दोपहर का वक्त है। बाहर तापमान 43 डिग्री सेल्सियस के पार है। फरीदाबाद में बीके अस्पताल के परिसर में कंटेनर में बने अस्थाई अस्पताल के बाहर कुछ मरीज जमीन पर चादर बिछाकर लेटे हैं। कोई हाथ से पंखा झल रहा है, तो कोई पेड़ की छांव में बैठा पसीना पोंछ रहा है। अंदर वार्ड में जाते ही गर्म हवा का थपेड़ा महसूस होता है। टीन-लोहे के कंटेनरों से बने इस अस्थायी अस्पताल में लगे AC बंद पड़े हैं। वार्ड के अंदर ज्यादातर बेड खाली दिखाई देते हैं। वजह पूछने पर बाहर बैठे परिजन कहते हैं- दिन में यहां अंदर रहना मुश्किल है… मरीज खुद बाहर आ जाते हैं। दैनिक भास्कर एप टीम जब मेडिकल वार्ड के बाहर पहुंची तो एक बुजुर्ग महिला जमीन पर लेटी मिलीं। हाथ पर कैनुला लगा था। पास में बैठी दूसरी महिला हाथ से पंखा कर रही थी। 75 वर्षीय रज्जो देवी ने बताया- 12 दिन से भर्ती हूं… सुबह-शाम डॉक्टर आते हैं, लेकिन दोपहर में अंदर इतनी गर्मी हो जाती है कि बाहर आकर बैठना पड़ता है। कुछ दूरी पर पेड़ के नीचे कई मरीज और तीमारदार बैठे थे। कोई मेडिकल रिपोर्ट से हवा कर रहा था तो कोई अखबार मोड़कर पंखा बना चुका था। एक युवक बोला, “डॉक्टर राउंड पर आते हैं तो मरीज अंदर चले जाते हैं, फिर थोड़ी देर बाद वापस बाहर आ जाते हैं।”
सबसे पहले…इन 3 PHOTOS से समझें मरीजों की परेशानी
अब जानिये…मरीज क्या कह रहे दिन में खाली हो जाते हैं वार्ड कंटेनर अस्पताल के भीतर दोपहर के समय लगभग सभी बेड खाली दिखाई दिए। मरीजों का कहना है कि लोहे के कंटेनरों पर धूप पड़ने से अंदर का तापमान और बढ़ जाता है। इंद्रावती ने बताया- “मेरे बेटे को टाइफाइड बुखार है। यहां ना पानी की सुविधा है और ना ही शौचालय ठीक हैं। महिलाएं सबसे ज्यादा परेशान हैं।” मरीज बोले-सिर्फ स्टाफ के कमरे का एसी चालू नैंसी ने बताया कि वह एक दिन पहले ही यहां पर एडमिट हुई हैं। दिन के समय सभी बेड खाली रहते है, क्योंकि मरीज गर्मी के कारण बाहर पेड़ की छांव में रहते हैं। अंदर रहना बहुत ही मुश्किल हो जाता है। रात के समय मरीज वापस बेड पर लौट आते हैं। मरीज पिंटू शिकवा करते हैं-केवल स्टाफ के कमरे में ऐसी चलता है, बाकि पंखे की गर्म हवा में रहने को मजबूर हैं।
2021 में कोविड के दौरान बना था अस्पताल स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक कोविड महामारी के दौरान साल 2021 में करीब 1.40 करोड़ रुपए की लागत से 120 बेड का यह कंटेनर अस्पताल बनाया गया था। उस समय इसे आधुनिक सुविधाओं से लैस बताया गया था, लेकिन अब यहां सिर्फ एक मेडिकल वार्ड ही संचालित हो रहा है।
रोजाना हजार के करीब ओपीडी बीके अस्पताल में सभी प्रकार की ओपीडी की संख्या करीब एक से डेढ़ हजार के बीच रहती है। कई बार मरीज ज्यादा भर्ती होते हैं तो सभी को बेड मिल पाना बेहद मुश्किल होता है। ऐसे में मरीजों को बीके अस्पताल के परिसर में अस्थायी तौर पर बनाए गए कंटेनरों में शिफ्ट कर दिया जाता है।
टीन शेड में बाहर से 5 से 8 डिग्री तक ज्यादा गर्मी एक्सपर्ट के मुताबिक टीन शेड की सतह सीमेंट की छत से करीब 10 से 20 डिग्री सेल्सियस ज्यादा गर्म हो सकती है। कमरे के अंदर भी असर पड़ता है। टीन शेड वाले कमरे बाहर के तापमान से 5–8°C ज्यादा गर्म महसूस हो सकते हैं। सीमेंट की छत गर्मी धीरे-धीरे सोखती है, इसलिए अंदर का तापमान अपेक्षाकृत कम रहता है।
CMO बोले- नए AC खरीदने के दिए आदेश इस पर CMO डॉ. जयंत आहूजा से बताया कि ये कंटेनर अस्पताल कोविड काल में बनाया गया था। इसके रखरखाव के लिए बजट मांगा गया है। कई AC खराब हैं और नए AC खरीदने के आदेश दे दिए गए हैं। साथ ही शौचालयों की सीवरेज लाइन भी खुलवा दी गई है।
