस मामले में पहले बहू शालू पर हत्या की साजिश का आरोप लगा था, अब जांच की कड़ी मृतक के बेटे सुब्रत तक पहुंच गई है. पुलिस ने सुब्रत को गिरफ्तार किया है. इसके बाद विशाल के बयान से लेकर मोबाइल कॉल और फ्लैट की चाबी तक कई कड़ियां दोबारा जांच के दायरे में आ गई हैं. आखिर उस रात क्या हुआ था और शालू के खिलाफ सामने आई कहानी में कितना सच था?
पहले बहू शालू पर लगा था आरोप
कानपुर के कल्याणपुर स्थित रतन ऑर्बिट अपार्टमेंट में 5 सितंबर को दवा कारोबारी विनीत मनोचा की हत्या कर दी गई थी. मामले की शुरुआती जांच में पुलिस ने उनकी बहू शालू, पूर्व नौकर विशाल और राजकिशोर को गिरफ्तार किया था. शुरुआत में विशाल के बयान के आधार पर शालू की भूमिका सामने आई. आरोप था कि हत्या की साजिश में शालू शामिल थी. इसके बाद उसे जेल भेज दिया गया. लेकिन जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, पुलिस के सामने कुछ ऐसे तथ्य आए, जिनसे मामले की दिशा बदलती गई.
एक बयान ने बदल दी जांच की दिशा
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान विशाल ने अपने पहले बयान से अलग बातें बताईं. उसने हत्या के पीछे सुब्रत की भूमिका होने की बात कही. पुलिस का दावा है कि सुब्रत ने ही विशाल को हत्या के लिए तैयार किया था. इसके लिए उसे 6 लाख रुपये देने की बात सामने आई है. इतना ही नहीं, पुलिस के अनुसार विशाल को पकड़े जाने की स्थिति में शालू का नाम लेने के लिए भी कहा गया था. यहीं से इस हत्याकांड में सबसे बड़ा सवाल खड़ा हुआ—क्या शालू पर लगा आरोप किसी बड़ी साजिश का हिस्सा था?
CDR ने भी बढ़ाया सुब्रत पर शक
मामले की जांच में कॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी CDR भी अहम कड़ी बनी. पुलिस ने सुब्रत, शालू और विशाल के बीच हुई बातचीत की पड़ताल की. जांच में विशाल की शालू के साथ-साथ सुब्रत से हुई बातचीत भी सामने आई. पुलिस ने इन कॉल डिटेल्स को केस की अहम कड़ी माना. विशाल ने हत्या से कुछ दिन पहले नया सिम लिया था. इस नंबर से सुब्रत और शालू दोनों से बातचीत हुई थी.
फ्लैट की चाबी पर भी उठे सवाल
हत्या की जांच में फ्लैट की चाबी का मामला भी सामने आया. विशाल के बयान में चाबी को लेकर शालू की भूमिका बताई गई थी. हालांकि, बाद की जांच में इस दावे पर भी सवाल उठे. शालू ने खुद चाबी देने या बनवाने से इनकार किया था. अब पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि फ्लैट की डुप्लीकेट चाबी आखिर किसने बनवाई और इसका इस्तेमाल कैसे हुआ.
'शुभम' नाम से एंट्री की कहानी क्या थी?
मामले में सोसाइटी के एंट्री रजिस्टर ने भी जांच को एक अलग दिशा दी. विशाल की एंट्री 'शुभम' नाम से कराए जाने की बात सामने आई. शुरुआती तौर पर इसमें शालू की भूमिका बताई गई थी. लेकिन पुलिस के मुताबिक, बाद की जांच में सामने आया कि यह एंट्री सुब्रत की योजना का हिस्सा हो सकती है. पुलिस का कहना है कि शालू से यह एंट्री इसलिए कराई गई थी, ताकि उसके पिता विशाल को पहचान न सकें. विशाल को गजरा और चश्मा लाने के बहाने बुलाए जाने की बात भी जांच में सामने आई.
आखिर सुब्रत पर हत्या का शक क्यों गया?
पुलिस की जांच में सुब्रत की आर्थिक स्थिति भी सामने आई. रिपोर्टों के मुताबिक, वह करीब 40 लाख रुपये के कर्ज में था. पुलिस के अनुसार, सट्टेबाजी और जुए से जुड़ी गतिविधियों के कारण उस पर काफी कर्ज हो गया था. उसे पिता से हर महीने करीब 40 हजार रुपये मिलते थे, जबकि उसकी बैंक किस्त करीब 55 हजार रुपये प्रतिमाह थी. जांच में संपत्ति को लेकर भी एक अहम एंगल सामने आया.
संपत्ति को लेकर था डर?
पुलिस के मुताबिक, सुब्रत को आशंका थी कि उसके पिता अपनी संपत्ति किसी दूसरी महिला के नाम कर सकते हैं. जांच एजेंसी का दावा है कि कर्ज और संपत्ति से जुड़ी चिंता के बीच सुब्रत ने पिता की हत्या की साजिश रची. इसी साजिश में विशाल को 6 लाख रुपये की सुपारी देने का आरोप है.
अब सबसे बड़ा सवाल शालू को लेकर
सुब्रत की गिरफ्तारी के बाद इस केस का सबसे बड़ा सवाल अब शालू की भूमिका को लेकर है. क्या शालू वास्तव में हत्या की साजिश में शामिल थी? या फिर जांच को दूसरी दिशा में ले जाने के लिए उसका नाम इस्तेमाल किया गया? फिलहाल पुलिस ने शालू को क्लीन चिट नहीं दी है. मामले की जांच जारी है. आगे की जांच और अदालत की प्रक्रिया से ही यह साफ होगा कि इस हत्याकांड में शालू की वास्तविक भूमिका क्या थी. सुब्रत की गिरफ्तारी के बाद इतना जरूर है कि विनीत मनोचा हत्याकांड की शुरुआती कहानी अब पहले जैसी नहीं रही.
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