स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में जिन मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटे हैं, वे अगले साल के नगर निगम और पंचायत चुनावों में फिर भी वोट डाल सकते हैं। इसकी वजह भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) के बीच मतदाता सूची को लेकर विवाद है। इससे एक आयोग की तरफ से हटाया गया मतदाता दूसरे आयोग की सूची में शामिल हो सकता है। विवाद की वजह क्या है?
विवाद मतदाता सूची साझा करने को लेकर है। राज्य निर्वाचन आयोग ने SIR के बाद तैयार नई वोटर लिस्ट मांगी थी, ताकि 15 जिलों के निकाय उपचुनाव और अगले साल के पंचायत व नगरीय चुनाव उसी आधार पर कराए जा सकें। राज्य आयोग ने पांच बार पत्र भेजे, लेकिन केंद्रीय आयोग ने सूची उपलब्ध नहीं कराई। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने अलग वोटर लिस्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की। SIR के बाद 34 लाख नाम हटने का असर
केंद्रीय चुनाव आयोग ने 21 फरवरी 2026 को अंतिम वोटर लिस्ट जारी की थी। 1 जनवरी 2026 की स्थिति के अनुसार 34 लाख से अधिक नाम हटाए गए। इसके बाद प्रदेश में कुल मतदाता 5.39 करोड़ रह गए। यह प्रक्रिया दावों और आपत्तियों के निपटारे के बाद पूरी हुई। पांच पत्रों के बाद भी सूची नहीं मिली
नियमों के अनुसार केंद्रीय आयोग को 60 दिनों के भीतर विधानसभावार मतदाता सूची उपलब्ध करानी होती है। राज्य निर्वाचन आयोग ने 28 जनवरी से 22 अप्रैल तक पांच बार पत्र और रिमाइंडर भेजे। सूची नहीं मिलने पर 23 अप्रैल को राज्य आयोग ने जिला स्तर पर अलग वोटर लिस्ट तैयार करने के निर्देश जारी किए। सूची न देने का फैसला केंद्रीय आयोग का
संयुक्त मुख्य राज्य निर्वाचन पदाधिकारी आरपी सिंह जादौन ने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए सूची मांगी थी। भारत निर्वाचन आयोग का जवाब था कि वह रिवीजन प्रक्रिया के लिए वोटर लिस्ट उपलब्ध नहीं कराता। उन्होंने कहा कि सूची न देने का फैसला केंद्रीय आयोग का ही है। समन्वय की कमी से दो संभावित समस्याएं
राज्य निर्वाचन आयोग सामान्यतः विधानसभा मतदाता सूची के आधार पर वार्डवार सूची तैयार करता है, लेकिन इस बार समन्वय की कमी से व्यावहारिक समस्याएं सामने आ सकती हैं। एक्सपर्ट बोले- इंटीग्रेटेड इलेक्शन सिस्टम होना चाहिए
रिटायर्ड अधिकारी आरआर बंसल ने कहा कि परंपरागत रूप से राज्य निर्वाचन आयोग, चुनाव आयोग से मतदाता सूची लेकर उसे अपडेट करता है। उनके मुताबिक SIR के बाद आई विसंगतियों की आशंका के कारण सूची साझा नहीं की गई होगी। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकाय और विधानसभा चुनावों में मतदाता अलग-अलग पते दर्ज करा सकते हैं। वहीं पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने बताया कि केंद्रीय चुनाव आयोग साल में चार बार मतदाता सूची अपडेट करता है, जबकि राज्य निर्वाचन आयोग साल में एक बार सूची संशोधित करता है।
SIR में नाम कटा, फिर भी डाल सकेंगे वोट:केंद्र-राज्य के बीच तकरार; पुरानी वोटर लिस्ट से अध्यक्ष, पार्षद-सरपंच के चुनाव का फैसला
