सोनीपत शहर में आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को वितरित किए जा रहे पोषण आहार की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। खरखौदा क्षेत्र में बांटी गई प्रोटीन मिल्क बार के एक पैकेट को खोलते ही उसमें जिंदा कीड़े मिले। जिला प्रशासन के माध्यम से वितरित होने वाले मिल्क बार प्रोडेक्ट की गुणवता बेहद खराब है और जिसको खोलने पर अंदर कीडे मिल्क बार को खाते दिख रहे हैं। खराब उत्पाद का मामला नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है,जो महिलाओं और बच्चों के पोषण की जिम्मेदारी उठाती है। लोगों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि जिस आहार को बच्चों और गर्भवती महिलाओं की हेल्थ को सुधारने के लिए दिया जा रहा है, वही उनकी सेहत के लिए खतरा बन सकता है। जब मामला सामने आया, तो प्रशासन हरकत में आया है और बांटने के लिए मनाही की गई, लेकिन इसने सप्लाई, स्टोरेज और गुणवत्ता जांच प्रणाली की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। सैदपुर में मिल्क बार के पैकेट से निकले कीड़े खरखौदा के सैदपुर क्षेत्र के कई घरों में आंगनबाड़ी केंद्रों से वितरित की गई मिल्क बार के पैकेट को खोलने पर उसमें कीड़े मिले। यह देखते ही लोगों में हड़कंप मच गया और मामले ने तेजी से तूल पकड़ लिया। स्थानीय लोगों के अनुसार, संबंधित मिल्क बार जनवरी 2026 में निर्मित है और इसकी एक्सपायरी डेट 25 अप्रैल 2026 है। एक्सपायरी से पहले ही इस तरह की खराबी मिलने से उत्पाद की गुणवत्ता और भंडारण व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
खरखौदा ब्लॉक सीडीपीओ नीलम द्वारा मामले में कही गई चार बातें… हेडक्वार्टर से टेंडर, उसी के अनुसार सप्लाई : सीडीपीओ नीलम ने बताया कि मिल्क बार की सप्लाई हेडक्वार्टर द्वारा किए गए टेंडर के तहत हो रही है। गनौर के बड़ी क्षेत्र की एक कंपनी से ऑर्डर मंगाया जाता है। उन्होंने बताया कि एक बच्चे को महीने में करीब 20 ग्राम मिल्क बार दिया जाता है। उन्होंने कहा कि सभी सुपरवाइजर को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जब भी वे राशन लेने जाए, तो पहले मौके पर ही उसकी गुणवत्ता की जांच करें और संतुष्ट होने के बाद ही उसे उठाए। खराबी मिलने पर 3 दिन में सूचना जरूरी : सीडीपीओ ने कहा कि अगर किसी भी आंगनवाड़ी केंद्र पर प्रोडक्ट में किसी प्रकार की कमी या खराबी पाई जाती है, तो इसकी सूचना तीन दिन के भीतर विभाग को भेजना अनिवार्य है, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके। नीलम ने माना कि मिल्क बार की एक्सपायरी डेट काफी नजदीक थी और इसके बावजूद उसका वितरण कर दिया गया। उन्होंने बताया कि अलग-अलग सुपरवाइजर की ड्यूटी लगाई गई है, जो घर-घर जाकर वितरित किए गए मिल्क बार के पैकेट खोलकर जांच कर रहे हैं, ताकि वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सके। कीड़े मिलने पर भी बयान में विरोधाभास मिल्क बार में कीड़े मिलने के मामले पर सीडीपीओ का कहना है कि कुछ चॉकलेट में जाला मिला है, जबकि हकीकत में कई पैकेट्स में कीड़े नजर आ रहे हैं। इससे उनके बयान पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस तरह की स्थिति गांव सैदपुर में सामने आई है, जहां उनके कर्मचारी ने भी उन्हें इसकी जानकारी दी थी। ज्यादातर मिल्क बार हो चुके इस्तेमाल सीडीपीओ ने दावा किया कि जिन चॉकलेट्स का वितरण किया गया था, वे अब ज्यादातर लोगों द्वारा उपयोग की जा चुकी हैं और खरखौदा ब्लॉक में अब बहुत कम स्टॉक बचा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन मिल्क बार में कीड़े मिले हैं, अगर उनका सेवन किसी बच्चे या गर्भवती महिला ने कर लिया हो, तो उनकी सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल किसी के बीमार होने की सूचना सामने नहीं आई है। लोगों में गुस्सा, सुरक्षा पर उठे सवाल घटना के बाद क्षेत्र के लोगों में भारी रोष है। उनका कहना है कि बच्चों और गर्भवती महिलाओं को दिया जाने वाला पोषण आहार सुरक्षित होना चाहिए, लेकिन इस तरह की लापरवाही से उनकी सेहत खतरे में पड़ सकती है।
फिलहाल प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच में क्या निष्कर्ष निकलता है और दोषियों के खिलाफ क्या सख्त कदम उठाए जाते हैं। खरखौदा में 137 बॉक्स हुए थे सप्लाई सीडीपीओ मिली जानकारी के मुताबिक 9 मार्च को खरखौदा ब्लॉक में मिल्क बार के 137 बॉक्स सप्लाई हुए थे। एक बॉक्स में 576 प्रोटीन मिल्क बार चॉकलेट होती है, खरखौदा ब्लॉक में करीबन 78912 चॉकलेट पहुंची थी। उन्होंने बताया कि कुछ पर 17 अप्रैल की एक्सपायरी डेट थी तो कुछ 25 अप्रैल की एक्सपायरी डेट की प्रोटीन मिल्क बार चॉकलेट है। 17 अप्रैल की एक्सपायरी वाली मिल्क बार वितरित की जा चुकी है और अभी 25 अप्रैल एक्सपायरी डेट वाली कुछ मात्रा में बची हुई है।
सोनीपत की आंगनबाड़ी में चॉकलेट में मिले कीड़े:केंद्र में गर्भवती महिलाओं को बांटी, डेट एक्सपायर भी नहीं; क्वालिटी बेहद खराब
