Tuesday, 29 September 2026
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राहुल गांधी बोले- ज्ञानेश तो जाएंगे, सिस्टम का भी हिसाब होगा, 728 में से 727 वोटरों के नाम कटने का दावा

INT News28 September 2026 at 09:46 pm

दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि सीईसी ज्ञानेश कुमार को जाना पड़ेगा, लेकिन उनके पीछे काम करने वाले ‘सिस्टम’ का भी हिसाब होगा. राहुल गांधी ने यह बात यमुना किनारे स्थित बेला एस्टेट की झुग्गी बस्ती का दौरा करने के बाद कही, जहां उन्होंने एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का दावा किया.

राहुल गांधी बोले- 728 में से 727 नाम काट दिए गए

राहुल गांधी ने दावा किया कि बेला एस्टेट में 728 वयस्क लोग रहते हैं, लेकिन एसआईआर के बाद जारी मसौदा मतदाता सूची में सिर्फ एक नाम बचा है. उन्होंने कहा कि बाकी 727 लोगों के नाम काट दिए गए. राहुल गांधी के मुताबिक, ये लोग लंबे समय से इलाके में रह रहे हैं और 2024 के लोकसभा चुनाव तथा 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में मतदान भी कर चुके हैं.

उन्होंने लोगों से मुलाकात के दौरान एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें वह इलाके के एसडीएम से फोन पर बात करते नजर आए. राहुल गांधी ने मतदाताओं के नाम हटाए जाने का कारण पूछा और बातचीत के दौरान एसडीएम से उनका नाम और पद की जानकारी भी मांगी.

राहुल गांधी बोले- यह एसआईआर नहीं, वोट चोरी का तरीका है

राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा, "ज्ञानेश कुमार तो जाएंगे. पर जिस सिस्टम ने उनसे यह करवाया, उसका हिसाब भी होगा." उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर के जरिए उन लोगों के वोट का अधिकार प्रभावित किया जा रहा है, जिनके पास पहले से बहुत कम संसाधन हैं.

राहुल गांधी ने यह भी कहा कि मकान होने या नहीं होने का वोट देने के अधिकार से संबंध नहीं होना चाहिए. उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के उस कथित बयान का हवाला दिया, जिसमें बेघर लोगों के लिए ‘हाउस नंबर 0’ का प्रावधान बताए जाने की बात कही गई थी.

चुनाव अधिकारियों ने नाम हटाने की क्या वजह बताई?

बेला एस्टेट में बड़ी संख्या में नाम मसौदा सूची में नहीं होने का मामला पहले भी सामने आया था. उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, एक मतदान भाग में एसआईआर से पहले 729 मतदाता दर्ज थे, जबकि मसौदा सूची में केवल एक नाम रह गया. चुनाव अधिकारियों ने बताया था कि पुराने रिकॉर्ड में दर्ज कई पते पर मकान और दूसरी आवासीय संरचनाएं हट चुकी थीं. अधिकारियों के मुताबिक, एसआईआर के दौरान बीएलओ को दर्ज पते पर मतदाताओं का सत्यापन करना था और वहां आवास नहीं मिलने के कारण बड़ी संख्या में लोगों को स्थानांतरित माना गया.

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नाम छूटने पर दोबारा जुड़वाने का मौका

दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट के मुताबिक, एसआईआर की मसौदा मतदाता सूची 31 अगस्त 2026 को जारी की गई थी. जिन पात्र मतदाताओं का नाम मसौदा सूची में नहीं है, वे 30 सितंबर 2026 तक दावे और आपत्तियों की अवधि में फॉर्म-6 के जरिए नाम शामिल कराने का दावा कर सकते हैं. चुनाव आयोग ने एएसडीडी सूची भी जारी की है, जिसमें अनुपस्थित, स्थानांतरित, डुप्लीकेट और मृत मतदाताओं से जुड़ी जानकारी शामिल है.