समाचार · उत्तराखंड
देहरादून और अमृतसर एयरपोर्ट पर बर्ड अटैक का खतरा; चील-कबूतर समेत 21 प्रजातियां हाई रिस्क

ओमप्रकाश सती, देहरादूनदेहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट और अमृतसर एयरपोर्ट पर बर्ड अटैक का खतरा है। भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) के अध्ययन में एयरपोर्ट क्षेत्र में 57 पक्षी प्रजातियां दर्ज की गईं। इनमें टिटहरी, चील और कबूतर समेत 13 प्रजातियों को विमानों के लिए अधिक जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है।अध्ययन के अनुसार अमृतसर एयरपोर्ट क्षेत्र में 50 पक्षी प्रजातियां दर्ज हुईं। इनमें आठ को उच्च जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है। वहीं, जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर 13 पक्षी प्रजातियां विमानों के लिए बर्ड स्ट्राइक (पक्षियों से टकराना) का जोखिम पैदा कर रही हैं। जौलीग्रांट में पक्षियों की संख्या और उनकी गतिविधियां विमान संचालन के लिए चुनौती बन रही हैं। रनवे और उड़ान मार्ग के आसपास पक्षियों की मौजूदगी से टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान बर्ड स्ट्राइक की आशंका बढ़ जाती है।बड़े आकार के पक्षियों के विमानों से टकराने पर नुकसान की आशंका अधिक रहती है। कुछ समय पहले जौलीग्रांट में पक्षियों के चलते एक विमान को लैंडिंग से पहले काफी देर हवा में ही घुमाना पड़ा था।सेमिनार में प्रस्तुत किए गए 60 से अधिक शोध पत्र● शोध समन्वयक बिवाश पांडव ने पारंपरिक ज्ञान, आधुनिक विज्ञान, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और तकनीक को जोड़कर संरक्षण के प्रयास आगे बढ़ाने पर जोर दिया। अपर वन महानिदेशक (वन्यजीव), पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय रमेश कुमार पांडे ने इसे शोधकर्ताओं के बीच विचारों, आंकड़ों और पद्धतियों के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच बताया।● डब्ल्यूआईआई के 37वें वार्षिक अनुसंधान सेमिनार में वन्यजीव व जैव विविधता से जुड़े 60 से अधिक शोध पत्र और 41 पोस्टर प्रस्तुत किए गए। दो दिवसीय सेमिनार के दूसरे दिन आठ तकनीकी सत्र हुए। इनमें वन्यजीव संरक्षण, पुनर्स्थापन, आवास और जैव विविधता में बदलाव, वन्यजीव गलियारे, आबादी आकलन, पर्यावरणीय बदलाव और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसे विषयों पर शोध प्रस्तुत किए गए।● सेमिनार की अध्यक्षता डब्ल्यूआईआई के पूर्व निदेशक और वरिष्ठ वन्यजीव वैज्ञानिक जीएस रावत ने की। उद्घाटन सत्र में वैज्ञानिकों और शोधार्थियों के पांच महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन किया गया। डब्ल्यूआईआई निदेशक जीएस भारद्वाज ने कहा कि सेमिनार शोध को विशेषज्ञों के सामने रखने और उनकी प्रतिक्रिया से उसकी गुणवत्ता व प्रासंगिकता बढ़ाने का मंच है।स्तनधारी जीव भी बढ़ा रहे हैं खतराजौलीग्रांट एयरपोर्ट पर कैमरा ट्रैप के जरिए सियार, साही व खरगोश जैसे वन्यजीव भी दर्ज किए गए। ये एयरपोर्ट परिसर तक पहुंच चुके हैं। इससे विमानों की लैंडिंग भी प्रभावित हुई।