UP में हल्की बारिश को बाढ़ बता रहीं मशीनें:कंपनी को पेमेंट न देने की सिफारिश; फिर भी 137 करोड़ दे दिए

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यूपी में हल्की बारिश होने पर मौसम विभाग की मशीनें बाढ़ जैसे हालात बता रहीं हैं। अगर बादल छा गए तो धूप खिलने का मैसेज भेज रहीं हैं। ये गड़बड़ी 2 साल पहले लगे ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन और ऑटोमैटिक रेन गेज की वजह से है। हैदराबाद की कंपनी ने सभी तहसील और ब्लॉक में ये मशीनें लगाईं थीं। मौसम विज्ञान विभाग ने इन मशीनों से मिले शुरुआती डेटा के बाद राहत आयुक्त को लेटर लिखा- उपकरण सही डेटा नहीं दे रहे हैं। 44°C से कम तापमान को 50°C से ज्यादा बता रहे हैं। हल्की बारिश में भारी बारिश की रिपोर्ट दे रहे हैं। पेमेंट से पहले विचार करें। इसके बावजूद राहत विभाग ने हैदराबाद की ठेका कंपनी को 137 करोड़ का भुगतान कर दिया। नतीजा ये हुआ कि मौसम विभाग को आंधी-बारिश की सटीक जानकारी नहीं मिल पा रही। मामला कहां से शुरू हुआ, ये जानिए मौसम के पूर्वानुमान के लिए स्टेशन बने, मशीनें लगीं
2023 में राहत विभाग ने मौसम के सटीक अनुमान के लिए यूपी के 826 ब्लॉक और 351 तहसीलों में ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन और ऑटोमैटिक रेन गेज लगवाने का फैसला किया। राज्य कार्यकारिणी समिति की बैठक में प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली। यूपी में 450 वेदर स्टेशन और 2000 ऑटोमैटिक रेन गेज लगाने के लिए 141.6 करोड़ रुपए का फंड मिला। विभाग ने टेंडर प्रक्रिया के बाद हैदराबाद की कंपनी ओबेल सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड को दोनों मशीनें लगाने के लिए 137 करोड़ में ठेका दिया। कंपनी ने यूपी की तहसीलों और ब्लॉक पर उपकरण लगा दिए। मौसम विभाग ने वैरिफिकेशन किया ठेके में शर्त थी कि इन उपकरणों के संचालन का वैरिफिकेशन मौसम विज्ञान विभाग करेगा। 3 पॉइंट्स पर वैरिफिकेशन होना था- वैरिफिकेशन के बाद मौसम विभाग को रिपोर्ट देनी थी। इसमें सब सही मिलने के बाद ही राहत विभाग को मशीन लगाने वाली कंपनी को भुगतान करना था। वैरिफिकेशन में गड़बड़ियां मिलीं
21 जून, 2025 को मौसम विज्ञान विभाग के निदेशक डॉ. मनीष आर. रानाल्कर ने उस वक्त के राहत आयुक्त भानुचंद्र गोस्वामी को लेटर लिखा। उन्होंने बताया कि मशीनें सही डेटा (रीडिंग) नहीं दे रही हैं। वेदर स्टेशनों से मिलने वाला डेटा पुणे के IMD सर्वर पर सेव होता है। यूपी सरकार के वेब पोर्टल पर भी ये डेटा सुरक्षित होता है। डेटा गलत होने की वजह से IMD (लखनऊ) मौसम का सही अनुमान नहीं लगा पा रहा है। निदेशक ने आगे लिखा- जब हम इस डेटा का वैरिफिकेशन और तुलना करते हैं, तब गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। कब गर्मी बढ़ेगी? कब मौसम सामान्य रहेगा? बारिश होगी या नहीं होगी? ऐसी सामान्य जानकारियों का अनुमान लगाने में भी दिक्कत आ रही है। सुझाव दिया- इन मशीनों के नेटवर्क की क्वालिटी देखनी चाहिए। साथ ही मेंटीनेंस पर भी ध्यान देने की जरूरत है। तापमान, बारिश के अनुमान गलत साबित हुए 1. हकीकत 44°C, मशीन बता रही 50°C के पार
वेदर स्टेशन पर मशीनें लगाई हैं, वे तापमान को लेकर गलत फीड दे रहीं हैं। जब मौसम विभाग के अपने केंद्रों पर तापमान 44°C भी नहीं पहुंचता, तब ये नई मशीनें 50°C से ज्यादा का तापमान दर्ज कर रही थीं। यानी जमीन पर उतनी गर्मी थी ही नहीं, जितनी ये मशीनें दिखा रही थीं। 2. जब आसमान से एक बूंद नहीं गिरी, तब मशीनों ने कर दी ‘भारी बारिश’
स्टेशनों की मशीनों का आलम ये है कि चिलचिलाती धूप में भी ये ‘झमाझम बारिश’ का डेटा दे रही थीं। हद तो तब हो गई जब मौसम विभाग के असली केंद्रों (IMD) की तुलना में इन मशीनों ने कई गुना ज्यादा बारिश दर्ज कर ली। यानी जहां हल्की फुहारें पड़ीं, वहां इन मशीनों ने ‘बाढ़’ जैसे हालात का डेटा दिया। इससे मौसम का सटीक पूर्वानुमान दे पाना विभाग के लिए मुश्किल होता जा रहा था। मौसम विभाग के निदेशक के अनुसार, सिस्टम में आई इस बड़ी खराबी के पीछे विभाग और कंपनी की ये लापरवाही रही हैं- कंपनी की बड़ी लापरवाही: न जांच कराई, न डेटा सुधारा
मौसम विभाग के निदेशक ने अपने लेटर में हैदराबाद की कंपनी ‘ओबेल सिस्टम्स’ के कामकाज पर सवाल उठाए। विभाग ने कंपनी से कहा था कि वह सर्वर पर डेटा की जांच का सिस्टम लागू करे, ताकि खराब या गलत डेटा छनकर बाहर हो जाए और सही जानकारी मिले। लेकिन कंपनी ने ऐसा कोई सिस्टम नहीं बनाया। विभाग ने सख्त निर्देश दिए थे कि कंपनी अपने सेंसरों की दोबारा जांच IMD पुणे या किसी सरकारी मान्यता प्राप्त (NABL) लैब से कराए। कंपनी ने एक बार भी सेंसरों की जांच नहीं कराई। कंपनी को समय-समय पर स्टेशनों का रखरखाव और मशीनों की जांच करनी थी। रिपोर्ट कहती है कि कंपनी ने न तो मेंटेनेंस किया और न ही मशीनों को परखा। निदेशक ने लिखा कि ओबेल सिस्टम प्रा. लि ने टेंडर की शर्तों का पालन नहीं किया। सत्यापन के बाद ही फर्म को भुगतान जारी करने पर विचार किया जाए। दिल्ली के वकील का दावा- झांसी के होटल में कंपनी के साथ मीटिंग
दिल्ली के एडवोकेट अभिषेक सक्सेना ने CBI में शिकायत दी। आरोप लगाया कि तब के राहत आयुक्त भानुचंद्र गोस्वामी और उनके OSD मनोज कुमार ने झांसी के एक होटल में 3 अक्टूबर, 2024 को ओबेल सिस्टम प्रा. लि. के एमडी ओ.रेड्‌डी से मुलाकात की। इसी मुलाकात में डील तय हुई। क्या है ओबेल सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड?
ओबेल सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की शुरुआत 1999 में ओबेल कम्प्यूटर प्राइवेट लिमिटेड नाम से हुई थी। 2012 में कंपनी का नाम ओबेल प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड किया गया। 2016 में कंपनी का नाम ओबेल सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड किया गया। कंपनी ने अब तक अलग-अलग राज्यों में 2978 ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन, 6429 ऑटोमैटिक रेन गेज, 137 ऑटोमैटिक वाटर लेवल रिकार्डर लगाए हैं। अब अधिकारियों की बात हमने मशीनों की कमियां बताईं…
इस पूरे मामले में मौसम विज्ञान विभाग के निदेशक डॉ. मनीष आर. रानाल्कर कहते हैं, ‘हमने राहत आयुक्त कार्यालय को अपनी रिपोर्ट दी थी। इसमें ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन और ऑटोमैटिक रेन गेज की जो कमियां थीं, वो बताई गई थीं। हमने टेंडर शर्त के अनुसार सत्यापन के बाद ही भुगतान कराने की बात की थी। उसके बाद हमसे कोई रिपोर्ट नहीं ली गई।’ ……………… ये पढे़- मंत्री एके शर्मा से ऊर्जा विभाग छिन सकता है:यूपी में स्मार्ट मीटर के गुस्से का असर मंत्रिमंडल विस्तार में दिखेगा; संघ ने दी थी चेतावनी स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर यूपी सरकार ने ऐसे ही यू-टर्न नहीं लिया, बल्कि जनता के गुस्से ने ऐसा करने पर मजबूर कर दिया था। सरकार के खिलाफ माहौल बनने लगा था। संघ और भाजपा नेताओं ने सरकार को फीडबैक दिया कि जल्द ही प्रीपेड मीटर पर फैसला वापस नहीं गया, तो विधानसभा चुनाव में नुकसान हो सकता है। पढ़िए पूरी खबर…